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जग्गी हत्याकांड : अमित जोगी को सरेंडर करने कोर्ट ने दी तीन सप्ताह की मोहलत

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बिलासपुर। 2003 में हुए बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में गुरुवार 2 अप्रैल को छत्तीसगढ उच्च न्यायालय की चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने फैसला सुनाते हुए अमित जोगी को तीन सप्ताह के अंदर सरेंडर करने 3 सप्ताह की मोहलत दी है। अमित जोगी पूर्व मुख्यमंत्री स्व.अजीत जोगी के हैं और इस हत्याकांड में उनकी संलिप्त को लेकर स्व रामावतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी न्याय के लिये लंबी लड़ाई लड़ रहे हैं। आज सुनवाई के दौरान वे कोर्ट में उपस्थित रहै।
2003 में हुए बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने अमित जोगी को दोषी करार दिया है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने उन्हें तीन हफ्ते के अंदर सरेंडर करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद वर्मा की स्पेशल डिवीजन बेंच ने यह अहम फैसला सुनाया है। इससे पहले कोर्ट ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर इस पूरे मामले को हाईकोर्ट में रीओपन किया गया। मामले की जांच करने वाली एजेंसी सीबीआई ने कोर्ट में 11 हजार पन्नों की रिपोर्ट पेश की थी। इसी विस्तृत जांच रिपोर्ट के आधार पर अमित जोगी पर भी चार्ज लगाए गए थे और आज अंतिम सुनवाई के बाद उन्हें दोषी माना गया है। अब उन्हें तीन हफ्ते के अंदर में सरेंडर करना होगा, जिसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। मामले की सुनवाई के दौरान स्व राम अवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने कोर्ट को बताया कि उनके पिता की हत्या एक राजनीतिक साजिश थी। सीबीआई ने 11 हजार पन्नों की चार्जशीट पेश की थी, जिसमें हत्या से जुड़े पर्याप्त सबूत शामिल हैं।
इधर हाईकोर्ट के फैसला आने के बाद अमित जोगी ने कहा कि कोर्ट ने बिना पूरी सुनवाई का मौका दिए उन्हें दोषी करार दिया, जो उनके लिए अप्रत्याशित है। उन्होंने कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी के बेटे अमित जोगी 2003 के राम अवतार जग्गी हत्याकांड में आरोपी रहे हैं। 2007 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया था, लेकिन सीबीआई और शिकायतकर्ता ने इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी। नवंबर 2025 में, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सीबीआई की अपील को तकनीकी आधार पर खारिज करने के बाद पुन: बहाल कर दिया था।

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