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मिशन 2026 अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंचा, नक्सल-मुक्त बस्तर का सपना हो रहा साकार – सुन्दरराज पी.

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जगदलपुर। बस्तर आईजी सुन्दरराज पट्टिलिंगम ने कहा कि मिशन 2026 के तहत बस्तर आज एक ऐतिहासिक परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। लंबे समय तक हिंसा और भय के साये में रहा यह क्षेत्र अब शांति, विश्वास और विकास की नई दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन और बस्तर की जनता के संयुक्त संकल्प ने नक्सल-मुक्त बस्तर के लक्ष्य को लगभग साकार कर दिया है। अब बस्तर स्थायी शांति, प्रगति और जनविश्वास के एक नए अध्याय की ओर आत्मविश्वास के साथ अग्रसर है। उन्हाेने कहा कि शासन की मंशानुरूप पुलिस एवं सुरक्षाबलाें के जवानाें ने स्थानीय प्रशासन तथा अन्य सभी हितधारकों के साथ समन्वित प्रयास करते हुए असंभव को संभव कर दिखाया है। बस्तर संभाग में पिछले 31 दिनों की उपलब्धियों ने स्पष्ट कर दिया है कि मिशन 2026 अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है।
उन्हाेने कहा कि बस्तर संभाग में एक महीने में 170 माओवादी कैडरों ने हिंसा का मार्ग त्यागकर समाज के साथ जुड़ने का निर्णय लिया। बस्तर में सक्रिय शीर्ष माओवादी कैडरों के आत्मसमर्पण से संगठन की नेतृत्व संरचना पूर्ण रूप से निष्क्रिय हो चुकी है। उन्हाेने कहा कि 343 से अधिक घातक हथियार बरामदगी जिसमें AK-47, INSAS, SLR, BGL लांचर और LMG जैसे हथियारों की बड़ी बरामदगी ने माओवादियाें की सैन्य क्षमता को लगभग समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही पिछले 31 दिनों में ₹6.75 करोड़ नकद तथा 8 किलोग्राम सोना (₹12 करोड़ से अधिक मूल्य) की बरामदगी माओवादी तंत्र के आर्थिक आधार के कमजोर होने का स्पष्ट संकेत है।
सुन्दरराज पी. ने कहा कि नक्सल विरोधी अभियानों के इतिहास में एक ही महीने की अवधि में इतनी बड़ी नकदी और सोने की बरामदगी एक महत्वपूर्ण कीर्तिमान है। “पूना मारगेम–पुनर्वास से पुनर्जीवन” का व्यापक प्रभाव पड़ा है। बड़ी संख्या में भटके माओवादी कैडर हिंसा छोड़कर सम्मान जनक जीवन की ओर लौट रहे हैं। 27 महीनों में 2700 से अधिक माओवादी पुनर्वासित हुए, यह आंकड़ा बस्तर में स्थायी शांति और विश्वास के वातावरण को दर्शाता है। निर्णायक सुरक्षा अभियानों, लगातार आत्मसमर्पण, हथियार बरामदगी और डंप रिकवरी से संगठन की संरचना और लड़ाकू क्षमता लगभग समाप्त हो चुकी है। शासन की मंशानुरूप सुरक्षा बलों, स्थानीय प्रशासन, स्थानीय जनता और सभी संबंधित हितधारकों के संयुक्त प्रयासों से नक्सल-मुक्त बस्तर का लक्ष्य अब केवल औपचारिक पूर्णता की ओर अग्रसर है।

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