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गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं को समग्र आयुष सेवाएं

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रायपुर। राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रम सुप्रजा के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं, प्रसवोत्तर माताओं (एवं नवजात शिशुओं की समग्र देखभाल सुनिश्चित की जा रही है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आयुष पद्धतियों के माध्यम से सुरक्षित मातृत्व, स्वस्थ शिशु तथा शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है।
कार्यक्रम के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं की नियमित एएनसी जांच की जाती है, जिसमें यूरिन प्रेगनेंसी टेस्ट, रक्तचाप, ब्लड शुगर, पेशाब की जांच, हीमोग्लोबिन प्रतिशत, ऊंचाई एवं वजन तथा गर्भस्थ शिशु की स्थिति की जांच शामिल है। ये सेवाएं प्रतिमाह शिविरों एवं ओपीडी के माध्यम से प्रदान की जाती हैं। आवश्यकता अनुसार सोनोग्राफी कराने की सलाह भी दी जाती है। इसके साथ ही गर्भवती महिला, टारगेट कपल एवं परिवार के सदस्यों की काउंसलिंग भी की जाती है। योग चिकित्सकों एवं योग प्रशिक्षकों द्वारा गर्भावस्था के अनुसार सुरक्षित योग, प्राणायाम एवं मानसिक विश्रांति के अभ्यास कराए जाते हैं। साथ ही माहवार आहार-विहार की जानकारी दी जाती है, जिसमें गर्भावस्था के दौरान किन खाद्य पदार्थों का सेवन करना चाहिए तथा किन चीजों से परहेज करना चाहिए, इस पर विशेष मार्गदर्शन दिया जाता है।
आयुष विभाग द्वारा गर्भ संस्कार के अंतर्गत सकारात्मक विचार, अच्छी पुस्तकें पढऩा, पेंटिंग, संगीत एवं ध्यान जैसी रचनात्मक गतिविधियां कराई जाती हैं, जिससे गर्भस्थ शिशु के सर्वांगीण विकास में सहायता मिल सके। प्रसव के बाद माताओं के वजन, रक्तचाप, ब्लड शुगर एवं हीमोग्लोबिन की जांच की जाती है। नवजात शिशुओं के वजन, पीलिया एवं छाती की जांच की जाती है। सुप्रजा कार्यक्रम का संचालन वर्तमान में रायपुर की तीन आयुष संस्थाओं में किया जा रहा है। अक्टूबर 2023 से वर्तमान तक इस कार्यक्रम के माध्यम से लगभग 500 गर्भवती महिलाएं एवं 250 प्रसवोत्तर महिलाएं लाभान्वित हो चुकी हैं।
आयुष विभाग का यह प्रयास मातृ-शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों को आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ते हुए एक समग्र एवं प्रभावी मॉडल प्रस्तुत कर रहा है। सुप्रजा कार्यक्रम के सफल संचालन में डॉ. पूर्णिमा राजपूत, डॉ. नमीरा आलम, डॉ. प्रतिमा धृतलहरे सहित अन्य नर्सिंग स्टाफ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

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