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संघर्ष से समृद्धि तक : प्रभा प्रजापति ने आत्मनिर्भरता की लिखी नई कहानी

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रायपुर। कहते हैं कि जब मेहनत को सही दिशा और सहयोग मिल जाए, तो साधारण परिस्थितियों में रहने वाला व्यक्ति भी असाधारण सफलता हासिल कर सकता है। सूरजपुर जिले के देवनगर की रहने वाली श्रीमती प्रभा प्रजापति ने इस बात को सच साबित कर दिखाया है। कभी आर्थिक तंगी और संघर्षों से जूझने वाली श्रीमती प्रभा आज अपने गांव में आत्मनिर्भर महिला उद्यमी के रूप में पहचान बना चुकी हैं।
एक समय ऐसा था जब श्रीमती प्रभा का परिवार मजदूरी और छोटी खेती पर निर्भर था। परिवार में चार बच्चों की जिम्मेदारी, सीमित आय और रोजमर्रा की जरूरतों के बीच जीवन कठिनाई से गुजर रहा था। बीमारी या किसी आकस्मिक जरूरत के समय कर्ज लेना उनकी मजबूरी बन जाती थी। लेकिन श्रीमती प्रभा ने हालात के आगे हार मानने के बजाय बदलाव का रास्ता चुना। गांव में आजीविका मिशन की आईसीआरपी टीम के माध्यम से उन्हें स्व-सहायता समूह की जानकारी मिली। उन्होंने महिलाओं के साथ मिलकर जय माँ लक्ष्मी स्व-सहायता समूह का गठन किया। नियमित बचत, बैठकों और समूह की गतिविधियों ने उनके भीतर आत्मविश्वास जगाया और आगे बढऩे की नई प्रेरणा दी।
समूह को आरएफ मद से 15 हजार रुपये और सीआईएफ मद से 60 हजार रुपये की सहायता मिली। इसके साथ ही बैंक लिंकेज और मुद्रा ऋण के माध्यम से कुल 2 लाख रुपये की राशि प्राप्त हुई। इस आर्थिक सहयोग ने प्रभा के सपनों को नई उड़ान दी। उन्होंने एक ठेला तैयार कराया और केले, चना-मुर्रा सहित अन्य सामग्री बेचने का छोटा व्यवसाय शुरू किया।
धीरे-धीरे उनका व्यवसाय बढऩे लगा। ग्राहकों का भरोसा और मेहनत का परिणाम उन्हें मिलने लगा। समय पर ऋण चुकाने के बाद उन्होंने पुन: 1.50 लाख रुपये का बैंक ऋण लेकर फल और किराना दुकान का विस्तार किया। इतना ही नहीं, उन्होंने जूस मशीन खरीदकर अपने व्यवसाय को नया स्वरूप दिया। आज श्रीमती प्रभा को ठेला व्यवसाय से प्रतिमाह लगभग 4 से 5 हजार रुपये और फल दुकान से 15 से 18 हजार रुपये तक की आय प्राप्त हो रही है। उनकी वार्षिक आय करीब ढाई लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। इस आय से वे अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा दिला रही हैं, परिवार की जरूरतें पूरी कर रही हैं और पति के लिए मोटरसाइकिल भी खरीद चुकी हैं। अपने लिए जेवर खरीदना उनके आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गया है।
श्रीमती प्रभा प्रजापति की यह कहानी केवल एक महिला की आर्थिक सफलता नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, संकल्प और सामूहिक शक्ति की प्रेरक मिसाल है।स्व-सहायता समूह ने उन्हें सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं दिया, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने का साहस भी दिया। आज उनकी सफलता क्षेत्र की अनेक महिलाओं के लिए प्रेरणा बन रही है और यह संदेश दे रही है कि अवसर और मेहनत मिलकर किसी भी जीवन को बदल सकते हैं।

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