विधानसभा में जी राम जी योजना को लेकर सत्ता और विपक्ष के बीच हुआ तीखा टकराव

रायपुर। जी राम जी योजना को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विधानसभा में मंगलवार को तीखा टकराव देखने को मिला। कांग्रेस ने शून्यकाल के दौरान स्थगन प्रस्ताव लाकर इस मुद्दे पर चर्चा की मांग की। लगातार हंगामे के बीच सदन की कार्यवाही को 5 मिनट के लिए स्थगित कर दिया गया। कार्रवाई शुरू हुई, तो नोंकझोंक जारी रहा। स्पीकर ने स्थगन स्वीकार कर दिया, और इसके विरोध में नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास महंत समेत विपक्षी सदस्यों ने कार्रवाई का बहिष्कार कर दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि पहले लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) बेहतर था और इस विषय पर सदन में विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि नई योजना से राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा। यह कहा गया कि केंद्र सरकार द्वारा लागू विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (जी राम जी) के तहत रोजगार की गारंटी 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दी गई है, लेकिन व्यय का अनुपात बदलकर केंद्र का हिस्सा 60 प्रतिशत और राज्य का हिस्सा 40 प्रतिशत कर दिया गया है। पहले मनरेगा में यह अनुपात 90:10 था। राज्य के अनुसार, इस बदलाव से छत्तीसगढ़ पर हर साल वित्तीय भार में भारी वृद्धि होने की आशंका है।
इस पर भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने कड़ा विरोध जताते हुए कहा कि सदन किसी पार्टी की राजनीति का मंच नहीं, बल्कि जनता का मंच है। उन्होंने कहा कि सदन का समय कीमती है और विपक्ष इस मुद्दे पर राजनीति कर रहा है। मामले को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक हुई, जो नारेबाजी और हंगामे में बदल गई। नेता प्रतिपक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि जनता के मुद्दों पर राजनीति करनी पड़े तो विपक्ष पीछे नहीं हटेगा।







