मनरेगा ने बदली रामकुमार की तकदीर, डबरी बनी सिंचाई, रोजगार और आय का स्थायी साधन

रायपुर। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) ग्रामीण क्षेत्रों में केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह आजीविका सशक्तिकरण और आर्थिक आत्मनिर्भरता का प्रभावी माध्यम बनकर उभर रही है। मनरेगा के अंतर्गत डबरी निर्माण जैसे कार्य आज ग्रामीण किसानों के लिए आय के नए स्रोत, रोजगार के अवसर और स्थायी विकास की मजबूत नींव साबित हो रहे हैं। इसी तारतम्य में विकासखंड मुंगेली के ग्राम पंचायत रामगढ़, के किसान श्री रामकुमार यादव के जीवन में मनरेगा के तहत निर्मित डबरी ने नई दिशा और स्थायित्व प्रदान किया है।
किसान श्री रामकुमार की निजी भूमि पर मनरेगा योजना के अंतर्गत 1.58 लाख रुपये की लागत से डबरी का निर्माण कराया गया, जिससे 676 मानव दिवस का सृजन हुआ। इस जल संरचना के निर्माण से न केवल उन्हें सिंचाई की स्थायी सुविधा मिली, बल्कि आजीविका के नए अवसर भी खुले। डबरी निर्माण के पश्चात श्री रामकुमार द्वारा स्वयं मत्स्य पालन प्रारंभ किया गया, जिससे उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 30 से 35 हजार रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। इसके साथ ही डबरी की मेड़ पर अरहर की फसल लेकर वे लगभग 20 हजार रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। इस प्रकार उनकी कुल आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और आजीविका को स्थायित्व मिला है।
डबरी निर्माण से पूर्व सिंचाई संसाधनों के अभाव में खेती प्रभावित होती थी, जिससे उत्पादन सीमित रहता था। किंतु अब यह डबरी श्री रामकुमार के लिए स्थायी जलस्रोत बन चुकी है, जिसने कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को संभव बनाया है। इस सफलता को देखते हुए आयुक्त मनरेगा, रायपुर श्री तारन प्रकाश सिन्हा ने ग्राम रामगढ़ पहुंचकर डबरी का निरीक्षण किया और हितग्राही से संवाद कर आजीविका एवं आय में हुए सकारात्मक परिवर्तन की जानकारी ली। उन्होंने डबरी निर्माण को ग्रामीण आय संवर्धन का प्रभावी मॉडल बताया।
जिला कलेक्टर श्री कुन्दन कुमार ने कहा कि मनरेगा के माध्यम से निर्मित जल संरचनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाती हैं। डबरी जैसे कार्य किसानों को सिंचाई, मत्स्य पालन और पशुपालन जैसे बहुआयामी लाभ प्रदान करते हैं। जिला प्रशासन का निरंतर प्रयास है कि अधिक से अधिक किसानों को ऐसी टिकाऊ परिसंपत्तियों का लाभ मिले। सीईओ, जिला पंचायत मुंगेली ने कहा, डबरी निर्माण से न केवल स्थायी संपत्तियों का सृजन होता है, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार भी मिलता है। ग्राम पंचायतों को निर्देशित किया गया है कि पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का अधिकतम लाभ पहुंचे। योजनाओं का सही और प्रभावी क्रियान्वयन हो, तो आय वृद्धि और आजीविका सशक्तिकरण स्वाभाविक रूप से संभव हो जाता है।







