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बिलासपुर हाईकोर्ट के जस्टिस ने नवीन न्यायालय भवन के निर्माण स्थल को बदलने के दिये निर्देश

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कोंडागांव। बिलासपुर हाईकोर्ट के जस्टिस सचिन सिंह राजपूत ने कोंडागांव में नवीन न्यायालय भवन के निर्माण स्थल को बदलने का निर्देश दिया है। 29 नवंबर को न्यायालय निरीक्षण के दौरान उन्होंने यह फैसला सुनाया । यह निर्णय कलेक्ट्रेट परिसर में प्रस्तावित भवन स्थल को लेकर चल रहे विवाद और छात्रों के प्रदर्शनों के बाद आया है। उन्होंने कहा कि बच्चों के हित, स्थानीय जनभावनाओं और भविष्य की न्यायिक सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट जस्टिस ने मंडी प्रांगण की भूमि को अधिक उपयुक्त माना है। अधिवक्ता संघ ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे न केवल स्कूल के बच्चों का खेल मैदान सुरक्षित रहेगा, बल्कि कोंडागांव को एक सुव्यवस्थित और पूर्ण सुविधाओं वाला न्यायालय परिसर भी मिलेगा।
जस्टिस राजपूत ने जिला अधिवक्ता संघ के पदाधिकारियों से विस्तृत चर्चा की। इस दौरान उन्होंने कलेक्ट्रेट परिसर में बनाए जा रहे नवीन न्यायालय भवन के विवादित मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्कूल ग्राउंड को बचाने की मांग को लेकर छात्रों की ओर से किए जा रहे लगातार प्रदर्शनों का संज्ञान लिया और अधिवक्ता संघ से इस संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी। बार एसोसिएशन के आग्रह पर जस्टिस राजपूत ने मंडी प्रांगण पहुंचकर वहां स्थित खाली सरकारी भूमि का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद उन्होंने स्पष्ट किया कि कलेक्ट्रेट परिसर में न्यायालय भवन के लिए आवंटित भूमि 5 एकड़ से भी कम है। इस स्थान पर पार्किंग, रिकॉर्ड रूम, विधिक सेवा केंद्र, बार रूम, प्रतीक्षा कक्ष और अन्य न्यायिक व्यवस्थाओं जैसी भविष्य की सभी सुविधाओं का सुचारु निर्माण संभव नहीं है। इसलिए, यह स्थल न्यायालय भवन के लिए उपयुक्त नहीं है। निरीक्षण के बाद जस्टिस राजपूत ने प्रधान जिला-सत्र न्यायाधीश किरण चतुर्वेदी को निर्देश दिया कि मंडी प्रांगण के पीछे स्थित खाली सरकारी भूमि को नवीन न्यायालय भवन के लिए आवंटित कराने की प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जाए।

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