बिजली चोरी मामले में हाई कोर्ट ने आरोपी की अपील खारिज की

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने बिजली चोरी के एक मामले में आरोपी की आपराधिक अपील खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार वर्मा की एकलपीठ ने यह फैसला सुनाया। मामले के अनुसार 28 जनवरी 2015 को छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की सतर्कता टीम ने कवर्धा में निरीक्षण के दौरान पाया कि आरोपी ने मीटर बोर्ड के पीछे सर्विस वायर से छेड़छाड़ कर अतिरिक्त तार और एमसीबी लगाकर मीटर को बायपास किया था, जिससे बिजली की खपत दर्ज नहीं हो रही थी। जांच में 2840 वॉट का घरेलू लोड पाया गया और मौके से सामग्री जब्त कर पंचनामा तैयार किया गया। विभाग ने 1,18,925 रुपये का अस्थायी आकलन जारी कर सात दिन में भुगतान या आपत्ति का अवसर दिया, लेकिन आरोपी ने न तो आपत्ति की और न ही राशि जमा की, जिसके बाद विशेष न्यायालय में परिवाद दायर किया गया। कबीरधाम के विशेष न्यायाधीश (विद्युत अधिनियम) ने 22 नवंबर 2018 को आरोपी को इलेक्ट्रिसिटी एक्ट, 2003 की धारा 135(1)(ए) के तहत दोषी ठहराते हुए न्यायालय उठने तक की सजा और 1000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया था। हाई कोर्ट ने साक्ष्यों को विश्वसनीय मानते हुए कहा कि ट्रायल कोर्ट की सजा हल्की और अनुपातिक है, इसलिए उसमें हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है, और अपील खारिज कर दी।







