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ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से मीना की आय में हुई सात गुणा वृद्धि

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महासमुंद। कहते हैं खेती में मेहनत के साथ यदि नई सोच और सही तकनीक जुड़ जाए, तो खेत भी सोना उगलने लगते हैं। जिले के पिथौरा विकासखण्ड अंतर्गत बरनाईदादर गांव की कृषक श्रीमती मीना पटेल ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। पारंपरिक धान की खेती से आगे बढ़ते हुए उन्होंने आधुनिक उद्यानिकी खेती को अपनाया और ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से अभूतपूर्व सफलता हासिल की।
श्रीमती मीना पटेल बताती हैं कि उनके पास कुल 4.13 हेक्टेयर सिंचित कृषि भूमि है। पहले वे मुख्य रूप से धान की खेती करती थीं, जिससे उन्हें सीमित आय प्राप्त होती थी। तभी उद्यान विभाग के अधिकारियों की सलाह पर उन्होंने वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना अंतर्गत ग्राफ्टेड बैगन एवं टमाटर प्रदर्शन योजना का लाभ लिया और एक एकड़ क्षेत्र में ग्राफ्टेड टमाटर की खेती शुरू की। खेती में आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रिप सिंचाई एवं मल्चिंग का उपयोग किया गया, जिससे पानी की बचत के साथ फसल की गुणवत्ता और उत्पादन में भी वृद्धि हुई। विभाग द्वारा उन्हें 30 हजार रुपये का अनुदान प्रदान किया गया, जिससे उन्नत खेती को अपनाने में सहायता मिली।
ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से श्रीमती मीना पटेल को बेहतर परिणाम प्राप्त हुए। जहां पहले धान की खेती से प्रति एकड़ लगभग 20 क्विंटल उत्पादन एवं सीमित लाभ प्राप्त होता था, वहीं अब ग्राफ्टेड टमाटर से लगभग 400 क्विंटल प्रति एकड़ उत्पादन प्राप्त हो रहा है। टमाटर की बिक्री पिथौरा एवं ओडिशा की मंडियों में की गई, जिससे उन्हें बेहतर बाजार मूल्य मिला। श्रीमती मीना बताती है कि धान की खेती में लगभग 36 हजार 600 रुपये तक की आय होती थी, जबकि ग्राफ्टेड टमाटर की खेती से सभी लागत निकालने के बाद लगभग 2 लाख 80 हजार रुपये का लाभ प्राप्त हुआ। इस प्रकार उनकी आय में लगभग सात गुना वृद्धि हुई है। इस सफलता का सकारात्मक प्रभाव आसपास के किसानों पर भी पड़ा है। अब क्षेत्र के अन्य किसान भी उद्यानिकी फसलों एवं आधुनिक कृषि तकनीकों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

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