छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सिरगिट्टी मारपीट-लूट एफआईआर को पूरी तरह निरस्त किया

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने थाना सिरगिट्टी में दर्ज मारपीट और लूट से संबंधित एफआईआर को निरस्त कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि एफआईआर में लगाए गए आरोपों में प्रथम दृष्टया अपराध के आवश्यक तत्व नहीं बनते और कार्रवाई जारी रखना न्याय प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। मामला 6 सितंबर 2024 की रात की घटना से जुड़ा था, जिसमें शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि याचिकाकर्ताओं—सुमन यादव, इंदु चंद्रा, नंद राठौर, मोहम्मद इस्लाम और राहुल जायसवाल—ने बैंक के पास मारपीट कर सोने की चेन छीन ली। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि एफआईआर दर्ज करने में 13 घंटे की देरी हुई, उन्होंने पहले 112 नंबर और अभिव्यक्ति ऐप के माध्यम से सूचना दी थी, तथा उनके पक्ष में सीसीटीवी फुटेज भी मौजूद था। उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि देरी, पूर्व शिकायत और रिकॉर्ड की उपलब्ध सामग्री अभियोजन की कहानी पर गंभीर संदेह उत्पन्न करती है। इस आधार पर अदालत ने सभी पांचों याचिकाकर्ताओं के खिलाफ अपराध क्रमांक 624/2024 को पूरी तरह निरस्त कर दिया।







