लौह अयस्क परिवहन से एक लाख करोड़ का मालभाड़ा मिलने के बावजूद दल्ली राजहरा-जगदलपुर अधर में लटकी

जगदलपुर। केंद्रीय बजट से पहले बस्तर के विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता में लाने की पहल करते हुए बस्तर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष श्याम सोमानी ने प्रधानमंत्री को पत्र भेजकर रेल, हवाई सेवा, सड़क कनेक्टिविटी एवं टेक्स पर राहत से जुड़ी बहुप्रतीक्षित मांगों की ओर ध्यान आकृष्ट किया है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि बस्तर रेलवे को हर वर्ष केवल लौह अयस्क परिवहन से लगभग एक लाख करोड़ रुपये का मालभाड़ा राजस्व देता है, इसके बावजूद आजादी के 75 वर्षों बाद भी यात्री रेल सुविधाओं के मामले में बस्तर उपेक्षित बना हुआ है। पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि रेल मंत्रालय का अधिकतर फोकस पड़ोसी राज्य ओडि़सा पर केंद्रित रहा है, जहां बीते दस वर्षों में कई नई रेल परियोजनाएं, रेल लाइनें और यात्री गाडिय़ों की सौगात दी गई, जबकि बस्तर में दल्ली राजहरा-जगदलपुर जैसी बहुप्रतीक्षित रेल लाइन आज भी अधर में लटकी हुई है। प्रस्तावित नई रेल लाइनों-धमतरी से अमरावती (कोंडागांव), बचेली से बीजापुर होकर सूरजपुर (महाराष्ट्र), किरन्दुल से भद्राचलम, किरन्दुल से मनुगुरु तथा दंतेवाड़ा-सुकमा मलकानगिरी-पर भी ठोस पहल न होने पर चिंता जताई गई है।
चेंबर ने अपने पत्र में कहा है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बस्तर को नक्सलवाद से मुक्त करने की समयसीमा तय किए जाने के बाद अब विकास के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। सुरक्षा के साथ-साथ विकास को गति देने के लिए टैक्स फ्री जोन जैसी विशेष नीति बस्तर को औद्योगिक हब बना सकती है। हवाई सेवा को लेकर भी चिंता जताई गई है। जगदलपुर-रायपुर फ्लाइट सेवा बंद होने से क्षेत्र को भारी नुकसान हो रहा है। चेंबर ने दिल्ली, मुंबई और कोलकाता के लिए नियमित उड़ानें शुरू करने की मांग की है, ताकि व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिल सके।सड़क कनेक्टिविटी के तहत रायपुर-विशाखापट्टनम भारतमाला परियोजना से जगदलपुर को जोडऩे के लिए लगभग 32 किमी लंबी कनेक्टिविटी रोड बनाने और रायपुर से जगदलपुर धमतरी मार्ग को 6-लेन करने का सुझाव दिया गया है।
पत्र में यह भी रेखांकित किया गया है किं नक्सलवाद के प्रभाव में लंबे समय तक पिछड़े रहे बस्तर को अब केंद्र सरकार द्वारा नक्सलमुक्त क्षेत्र बनाने की दिशा में निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसे में आने वाला समय निवेश और औद्योगिक विकास के लिए निर्णायर्क हो सकता है, बशर्ते बस्तर के आधारभूत ढांचे और टेक्स प्रोत्साहन का वास्तविक लाभ मिले। पत्र के माध्यम से प्रधानमंत्री से अपील की गई है कि बस्तर को कर-मुक्त प्रोत्साहन, मजबूत परिवहन नेटवर्क और समान टेक्स ऑडिट व्यवस्था देकर मुख्यधारा के विकास से जोड़ा जाए, ताकि आदिवासी बहुल इस अंचल में रोजगार, उद्योग और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल सके। चेंबर ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि वर्तमान में आयकर और जीएसटी ऑडिट की सीमाएं अलग-अलग हैं, जिससे व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। इसे समान रखते हुए 5 करोड़ रुपए तक करने की मांग की गई है। चेंबर ने उम्मीद जताई है कि केंद्र सरकार की पहल से बस्तर को वर्ष 2030 तक देश का सबसे विकसित संभाग बस्तर को बनाया जा सकता है। टैक्स फ्री जोन, मजबूत कनेक्टिविटी और सरल कर व्यवस्था से बस्तर में उद्योगों का विस्तार होगा और युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिलेगा।







