वन्यजीव संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ वन विभाग की बड़ी पहल- जून के पहले सप्ताह में शुरू होगा विशेष प्रशिक्षण

रायपुर। छत्तीसगढ़ में वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों और उनके शावकों की सुरक्षा तथा संरक्षण को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए वन विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) श्री अरुण कुमार पांडेय के नेतृत्व में जून 2026 के प्रथम सप्ताह में एक उच्च स्तरीय राज्य स्तर पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस विशेष प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों की असमय मृत्यु के कारणों की वैज्ञानिक जांच करना, उनका बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन सुनिश्चित करना तथा भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की रोकथाम के लिए ठोस रणनीति तैयार करना है। इस कार्यक्रम का विषय लर्निंग फ्रॉम डेड एसेंशियलस ऑफ मोर्टेलिटी इनवेस्टिगेशन ऑफ एशियन एलिफेंट फॉर ऑफिसियल ऑफ छत्तीसगढ़ फॉरेस्ट डिपार्टमेंट रखा गया है।
देश के प्रतिष्ठित राष्ट्रीय विशेषज्ञ देंगे व्यावहारिक प्रशिक्षण
इस उन्नत प्रशिक्षण कार्यक्रम में देश के ख्यातिलब्ध और प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञ मुख्य रूप से शामिल होकर मैदानी अमले का मार्गदर्शन करेंगे। इनमें शामिल होंगे डॉ. पराग निगम, डॉ. कारिकलन, डॉ. तपेन्द्र सैनी, डॉ. जैन करण भरत जैसे राष्ट्रीय विशेषज्ञ उपस्थित वन अधिकारियों और वन्यप्राणी पशु चिकित्सकों को हाथियों एवं अन्य वन्यजीवों में होने वाली जटिल बीमारियों की समय पर पहचान, उनके सटीक उपचार, वैज्ञानिक पोस्टमार्टम प्रक्रिया तथा आधुनिक फॉरेंसिक जांच की बारीकियों का व्यावहारिक व तकनीकी प्रशिक्षण देंगे।
पिछली घटनाओं केस स्टडी से बनेगी नई रणनीति
वन विभाग ने इस प्रशिक्षण को पूरी तरह व्यावहारिक बनाने के लिए पिछली घटनाओं से सीखने पर जोर दिया है। प्रशिक्षण के दौरान पिछले दो वर्षों में रायगढ़ और धरमजयगढ़ वनक्षेत्रों में हुई हाथी शावकों की मृत्यु से जुड़े मामलों की गहन समीक्षा की जाएगी। संबंधित वनमंडलाधिकारी इन मामलों से जुड़ी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, विसरा जांच रिपोर्ट और विशेषज्ञ संस्थानों के निष्कर्षों को पटल पर रखेंगे। राष्ट्रीय विशेषज्ञ इन सभी रिपोर्टों का तकनीकी विश्लेषण कर भविष्य के लिए अचूक सुरक्षात्मक सुझाव देंगे।
बड़ी संख्या में शामिल होंगे मैदानी अधिकारी और पशु चिकित्सक
इस विशेष प्रशिक्षण सत्र में राज्य के सभी चिडिय़ाघरों और संरक्षित क्षेत्रों में पदस्थ वन्यप्राणी पशु चिकित्सक, हाथी प्रभावित क्षेत्रों के सभी वनमंडलाधिकारी, उप-वनमंडलाधिकारी, वनक्षेत्रपाल तथा पशुपालन विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक अनिवार्य रूप से भाग लेंगे। उल्लेखनीय है कि वन विभाग द्वारा इससे पूर्व विगत 7 अप्रैल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 150 से अधिक अधिकारियों और चिकित्सकों को प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब जून में आयोजित होने वाले इस उन्नत प्रशिक्षण के जरिए मैदानी अमले को तकनीकी रूप से पूर्णत: दक्ष बनाया जाएगा। वन विभाग का अंतिम लक्ष्य वन्यजीवों के बीमार होने या उनकी मृत्यु की स्थिति में त्वरित, पारदर्शी और वैज्ञानिक कार्रवाई सुनिश्चित करना है, ताकि छत्तीसगढ़ के जंगलों में हाथियों और अन्य वन्यप्राणियों का संरक्षण पूरी मजबूती के साथ किया जा सके।







