ChhattisgarhRegionSports

पूर्व क्रिकेटर राजेश चौहान पर 17.52 लाख की धोखाधड़ी का आरोप, कोर्ट ने दिए एफआईआर दर्ज करने के निर्देश

Share

दुर्ग। निजी कंपनी से ट्रांसपोर्ट के मिले कार्य का झांसा देकर साझेदारी में व्यवसाय करने की रज़ामंदी पर पूर्व भारतीय क्रिकेटर राजेश चौहान पर दुर्ग जिला न्यायालय के जज न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने राजेश चौहान के खिलाफ धोखाधड़ी का मामले में एफआईआर दर्ज करने के निर्देश देते हुए जांच प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा है।
इस पूरे मामले में जो जानकारी मिली है उसके अनुसार राजेश चौहान ने पीडि़त याचिकाकर्ता दिनकर विश्वमित्र से गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को जिंदल इस्पात लिमिटेड में ट्रांसपोर्ट का काम मिलने की गलत जानकारी देकर उससे कंपनी में साझेदार बनने के नाम पर 17.52 लाख रुपये एंठ लिए। पीडि़त दिनकर को जब ठगी का एहसास हुआ तो उसने राजेश चौहान के खिलाफ पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने थाने पहुंचा लेकिन उसकी रिपोर्ट पुलिस ने दर्ज नहीं की। इसके बाद दिनकर ने अपने वकील के माध्यम से कोर्ट में याचिका दायर की जिस पर जिला न्यायालय में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऐश्वर्या दीवान ने मोहन नगर थाना प्रभारी को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4) के तहत केस दर्ज कर विधि अनुसार जांच करने और अंतिम प्रतिवेदन न्यायालय में पेश करने का निर्देश दिये है।
पीडि़त दिनकर विश्वमित्र ने कोर्ट में बताया कि उसकी मुलाकात दोस्त सरोज कुमार के जरिए राजेश चौहान से हुई थी। बातचीत के दौरान राजेश ने कहा कि उसकी गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को ओडिशा के क्योंझर स्थित जिंदल इस्पात लिमिटेड में आयरन और अन्य सामग्री के ट्रांसपोर्ट का बड़ा ठेका मिला है। अगर वह ट्रक लगाकर इस काम में पार्टनर बनता है, तो उसे अच्छा मुनाफा मिलेगा। भरोसा बढ़ाने के लिए आरोपी ने जिंदल इस्पात का कथित वर्क ऑर्डर और दूसरे दस्तावेज भी दिखाए। इन्हें देखकर दिनकर ने साझेदारी के लिए हामी भर दी। 30 जुलाई 2021 को दोनों पक्षों के बीच इकरारनामा हुआ। उसी दौरान दिनकर ने 2.51 लाख रुपए का पहला भुगतान किया। इसके बाद आरोपी के कहने पर गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी के खाते में दो किस्तों में 15.01 लाख रुपए और ट्रांसफर कर दिए। इस तरह आरोपी ने कुल 17.52 लाख रुपए ले लिए।
पीडि़त दिनकर को को भरोसा था कि जल्द ही ट्रांसपोर्ट का काम शुरू होगा, लेकिन काफी समय बीतने के बाद भी न तो काम मिला और न ही किसी तरह का फायदा। जब लंबे समय तक कोई काम शुरू नहीं हुआ तो दिनकर खुद ओडिशा स्थित जिंदल इस्पात लिमिटेड पहुंचा। वहां कंपनी अधिकारियों से जानकारी लेने पर उसे पता चला कि राजेश चौहान या उसकी गोविंद ट्रांसपोर्ट कंपनी को ऐसा कोई ट्रांसपोर्ट ठेका कभी दिया ही नहीं गया था। उसे जो वर्क ऑर्डर और दूसरे दस्तावेज दिखाए गए थे, वे फर्जी थे। इसके बाद उसे एहसास हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है।
पीडि़त ने मोहन नगर थाना और दुर्ग के पुलिस अधीक्षक कार्यालय में लिखित शिकायत दी। उसका आरोप है कि शिकायत के बावजूद मामला दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद उसने अपने अधिवक्ता सौरभ चौबे के माध्यम से न्यायालय में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 175(3) के तहत आवेदन लगाया। इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऐश्वर्या दीवान ने आवेदन के साथ पेश किए गए बैंक लेन-देन, इकरारनामा और अन्य दस्तावेजों का परीक्षण किया। अदालत ने माना कि उपलब्ध रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध का मामला बनता है और इसकी जांच जरूरी है।

GLIBS WhatsApp Group
Show More
Back to top button