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जंबूरी के आयोजन में कथित गड़बड़ी को लेकर सदन गरमाया,विपक्ष का वाकआउट

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रायपुर। जंबूरी का आयोजन विवाद में बना हुआ था। आयोजन तो जैसे तैसे हो गया लेकिन विधानसभा के बजट सत्र में एक बार फिर यह मामला उठा। विपक्ष ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में नियमों में बदलाव कर ठेकेदार को पहले ही काम दे दिया गया, जबकि स्कूल शिक्षा मंत्री ने सभी आरोपों से इनकार किया। हंगामे के बाद विपक्ष ने वाकआउट कर दिया।
प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने स्काउट्स एंड गाइड्स के पदेन चेयरमैन को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि स्कूल शिक्षा मंत्री को पदेन अध्यक्ष बनाने के लिए नियमों में संशोधन कब किया गया। स्कूल शिक्षा मंत्री गजेन्द्र यादव ने जवाब में बताया कि राज्य गठन के बाद शुरू में संस्था को स्वतंत्र रखते हुए चुनाव से अध्यक्ष चुने जाते थे। बाद में पिछली सरकार ने नियम बदलकर स्कूल शिक्षा मंत्री को पदेन अध्यक्ष बनाने का प्रावधान किया।
कांग्रेस विधायक ने आरोप लगाया कि 10 दिसंबर को जंबूरी के लिए टेंडर जारी हुआ, जबकि 13 दिसंबर को मंत्री को पदेन अध्यक्ष बनाया गया, जिससे प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि जंबूरी आयोजन को देखते हुए विधिवत नियुक्ति आदेश जारी किया गया और सभी कार्य नियमों के तहत हुए। मंत्री ने यह भी बताया कि राष्ट्रीय रोवर-रेंजर जंबूरी के आयोजन का निर्णय 14 नवंबर 2025 को राष्ट्रीय मुख्यालय, नई दिल्ली द्वारा लिया गया था। स्थान चयन के लिए रायपुर और बालोद का निरीक्षण किया गया, जिसके बाद बालोद को आयोजन स्थल चुना गया।
विपक्ष ने आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तों में बदलाव कर 90 बिंदुओं को घटाकर 52 कर दिया गया और टेंडर से पहले ही काम शुरू हो गया। मंत्री ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि राष्ट्रीय मुख्यालय और राज्य स्तर के कार्य अलग-अलग थे और टेंडर के बाद ही काम शुरू हुआ। विपक्ष ने करीब 5 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप भी लगाया, जिसे मंत्री ने सिरे से नकार दिया और कहा कि अब तक किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत के नेतृत्व में सरकार पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाया और सदन से वाकआउट कर दिया।

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