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नक्सली कैडरों के प्रशिक्षण मुख्यालय रहा पीडिय़ा मोबाइल नेटवर्क से जुड़ा

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बीजापुर। जिले का पीडिय़ा जिसे कभी नक्सली कैडरों के प्रशिक्षण मुख्यालय के रूप में जाना जाता था, अब पूरी तरह से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। इस क्षेत्र के विकास में एक नया अध्याय गुरूवार को जुड़ा जब पीडिय़ा में पहली बार एक मोबाइल संचार टॉवर स्थापना के साथ 15 गावों में मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी आई, जो वर्षों से अब तक अलग-थलग थे। मोबाइल संचार सेवा से आपातकालीन सेवाओं, शिक्षा और बाहरी दुनिया से पीडिय़ा को जुडऩे का मौका मिलेगा।
उल्लेखनिय है कि 22 जनवरी 2025 को पिडिय़ा में 199 वीं वाहिनी केंद्रीय रिजर्व पुलिस द्वारा सुरक्षा कैम्प की स्थापना ने क्षेत्र के सुरक्षा और विकासात्मक परिदृश्य में एक निर्णायक बदलाव की शुरुआत को चिह्नित किया। दुर्गम और अत्यधिक संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्र में सुरक्षा बलों ने शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक पीडिय़ा और उसके आस-पास के क्षेत्रों में लगभग 60-70 आईईडी का पता लगाना और उन्हें नष्ट करना था। इसके साथ ही इस क्षेत्र को सड़क मार्ग से जोडऩा एक मील का पत्थर साबित हुआ है। गांव में एक बस स्टॉप स्थापित किया गया है। जिससे पहुंच में सुधार हुआ है। आस-पास की बस्तियों के लिए एक नियमित परिवहन बिंदु बन गया है। सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) का राशन अब पीडिय़ा से ही वितरित हो रहा है। इससे पहले ग्रामीणों को राशन के लिए गंगालूर तक यात्रा करनी पड़ती थी। अब पीडिया के आस-पास 15 गांव मोबाइल संचार सेवा से जुड़ गओ हैं।

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