आत्मसमर्पितों का मतदाता सूची में नाम जोडऩे हेतु विशेष मतदाता पंजीयन अभियान का किया आयोजन

नारायणपुर। जिले के आत्मसमर्पित नक्सल प्रभावित हितग्राहियों के सर्वांगीण पुनर्वास एवं सामाजिक मुख्यधारा में पुन: एकीकरण की दिशा में निरंतर प्रभावी पहल की जा रही है। इसी क्रम में कलेक्टर नम्रता जैन, के निर्देशानुसार एवं मार्गदर्शन में जिला परियोजना लाइवलीहूड कॉलेज नारायणपुर अंतर्गत संचालित पुनर्वास केन्द्र में निवासरत आत्मसमर्पित हितग्राहियों के मतदाता सूची में नाम जोडऩे हेतु विशेष मतदाता पंजीयन अभियान का आयोजन किया गया। अभियान के अंतर्गत पुनर्वास केन्द्र में उपस्थित आत्मसमर्पित हितग्राहियों के मतदाता सूचि में नाम दर्ज कराने हेतु आवश्यक आवेदन फॉर्म पटवारी के माध्यम से पूर्ण कराए गए, जिससे वे अपने संवैधानिक मताधिकार का प्रयोग कर सकें। यह पहल आत्मसमर्पित हितग्राहियों को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोडऩे, नागरिक पहचान सुनिश्चित करने तथा समाज में उनकी गरिमामय भागीदारी को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर डॉ. सुमित गर्ग, डिप्टी कलेक्टर एवं एसडीएम ओरछा, सह नोडल अधिकारी पुनर्वास केन्द्र, द्वारा हितग्राहियों को वोटर आईडी कार्ड की आवश्यकता एवं उपयोगिता के संबंध में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। उन्होंने बताया कि वोटर आईडी कार्ड न केवल मतदान के अधिकार का आधार है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण शासकीय पहचान पत्र के रूप में विभिन्न शासकीय योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं, शैक्षणिक, सामाजिक एवं आर्थिक लाभों को प्राप्त करने में भी अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वोटर आईडी कार्ड निर्माण हेतु किन-किन दस्तावेजों की आवश्यकता होती है, आवेदन प्रक्रिया किस प्रकार पूर्ण की जाती है तथा नाम दर्ज होने के उपरांत कार्ड प्राप्त होने तक की संपूर्ण प्रक्रिया क्या है। साथ ही हितग्राहियों को यह भी अवगत कराया गया कि किसी प्रकार की त्रुटि या संशोधन की आवश्यकता होने पर उसे समय रहते किस प्रकार सुधारा जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान पुनर्वास केन्द्र की टीम द्वारा समुचित सहयोग प्रदान किया गया तथा यह सुनिश्चित किया गया कि सभी पात्र हितग्राहियों के आवेदन सही एवं पूर्ण रूप से भरे जाएं। इस पहल से आत्मसमर्पित हितग्राहियों में नागरिक अधिकारों के प्रति जागरूकता, लोकतांत्रिक मूल्यों की समझ तथा आत्मनिर्भर और सम्मानजनक जीवन की ओर बढऩे का आत्मविश्वास विकसित हो रहा है। जिला प्रशासन की यह पहल स्पष्ट रूप से यह दर्शाती है कि शासन की पुनर्वास नीति केवल आर्थिक एवं प्रशिक्षण तक सीमित न होकर, आत्मसमर्पित हितग्राहियों को पूर्ण नागरिक अधिकारों सहित समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से स्थापित करने की दिशा में प्रतिबद्ध है।







