नक्सलवाद के गढ़ अबूझमाड़ व जगरगुंडा में स्थापित होगा एजुकेशन सिटी

रायपुर। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने अपना तीसरा बजट पेश करते हुए सदन को बताया कि दंतेवाड़ा में पहली बार एजुकेशन सिटी की परिकल्पना की गई थी, जहां से आज बच्चे मेडिकल एवं इंजीनियरिंग जैसी प्रवेश परीक्षाएँ पास करके प्रतिष्ठित संस्थानों में दाखिला प्राप्त कर रहे हैं। इसी अनुभव से प्रेरित होकर हम नक्सलवाद के गढ़ कहे जाने वाले अबूझमाड़ एवं जगरगुंडा में एजुकेशन सिटी की स्थापना करने जा रहे हैं, जिससे भावी पीढी के लिए आकांक्षी से अग्रणी होने का मार्ग प्रशस्त होगा। जो जगह नक्सलियों का गढ़ हुआ करता था, वह अब शिक्षा के केन्द्र का पर्याय बनेगा; बस्तर के युवाओं के सिर पर गौर सींग भी दिखेगा और गले में स्टेथोस्कोप भी। हमने दोनों एजुकेशन सिटी के लिए 100 करोड का प्रावधान किया है।
उन्होंने बताया कि एजुकेशन सिटी में प्राथमिक शाला से लेकर उच्चतर माध्यमिक शाला, आईटीआई. प्रीमैट्रिक एवं पोस्टमैट्रिक बालक-बालिका छात्रावास, शिक्षक आवास इत्यादि स्थापित किया जायेगा। एक ईको-सिस्टम डेवलप किया जाएगा। यह महज कुछ संस्थानों का समुच्ययमात्र नहीं होगा, बल्कि प्रेरणा का एक बड़ा केन्द्र बनेगा, मुख्य धारा से जुड़कर कैसे अपनी जिंदगी बदली जा सकती है. इसका एक बड़ा उदाहरण यह प्रस्तुत करेगा। अबूझमाड़ और जगरगुंडा से आदिवासी भाई-बहनों की लगाई गई छलांग आने वाले दशकों में रायपुर या दिल्ली तक नहीं रूकेगी, बल्कि बस्तर का युवा अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक अपनी दहाड़ मारेगा। आज कुछ लोगों को यह महज एक सपना लग सकता है. मगर लोकतंत्र के, प्रदेश के इस सबसे बड़े मंदिर में खड़ा होकर पूरे विश्वास के साथ मैं इसे कहने का साहस कर पा रहा हूं।







