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जग्गी हत्याकांड का जल्द हो सकता है फैसला, अमित जोगी को और समय देने से कोर्ट का इनकार

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बिलासपुर। राज्य के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अमित जोगी ने अतिरिक्त समय की मांग की गई। कोर्ट ने इस मांग को सख्ती से खारिज कर दिया। चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच में चल रही इस सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया गया कि अब इस मामले में और देरी नहीं की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि कल इस केस में अंतिम सुनवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि साल 2003 में एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इससे पूरे प्रदेश में सनसनी फैल गई थी। इस मामले में 2007 में निचली अदालत ने 28 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था। अब यह मामला हाईकोर्ट में लंबित है, जहां अंतिम बहस के बाद जल्द ही फैसला होने की संभावना जताई जा रही है।

रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। इस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया। रामावतार जग्गी पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के करीबी थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर एनसीपी में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ गए। शुक्ल ने जग्गी को एनसीपी का कोषाध्यक्ष बनाया था।

यह पाए गए दोषी
जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत और विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए थे।
अमित जोगी को मिली जमानत-
जग्गी हत्याकांड में अंतिम सुनवाई से पहले मुख्य आरोपी अमित जोगी ने रायपुर की लोवर कोर्ट से जमानत हासिल कर ली है। अदालत ने उन्हें 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर राहत दी है।

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