कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल परियोजना में बेमेतरा को भी जोडऩे उठी मांग, शिवनाथ नदी पर बड़ा पुल बनाने रेलवे को करना पड़ेगा बस खर्च

बेमेतरा। छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क के विस्तार के तहत कटघोरा से डोंगरगढ़ तक लगभग 295 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजना पर रेल मंत्रालय और राज्य सरकार के संयुक्त उपक्रम से हरी झंडी मिल गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के बीच अब बेमेतरा जिले को रेल नेटवर्क से जोडऩे की मांग ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है। जिले के नागरिकों का कहना है कि इस परियोजना के तहत कवर्धा से बेमेतरा होते हुए तिल्दा (सड़क मार्ग से लगभग 95 किमी) तक रेल लाइन का विस्तार कर दिया जाए तो न केवल बेमेतरा जैसा महत्वपूर्ण जिला पहली बार रेल सेवा से जुड़ जाएगा, बल्कि मुंबई-हावड़ा मुख्य रेल लाइन को तिल्दा से राजनांदगांव के बीच बेमेतरा-कवर्धा होते हुए एक मजबूत वैकल्पिक बायपास मार्ग भी मिल जाएगा।
कवर्धा से बेमेतरा होते हुए तिल्दा तक रेल लाइन बिछाने में भौगोलिक दृष्टि से कोई बड़ी रुकावट नहीं है। इस पूरे रूट पर न तो कोई बड़े पहाड़ हैं और न ही दुर्गम इलाके। इस लाइन के निर्माण में केवल सिमगा के पास शिवनाथ नदी पर एक बड़े पुल के निर्माण का खर्च आएगा। बाकी संपूर्ण मार्ग मैदानी होने के कारण पटरियां बिछाने में बेहद कम लागत आएगी। यह रेल लाइन बेमेतरा और कवर्धा के साथ-साथ खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले की सीमाओं को छूते हुए गुजरेगी, जिससे एक बड़े क्षेत्र की विशाल आबादी को इसका सीधा फायदा मिलेगा।
जबलपुर से मंडला तक रेल लाइन की सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। यदि भविष्य में इस नई लाइन को कवर्धा-बेमेतरा के रास्ते जोड़ दिया जाता है, तो इसके व्यापक सामरिक और आर्थिक लाभ होंगे। रायपुर से जबलपुर का रेल मार्ग वर्तमान दूरी की तुलना में लगभग एक-चौथाई (25 प्रतिशत) छोटा हो जाएगा, जिससे यात्रियों के यात्रा समय में कम से कम 3 घंटे की बचत होगी। मुंबई-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग पर हादसों, मेंटेनेंस या भारी ट्रैफिक के समय ट्रेनों को डायवर्ट करने के लिए तिल्दा-बेमेतरा-कवर्धा-राजनांदगांव मार्ग एक आदर्श बायपास साबित होगा। राजधानी रायपुर के आसपास के सभी जिले रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे, जिससे कृषि, व्यापार और क्षेत्रीय पर्यटन को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।
उल्लेखनीय है कि बेमेतरा और कवर्धा को रेल लाइन से जोडऩे की मांग नई नहीं है। रेल लाइन की कम से कम 5 दशक से मांग की जा रही है। इसके बाद लगभग एक दशक पहले बेमेतरा-कवर्धा होते हुए राजनांदगांव से जबलपुर के बीच 430 किलोमीटर लंबी रेल लाइन का प्रस्ताव तैयार किया गया था। इस प्रस्तावित लाइन के लिए रेलवे ने टोपो इंजीनियरिंग सह यातायात सर्वेक्षण कराया था, जिस पर करीब 5 करोड़ की भारी राशि खर्च की गई थी। उस समय 4,930 करोड़ की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को रेलवे ने यह कहते हुए स्थगित कर दिया था कि इससे मिलने वाला रेवेन्यू रिटर्न बेहद कम है। उस समय बेमेतरा और कवर्धा जिलों में बड़े उद्योगों की अनुपस्थिति को इसका मुख्य कारण बताया गया था।
भारतीय जनता पार्टी बेमेतरा के जिला अध्यक्ष अजय साहू का कहना है कि रेल परियोजना से बेमेतरा जिला को भी जोडऩे के लिए मांग किया जाएगा। डोंगरगढ़ से कटघोरा तक बन रहे इस प्लान में बेमेतरा को भी शामिल करने के लिए मजबूत पक्ष रखा जाएगा।
वहीं पूर्व विधायक व बेमेमरा जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष आशीष छाबड़ा ने कहा कि बेमेतरा को उसके हक से दूर रखा जा रहा है। डबल इंजन सरकार की इच्छा बेमेतरा का विकास नहीं है। बेमेतरा नगर पालिका से लेकर केंद्र तक बीजेपी की सरकार है पर इसके बाद भी बेमेतरा के लिए रेल लाइन स्वीकृत करने पर नहीं सोचा गया है। जिले की बहुत पुरानी मांग है बेमेतरा वालों को उनका हक मिलना चाहिए।







