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एग्जीबिशन और ट्रेड फेयर में स्टॉल लगाने में GST पंजीयन अनिवार्य नहीं – सीए तारवानी

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रायपुर। एग्जीबिशन, ट्रेड फेयर और आनंद मेला में स्टॉल लगाने को लेकर व्यापारियों के बीच जीएसटी पंजीयन संबंधी कई तरह के भ्रम बने रहते हैं। कर विशेषज्ञ सीए चेतन तारवानी के अनुसार जीएसटी के नियम इस बात पर निर्भर करते हैं कि व्यापारी अपने राज्य में स्टॉल लगा रहा है या किसी अन्य राज्य में। यदि कोई व्यापारी अपने ही राज्य में एग्जीबिशन या ट्रेड फेयर में स्टॉल लगाता है और वह पहले से जीएसटी में पंजीकृत है, तो उसे अपनी बिक्री पर जीएसटी वसूल कर सरकार को जमा करना अनिवार्य होता है। वहीं, जिन व्यापारियों का वार्षिक टर्नओवर वस्तुओं के लिए 40 लाख रुपये और सेवाओं के लिए 20 लाख रुपये से कम है, उन्हें केवल स्टॉल लगाने के लिए जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराने की आवश्यकता नहीं होती।
हालांकि, यदि कोई व्यापारी अपने राज्य के बाहर किसी अन्य राज्य में आयोजित एग्जीबिशन या ट्रेड फेयर में स्टॉल लगाता है, तो वह कैजुअल टैक्सेबल पर्सन की श्रेणी में आता है और ऐसी स्थिति में जीएसटी पंजीयन कराना अनिवार्य हो जाता है, चाहे उसका टर्नओवर कितना भी हो। कर विशेषज्ञ चेतन तारवानी ने यह भी स्पष्ट किया है कि एग्जीबिशन या ट्रेड फेयर के आयोजकों के लिए भी अलग नियम लागू होते हैं। यदि आयोजक जीएसटी में पंजीकृत है, तो वह स्टॉल शुल्क या कमीशन पर 18 प्रतिशत जीएसटी वसूल करेगा, जबकि अपंजीकृत आयोजक जीएसटी नहीं ले सकता।
इसके अलावा, यदि कोई एग्जीबिशन या ट्रेड फेयर सरकारी स्तर पर आयोजित किया जाता है और उसमें स्टॉल लगाने वाला व्यापारी जीएसटी में पंजीकृत है, तो ऐसे मामलों में रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म लागू होता है। इस स्थिति में जीएसटी का भुगतान आयोजक की बजाय स्टॉल लगाने वाले व्यापारी को स्वयं करना होता है। कर विशेषज्ञ चेतन तारवानी का कहना है कि व्यापारियों को इन नियमों की सही जानकारी लेकर ही एग्जीबिशन में भाग लेना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की कर संबंधी जटिलताओं से बचा जा सके।

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