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शिक्षा सागर फाउंडेशन ने शिक्षक मनीष काे हरित योद्धा सम्मान से किया सम्मानित

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जगदलपुर । बस्तर अंचल से निकलकर शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले शिक्षक मनीष कुमार अहीर को राष्ट्रीय स्तर पर ‘हरित योद्धा सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान शिक्षा, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण के लिए देशभर के शिक्षकों को एक मंच पर जोड़ने वाले शिक्षा सागर फाउंडेशन एवं पारिवारिक वानिकी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित समारोह में प्रदान किया गया।
विनोबा भावे नगर, कोटा में आयोजित इस राष्ट्रीय आयोजन ने “नवाचारी शिक्षकों के महाकुंभ” का स्वरूप ले लिया, जहाँ देश के 15 राज्यों से आए 240 श्रेष्ठ नवाचारी शिक्षकों को उनके शैक्षिक नवाचार, सामाजिक सरोकार और पर्यावरणीय प्रयासों के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला शिक्षा अधिकारी कोटा रामचरण मीणा, नगर निगम कोटा के नेता प्रतिपक्ष विवेक राजवंशी, शिक्षा सहकारी समिति के अध्यक्ष व भाजपा उपाध्यक्ष नंदकिशोर मालव, शिक्षा सागर फाउंडेशन के संस्थापक शैलेश प्रजापति, भुवनेश मालव,पारिवारिक वानिकी प्रदेश युवा समन्वयक विकास गोदारा, धाकड़ महासभा प्रदेश कोषाध्यक्ष किशन मालव तथा गायत्री मिश्रा मंचासीन रहे। प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा के अध्यक्ष अभिषेक शुक्ला के मार्गदर्शन में टीम लगातार विज्ञान और पर्यावरण संरक्षण पर कार्य कर रही है इस आयोजन में भुनेश्वर मरकाम, हेमंत उईके क्षमा ऊईके, नीलिमा गौतम, कुमार मंडावी, बृजलाल मंडावी साथ रहे आयोजकों ने इस अवसर पर कहा कि ऐसे आयोजन शिक्षक समुदाय के लिए प्रेरणा, संवाद और नवाचार का सशक्त मंच हैं, जो शिक्षा को समाज, संस्कृति और प्रकृति से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध हो रहे हैं।
समारोह का विशेष आकर्षण छत्तीसगढ़ की प्रकृति शिक्षण विज्ञान यात्रा की टीम रही, जिनके सदस्यों ने बस्तर की पारंपरिक वेशभूषा ने देश भर से आए शिक्षकों का ध्यान आकर्षित किया। विविध सांस्कृतिक रंगों से सजा यह मंच “एक भारत–श्रेष्ठ भारत” की भावना को सजीव करता नजर आया। तालियों की गूंज के बीच इन प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को जीवंत और यादगार बना दिया।
मनीष कुमार अहीर व्याख्याता शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बड़ेमुरमा जगदलपुर बस्तर ने अपने नवोन्मेषी शिक्षण प्रयोगों, पर्यावरण संरक्षण की पहलों, सामुदायिक सहभागिता तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास से जुड़े अनुभव साझा किए । उन्होंने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को सहेजने, प्रकृति-आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने और बदलते बस्तर पर अपने विचार भी प्रस्तुत किए।

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