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नक्सल कमांडर पापाराव अपने साथियों के साथ करेगा आत्मसमर्पण

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बीजापुर। केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के नक्सल मुक्त अभियान की तय समय सीमा 31 मार्च 2026 में महज एक सप्ताह ही बचा है। लेकिन चार बड़े नक्सली कैडर गणपति, मिशिर बेसरा, पापाराव और सुकरु अब भी सुरक्षाबलों की पकड़ से दूर हैं, इन्होंने हथियार नहीं डाले हैं। सुरक्षाबलों ने इनकी तलाश तेज कर दी है। इसी बीच आज मंगलवार को उक्त चार बड़े नक्सली कैडरों में से एक नक्सली कमांडर पापाराव अपने 15-17 साथियों के साथ आत्मसमर्पण करने निकल गये हैं। मिली जानकारी के अनुसार पापाराव को लेने के लिए पुलिस बल की टीम पहले ही इंद्रावती नेशनल पार्क क्षेत्र के एक गोपनीय ठिकाने के लिए रवाना हो चुकी है। लंबे समय से चल रही बातचीत के बाद अब उसके आत्मसमर्पण की स्थिति बनी है। नक्सली कमांंडर पापाराव के आत्मसमर्पण की पुष्टि छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री विजय शर्मा ने की है।
छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा ने पत्रकारों से चर्चा में बताया कि नक्सली कमांंडर पापाराव से मेरी बात हुई है, जल्दी ही वे अपने साथियों के साथ पुनर्वास करेंगे। उन्होंने कहा कि पापाराव के बाद नक्सलियों की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी कैडर का कोई नक्सली नहीं बचा है। उन्होने बताया कि बस्तर संभााग में एसीएम कैडर के 40 से 45 नक्सली ही बचे हैं, हम उनके भी संपर्क में है । उन्होंने कहा कि हम गोली नहीं चलाना चाहते, हम चाहते हैं कि सब आए और आत्मसमर्पण करें। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग तीन हजार नक्सली पुनर्वास कर चुके हैं, 1800 की गिरफ्तारी हुई है और लगभग 600 नक्सली मारे गए है। उन्होंने कहा कि सुरक्षाबलों की भुजाओं के बल पर तय समय सीमा पर नक्सलवाद पूरी तरह से समाप्त होगा।
कौन हैं नक्सली कमांडर पापाराव
नक्सल कमांडर पापाराव का पूरा नाम सुन्नम पापाराव है। वह मंगू दादा फर्फ चंन्द्रन्ना के नाम से भी मशहूर है। पापाराव छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। वो नक्सलियों की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (ष्ठसर््ंष्ट) का सदस्य है। पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य है। पापाराव अपने साथ एके 47 हथियार रखते हैं और 30-40 नक्सलियों को साथ लेकर चलता है। नक्सली कमांडर पापाराव छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाकों, खासकर बीजापुर और सुकमा क्षेत्रों में सक्रिय रहा है और वो बस्तर की जल-जंगल-जमीन से पूरी तरह वाकिफ है। इसलिए वह हर बार मुठभेड़ से बचकर निकल भाग जाता था।
बता दें कि पापाराव भैरमगढ़ पश्चिम बस्तर एरिया कमेटी से जुड़े हमलों में शामिल रहा और सुरक्षाबलों के खिलाफ कई हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे चुका है। उसके खिलाफ 40 से अधिक आपराधिक मामले और गिरफ्तारी वारंट दर्ज है। पापा राव पीएलजीए (पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी) का एक प्रमुख चेहरा माना जाता रहा है और संगठन के ऑपरेशनल से लेकर रणनीतिक फैसलों में उसकी सीधी भागीदारी रही। उसकी पत्नी उर्मिला भी पीएलजीए बटालियन की सदस्य थी, जो एक मुठभेड़ में मारी जा चुकी है।
केंद्र सरकार ने देश को नक्सल मुक्त बनाने का 31 मार्च 2026 तक लक्ष्य रखा है। पिछले दो साल में कई बड़े नक्सलियों को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में ढेर भी किया है। इसके अलावा राज्य सरकारें नक्सल पुनर्वास नीति भी चला रही हैं, जिससे कि नक्सली स्वयं को सुरक्षाबलों के सामने समर्पण कर मुख्यधारा में लौट सकते हैं।

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