सूर्य उपासना और तिल-खिचड़ी दान के साथ मकर संक्रांति का पर्व धूमधाम से मनाया गया

मकर संक्रांति सनातन संस्कृति का एक अत्यंत पावन और शुभ पर्व है, जो सूर्य देव की उपासना, प्रकृति और मानव जीवन के बीच संतुलन को दर्शाता है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण काल की शुरुआत होती है। नर्मदापुरम के सेठानी घाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ था, जहां नर्मदापुरम, बैतूल, छिंदवाड़ा और भोपाल जैसे बड़े शहरों से लोग स्नान और आस्था की डुबकी लगाने पहुंचे। इसी तरह नेमावर के पेढ़ी घाट, सिद्धनाथ घाट और नागर घाट पर भी बड़ी संख्या में भक्तों ने नर्मदा तट पर हर-हर नर्मदे के जयघोष के साथ स्नान, दान और सूर्य उपासना की। इस अवसर पर तिल और खिचड़ी दान करने का विशेष महत्व माना जाता है, साथ ही दरिद्र नारायण को कंबल और आवश्यक सामग्री भेंट करने की परंपरा निभाई गई। प्रशासन और पुलिस ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए, जबकि शास्त्रों के अनुसार सूर्य देव को लाल वस्त्र, गेहूं, गुड़, मसूर दाल, तांबा, स्वर्ण, सुपारी, लाल पुष्प, नारियल और दक्षिणा अर्पित करने का विधान है।







