Chhattisgarh
छत्तीसगढ़ की साहित्यिक परंपरा लोक, स्मृति और चेतना की सतत यात्रा

छत्तीसगढ़ की साहित्यिक परंपरा लोक स्मृति से जन्म लेकर शास्त्र और इतिहास के माध्यम से विकसित हुई है और फिर लोक जीवन में रच-बस गई है। प्राचीन दक्षिण कोसल से लेकर दंडकारण्य, सिरपुर के बौद्ध केंद्रों, लोकगाथाओं, भक्ति आंदोलन और आधुनिक हिंदी-छत्तीसगढ़ी साहित्य तक यह परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रही है। यहां साहित्य केवल लिखा नहीं गया, जिया गया—जहां स्त्री की आवाज़, श्रम का गीत, सामूहिक जीवनबोध और मानवीय संवेदना केंद्र में रहे। बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक स्वरूप में छत्तीसगढ़ का साहित्य इतिहास रचने से अधिक स्मृति को सहेजने का कार्य करता है, और इसी कारण वह आज भी जीवंत, विश्वसनीय और गहराई से मानवीय बना हुआ है।







