रियासत कालीन फागुन मड़ई में प्रथम पालकी निकाली गई

दंतेवाड़ा। जिला मुख्यालय के मां दंतेश्वरी मंदिर में आयोजित होने वाले रियासत कालीन ऐतिहासिक फागुन मड़ई 22 फरवरी से 5 मार्च तक श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ शुरू हो गया है। मां दंतेश्वरी मंदिर परिसर एवं नगर में 12 दिनों तक चलने वाले इस धार्मिक उत्सव में प्रतिदिन अलग-अलग पालकी कार्यक्रम एवं पारंपरिक अनुष्ठान संपन्न होंगे। कार्यक्रम की शुरुआत रविवार पंचमी तिथि को प्रात: 11 बजे कलश स्थापना एवं ताड़पलंगा धोनी परंपरा के निर्वहन के बाद प्रथम पालकी के साथ इसकी शुरूआत हो गई है।
मां दंतेश्वरी मंदिर समिति से मिली जानकारी के अनुसार 23 फरवरी, सोमवार षष्टमी को द्वितीय पालकी के अंतर्गत रात्रि 9 बजे से खोरखुंदनी परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। 24 फरवरी, मंगलवार सप्तमी/अष्टमी को तृतीय पालकी में रात्रि 10 बजे से नाच मांडनी परंपरा का निर्वहन होगा। 25 फरवरी, बुधवार नवमी को चतुर्थ पालकी के तहत रात्रि 1 बजे से लम्हामार परंपरा का निर्वहन होगा। 26 फरवरी, गुरुवार दशमी को पंचम पालकी में रात्रि 2 बजे से कोडरीमार परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। 27 फरवरी, शुक्रवार एकादशी को षष्टम पालकी में रात्रि 3 बजे से चितलमार परंपरा का निर्वहन होगा। 28 फरवरी, शनिवार द्वादशी को सप्तम पालकी के अंतर्गत रात्रि 4 बजे से गंवरमार परंपरा का निर्वहन किया जाएगा। 1 मार्च, रविवार त्रयोदशी को अष्टम पालकी में रात्रि 10 बजे से आंवरामार एवं गारी परंपरा का निर्वहन होंगे। 2. मार्च, सोमवार चतुर्दशी को नवम् पालकी के साथ रात्रि 10 बजे से होलिका दहन किया जाएगा। 3 मार्च, मंगलवार पूर्णिमा को प्रात: 10 बजे से रंग-भंग एवं पादूका पूजन का परंपरा का निर्वहन होगा। 4 मार्च, बुधवार प्रतिपदा को दोपहर 2 बजे से मेला मड़ई प्रारंभ होगा। समापन 5 मार्च, गुरुवार द्वितीया को प्रात: 10 बजे से आमंत्रित देवी-देवताओं की विदाई के साथ किया जाएगा। इस फागुन मड़ई के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं ग्रामीण अंचलों से आए देवी-देवताओं की उपस्थिति से दंतेवाड़ा नगर भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा। मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर आयोजन को सफल बनाने की अपील की है।







