सोने और चांदी पर कस्टम ड्यूटी खत्म किया जाना चाहिए- हरख मालू

रायपुर। केन्द्रीय बजट 2026-2027 के लिए उद्योग व व्यापार क्षेत्र से सुझाव भेजे जा रहे हैं। सराफा व्यवसाय को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण को प्रेषित सुझाव में रायपुर सराफा एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष हरख मालू ने कहा है कि सोने और चांदी पर कस्टम ड्यूटी जो वर्तमान में 6प्रतिशत है, उसे समाप्त किया जाए। जीएसटी दो प्रतिशत रखनेें एवं कार्ड स्वाइप चार्ज कम करने से आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी।
श्री मालू ने कहा कि सराफा व्यवसाय को बजट से बड़ी उम्मीद है कि बाजार को प्रोत्साहित करने वाली कुछ नीतिगत विषयों पर वित्त मंत्री जी गौर करेंगे। इसलिए कि देश के हर नागरिक, घर, परिवार व समाज में सोने व चांदी का एक विशिष्ट स्थान है चाहे उसे जेवर के रुप में संस्कृति का हिस्सा माने या समय बेसमय का निवेश संसाधन। वहीं कस्ट्म ड्यूटी भी सबसे ज्यादा असरकारक है यदि आज जो 6 प्रतिशत तय है खत्म कर दिया जाता है,तो बाजार के लिए एक बड़ी सौगात होगी।
श्री मालू ने सुझाव देते हुए कहा है कि सोने और चांदी के भाव में इन दिनों अत्यधिक उतार-चढ़ाव चल रहा है। इससे आम उपभोक्ता असमंजस की स्थिति से गुजर रहा है। हर शहर में भाव अलग-अलग है। जिस प्रकार लंदन एवं न्यूयॉर्क में मेटल एक्सचेंज है उसी प्रकार भारत में भी मेटल एक्सचेंज की स्थापना की जाए, जिससे आम उपभोक्ताओं को सोने और चांदी के सही भाव की जानकारी मिल सके और पूरे देश भर में भाव में एकरूपता आ सके। केंद्र सरकार ने पूरे देश में हाल मार्किंग जेवर का विक्रय अनिवार्य किया है किंतु हॉल मार्किंग सेंटरों की उपलब्धता कम है यदि हाल मार्किंग केंद्र खोलने में सब्सिडी दी जाती है तो पूरे देश में हाल मार्किंग सेंटर प्रत्येक जिले में स्थापित होने की संभावना है।
वर्तमान में देश में सोने एवं चांदी के निर्माण करने वाले कारीगरों की स्थिति सही नहीं है इन्हें स्किल डेवलपमेंट के अंतर्गत कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाना जरूरी है। साथ ही देश के सभी प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में जेम्स एवं ज्वेलरी कोर्स प्रारंभ किया जाए।
क्रेडिट कार्ड पर कार्ड स्वाइप चार्ज 2.5 से 3 प्रतिशत तक है उसे कम किया जाए, साथ ही डेबिट कार्ड पर भी कार्ड स्वाइप चार्ज जोकि विभिन्न बैंकों के लिए अलग-अलग जैसे कि 75 पैसे से 1 रुपए 75 पैसे है। इसमें एकरूपता लायी जाए। सोने व चांदी के भाव में अत्यधिक वृद्धि होने के कारण इसमें जीएसटी दो प्रतिशत किया जाना सराफा बाजार में आवश्यक माना जा रहा है।







