1998 के वंचित शिक्षकों को यूपीएस के साथ ओपीएस चुनने का मौका दे सरकार

जगदलपुर। प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष राजकिशोर तिवारी एवं प्रदेश महासचिव डेंसनाथ पांड़े ने संयुक्त बयान जारी कर राज्य सरकार से मांग की है कि वर्ष 1998 में नियुक्त शिक्षकों को यूपीएस के साथ-साथ ओपीएस (पुरानी पेंशन योजना) चुनने का पुन: अवसर प्रदान किया जाए। संघ पदाधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार अगस्त 2025 से नियुक्त कर्मचारियों के लिए यूपीएस लागू करने जा रही है, जबकि सरकार को ओपीएस को ही जारी रखना चाहिए था।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1998 में नियुक्त कई शिक्षकों का नियमितीकरण वर्ष 2001 में तथा संविलियन वर्ष 2018 में हुआ, लेकिन संविलियन तिथि को ही नियुक्ति तिथि मानते हुए पूर्व सेवा को शून्य कर दिया गया। संघ के अनुसार पूर्व सेवा की गणना न होने के कारण लगभग 12 हजार शिक्षक दस वर्ष की अनिवार्य सेवा अवधि से वंचित मान लिए गए और उन्हें पुरानी पेंशन योजना का लाभ नहीं मिल सका। परिणामस्वरूप कई शिक्षक ओपीएस का विकल्प भी नहीं भर पाए और उन्हें जबरन एनपीएस के दायरे में रखा गया।
संघ ने कहा कि अन्य विभागों के कर्मचारियों को पेंशन लाभ मिल रहा है, जबकि केवल 1998-99 के एल.वी. संवर्ग के शिक्षकों के साथ अन्याय हो रहा है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर द्वारा पारित आदेश (डब्ल्यूपीएस नंबर 777/2021) में 120 दिनों के भीतर वर्ष 1998 के शिक्षकों की सेवा को शून्य न मानते हुए उन्हें पेंशन के दायरे में लाने तथा पूर्ण पेंशन लाभ देने के निर्देश दिए गए हैं। संघ ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को कई बार ज्ञापन सौंपकर अवगत कराया है। मुख्यमंत्री द्वारा आश्वासन दिए जाने के बावजूद अब तक ओपीएस विकल्प पुन: खोलने एवं पूर्व सेवा गणना संबंधी कोई आदेश जारी नहीं हुआ है। प्रदेश शिक्षक कल्याण संघ ने सरकार से मांग की है कि संवेदनशीलता का परिचय देते हुए यूपीएस के साथ ओपीएस का विकल्प पुन: जारी किया जाए तथा पूर्व सेवा गणना का आदेश शीघ्र जारी कर 1998-99 के शिक्षकों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाए।







