परिक्रमा पथ परियोजना पर बढ़ता विवाद, भूमि अधिग्रहण और पारदर्शिता पर उठे सवाल

बहुचर्चित परिक्रमा पथ परियोजना लगातार विवादों के केंद्र में बनी हुई है। धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई इस परियोजना पर निजी भूमि अधिग्रहण, सरकारी खर्च और निर्णय प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। किसानों की आपत्तियों से शुरू हुआ विवाद प्रशासनिक स्तर से होते हुए हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को जनहित से जोड़ते हुए चक्काजाम किया, वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने भी परियोजना का विरोध किया है। यह विवाद अब केवल सड़क निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है। चर्चा का विषय सार्वजनिक धन के उपयोग, भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता तथा प्रशासनिक निर्णयों की पारदर्शिता और जवाबदेही बन गया है। प्रभावित किसानों का दावा है कि परियोजना के लिए पर्याप्त शासकीय भूमि उपलब्ध है और वैकल्पिक सरकारी मार्ग का उपयोग किया जा सकता है। ऐसे में निजी कृषि भूमि के अधिग्रहण की आवश्यकता पर सवाल उठ रहे हैं। परियोजना को लेकर कई प्रश्न सामने आए हैं। यदि निजी भूमि अधिग्रहण के पीछे तकनीकी कारण हैं, तो उन्हें सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं किया गया? यदि वैकल्पिक मार्ग व्यवहार्य नहीं थे, तो क्या इस संबंध में कोई स्वतंत्र तकनीकी रिपोर्ट उपलब्ध है? वहीं, यदि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार अपनाई गई है, तो किसानों के विरोध, विपक्ष के आंदोलन और मामले के हाईकोर्ट तक पहुंचने के कारणों पर भी चर्चा हो रही है। इन सवालों के चलते परियोजना की निर्णय प्रक्रिया और संसाधनों के उपयोग को लेकर बहस तेज हुई है। हालांकि अब तक किसी सक्षम जांच एजेंसी या न्यायालय ने परियोजना में भ्रष्टाचार अथवा वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं की है। दूसरी ओर, परियोजना के विभिन्न चरणों पर उठी आपत्तियों, शिकायतों और राजनीतिक विरोध के बीच स्वतंत्र तकनीकी, प्रशासनिक और वित्तीय ऑडिट की मांग भी सामने आ रही है। यदि भविष्य में किसी स्वतंत्र जांच में यह पाया जाता है कि उपलब्ध शासकीय भूमि के बावजूद अनावश्यक रूप से निजी भूमि का अधिग्रहण किया गया या परियोजना की लागत को लेकर अनियमितताएं हुईं, तो संबंधित तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, यदि जांच में पूरी प्रक्रिया नियमों के अनुरूप पाई जाती है, तो परियोजना पर लगाए गए आरोपों के संबंध में भी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।







