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बस्तर से नक्सलवाद के खात्में में अत्याधुनिक तकनीक ने निभाई बड़ी भूमिका

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जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से नक्सलवाद के खात्में के लिए सुरक्षाबलों ने पारंपरिक रणनीतियों से आगे बढ़ते हुए अत्याधुनिक तकनीक ड्रोन, सैटेलाइट सर्विलांस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल लोकेशन ट्रैकिंग जैसे उपकरणों के इस्तेमाल से नक्सलियों के जमावड़े और उनके गतिविधियों की रीयल-टाइम जानकारी मिलने से नक्सलियों के खुफिया नेटवर्क को गहरा झटका लगा है। सैटेलाइट और ड्रोन से मिली स्पष्ट तस्वीरों ने उनके सुरक्षित छिपने के ठिकाने को उजागर कर दिया जिसके परिणामस्वरूप नक्सलियों का सबसे सुरक्षित मुख्यालय बन चुका बस्तर नक्सल मुक्त होने के अंतिम चरण में पंहुच गया है। छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा का दावा है कि इसी रणनीति के चलते पिछले ढाई वर्षों में 500 से अधिक नक्सली कैडर मारे गए हैं।
सुरक्षाबलों को ड्रोन ऑपरेशन, सैटेलाइट इमेजिंग और एआई आधारित निगरानी प्रणाली का विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। 5 से 25 किलोमीटर की रेंज वाले आधुनिक ड्रोन और एआई के जरिए अब जंगलों के भीतर भी 24 घंटे निगरानी संभव हो गई है। इससे नक्सलियों के कोर जोन अबूझमाड़ जैसे दुर्गम इलाकों में छिपे ठिकानों की पहचान कर सटीक कार्रवाई की गई। सुरक्षाबलों ने ‘ट्रिपल एÓ रणनीति एग्रेसिव एक्शन, एरिया डॉमिनेशन और एडमिनिस्ट्रेटिव रीच के जरिए नक्सलियों पर दबाव बढ़ाया । डीआरजी, कोबरा और बस्तर फाइटर जैसी यूनिट्स ने स्थानीय जानकारी और तकनीक के संयोजन से नक्सलियों के रसद और वित्तीय नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया। अबूझमाड़ जैसे दुर्गम क्षेत्रों में सैकड़ो नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए, साथ ही नाइट-लैंडिंग हेलिपैड बनाए गए हैं, जिससे जवानों की लॉजिस्टिक क्षमता कई गुना बढ़ी है। इससे पहले जो इलाके नक्सलियों के सेफ जोन माने जाते थे, वहां अब सुरक्षाबलों की मजबूत मौजूदगी है।
नई पुनर्वास नीति 2025 के तहत नक्सली कैडरों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रोत्साहित किया गया। बेहतर सुविधाएं और सुरक्षा मिलने के कारण आत्मसमर्पण की संख्या में तेजी आई है। साथ ही स्थानीय युवाओं की बस्तर फाइटर में भर्ती से खुफिया तंत्र मजबूत हुआ है, जिससे गोरिल्ला युद्ध में भी सुरक्षाबलों को बढ़त मिली है। परिणामस्वरूप पिछले ढाई वर्षों में सुरक्षाबलों के साथ हुए मंठभेड़ों में 536 नक्सली मारे गये हैं। इसके अलावा 2,900 से अधिक नक्सली आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटे हैं, जबकि 2,038 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। इस दौरान 1,258 आधुनिक हथियार भी बरामद किए गए हैं, जिनमें एके-47, एसएलआर, इंसास और एलएमजी जैसी घातक राइफलें शामिल हैं।

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