भू-अर्जन में हेरफेर, पटवारी, एसडीएम, एसडीओ और उप अभियंता के खिलाफ कार्रवाई
अरपा–भैंसाझार परियोजना के तहत भू-अर्जन में करोड़ों रुपये की अनियमितता के मामले में कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया गया है। तत्कालीन तखतपुर एसडीएम आनंद रूप तिवारी के निलंबन के लगभग एक महीने बाद अब जल संसाधन विभाग के तत्कालीन एसडीओ एसएल द्विवेदी और उप अभियंता (सब इंजीनियर) आरके राजपूत को भी निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई पूर्व में कराई गई प्रशासनिक जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई, जिसमें दोनों अधिकारियों को दोषी पाया गया था। जांच में सामने आया कि चकरभाठा वितरक नहर निर्माण के लिए भू-अर्जन प्रक्रिया में एक ही खसरे को अलग-अलग रकबा दर्शाकर मुआवजा वितरण में 3 करोड़ 42 लाख 17 हजार 920 रुपये की अनियमितता की गई, जिससे शासन को भारी आर्थिक क्षति हुई। प्रारंभिक जांच तत्कालीन कलेक्टर सौरभ कुमार द्वारा गठित टीम ने की थी, और बाद में कलेक्टर अवनीश शरण के आदेश पर दोबारा जांच कराई गई। जांच में यह भी सामने आया कि निजी व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से नहर का एलाइनमेंट बदला गया, जिससे मुआवजा राशि में हेरफेर संभव हुआ। इसके आधार पर पटवारी मुकेश साहू को बर्खास्त किया गया और एसडीओ एसएल द्विवेदी तथा उप अभियंता आरके राजपूत को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के तहत निलंबित कर दिया गया है। मामले में आगे की विभागीय कार्रवाई और आपराधिक जांच जारी है।







