परीक्षा परिणाम सुधारने लागू हुआ मेंटर और ब्लूप्रिंट का नया फार्मूला, बदला रिपोर्ट कार्ड का गणित

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के स्कूली शिक्षा की तस्वीर बदलने और आगामी शैक्षणिक सत्र 2025-26 के परीक्षा परिणामों में गुणात्मक सुधार लाने के लिए शिक्षा विभाग ने एक व्यापक और महत्वाकांक्षी कार्ययोजना तैयार की है। राज्य शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर श्री हरिस एस और सीईओ जिला पंचायत श्री प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में जिले के सभी प्राचार्यों को निर्देशित किया गया है कि पढ़ाई के तरीके में परिवर्तन के साथ ही छात्रों के रिजल्ट तैयार करने के गणित में भी बड़ा और अहम बदलाव किया गया है। इस नए आदेश के तहत सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन मूल्यांकन प्रणाली में किया गया है। अब छात्रों के रिपोर्ट कार्ड में साल भर की मेहनत दिखेगी। जारी निर्देशों के मुताबिक कक्षा पहली से चौथी और छठवीं-सातवीं के वार्षिक नतीजों में अब तिमाही और छमाही परीक्षाओं के 20-20 प्रतिशत अंक अधिभार के रूप में जुड़ेंगे, जबकि वार्षिक परीक्षा का भार 60 प्रतिशत रहेगा। वहीं कक्षा 5 वीं और 8 वीं की बोर्ड कक्षाओं के साथ-साथ 9 वीं और 11 वीं के वार्षिक परिणामों में छमाही परीक्षा के 30 प्रतिशत और वार्षिक परीक्षा के 70 प्रतिशत अंकों को जोड़कर अंतिम परिणाम तैयार किया जाएगा।
जिला शिक्षा अधिकारी श्री बीआर बघेल ने बताया कि कलेक्टर श्री हरिस एस और सीईओ जिला पंचायत श्री प्रतीक जैन के सतत मार्गदर्शन के अनुरूप जिले में हाईस्कूल और हायर सेकेण्डरी बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट नतीजे हासिल करने के लिए कार्ययोजना तैयार किया गया है और इस दिशा में मिशन डिस्टिंक्शन के तहत कड़े लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। जिसके तहत अर्द्धवार्षिक परीक्षा में 90 प्रतिशत से अधिक प्राप्तांक हासिल करने वाले प्रत्येक छात्र-छात्राओं के लिए एक मेंटर की नियुक्ति कर प्रत्येक सप्ताह समीक्षा करने सहित संबंधित छात्र-छात्रा को समुचित अध्यापन करवाने के निर्देश दिए गए हैं। इस दौरान मेंटर द्वारा संबंधित छात्र-छात्रा की लिखावट, भाषा शैली एवं अन्य कमियों को दूर करने सकारात्मक प्रयास किया जाएगा। इसी तरह अन्य विषयों के परीक्षार्थियों की दिक्कतों को भी फोकस कर समाधान करने पहल किया जाएगा। पाठ्यक्रम पूर्ण होने के बाद बीते 05 वर्षों के प्रश्न पत्रों का हल करने का अभ्यास भी इन परीक्षार्थियों को करवाया जाएगा। जिससे जिले के अधिकाधिक परीक्षार्थी मेरिट सूची में अपना स्थान हासिल कर सके। इसके अलावा यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कम से कम 5 प्रतिशत परीक्षार्थी 80 फीसदी से अधिक अंक लाएं और तृतीय श्रेणी या पूरक आने वाले परीक्षार्थियों की संख्या न्यूनतम से न्यूनतम हो। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पाठ्यक्रम पूरा करने की समय-सीमा भी तय कर दी गई है।
शिक्षा विभाग ने कमजोर बच्चों को मुख्य धारा में लाने के लिए मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए मेंटरशिप की अनूठी पहल शुरू की है। इसके तहत स्कूलों में कमजोर बच्चों के समूह बनाए जाएंगे और प्रत्येक समूह के लिए एक शिक्षक को मेंटर नियुक्त किया जाएगा, जो उन बच्चों की पढ़ाई, लेखन और त्रुटियों के सुधार की व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेंगे। साथ ही पियर ग्रुप लर्निंग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिसमें होशियार और कमजोर बच्चे एक साथ समूह में पढ़ाई करेंगे। खराब लिखावट और मात्रात्मक त्रुटि सुधार के लिए कक्षा पहली से ही हैंडराइटिंग सुधारने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। परीक्षा की तैयारी को रटने की जगह समझने पर आधारित बनाने के लिए ब्लूप्रिंट और प्रश्न बैंक की सहायता ली जाएगी। शिक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे छात्रों को ब्लूप्रिंट समझाएं ताकि उन्हें पता हो कि किस अध्याय का कितना महत्व है। जिला स्तर पर विषय विशेषज्ञों की टीम द्वारा प्रश्न बैंक तैयार किया जाएगा और मेधावी छात्रों के लिए फरवरी माह में विशेष कार्यशालाएं आयोजित कर उन्हें मेरिट में आने के गुर सिखाए जाएंगे। शिक्षा विभाग ने जारी निर्देश में स्पष्ट किया है कि केवल अच्छा रिजल्ट दिखाने की स्पर्धा में स्तरहीन मूल्यांकन स्वीकार नहीं किया जाएगा और ऐसा करने वालों पर कार्यवाही होगी। अधिकारियों को फरवरी तक स्कूलों की सघन मॉनिटरिंग करने और प्राचार्यों को कार्ययोजना लागू कर पालन प्रतिवेदन जमा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि जिले के परीक्षा परिणामों में अपेक्षित गुणात्मक सुधार सुनिश्चित किया जा सके।







