चुपके से अपने खेतों में पराली जलाने के मामले में धमतरी के 50 किसानों पर प्रकरण दर्ज

धमतरी। खरीफ फसल की कटाई के बाद बचे अवशेष को जलाने पर शासन द्वारा पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है, लेकिन कई किसान रात में चुपके से अपने खेतों में पराली जला रहे हैं। इस वजह से न केवल खेतों की फसल जल रही है, बल्कि मकान, सिंचाई पाइप और कृषि उपकरण भी आग की चपेट में आ रहे हैं। कृषि विभाग ने अब तक जिले में पराली जलाने के 50 प्रकरण दर्ज किया हैं। नियम तोडऩे वाले किसानों को धारा-188 के तहत छह महीने की जेल की सजा हो सकती है, वहीं जमीन के आधार पर 2,500 से 30,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। ऐसे मामलों में किसान भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी अड़चन का सामना कर सकते हैं। बहरहाल प्रकरण धमतरी तहसीलय न्यायालय में लंबित है।
उल्लेखनीय है कि 11 फरवरी को सिहावा क्षेत्र के अंगिरा ऋषि पहाड़ी के पास एक किसान ने खेत में पराली जलाने की कोशिश की। तेज हवाओं के कारण आग फैल गई और गिधावा कक्ष क्रमांक-351 में लगभग 1.5 हेक्टर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ। पूर्व में हटकेशर खार में भी आग ने पांच एकड़ के पैरावट को भस्म कर दिया। बोरिंग पाइप और केबल वायर भी नष्ट हो गए। फायर ब्रिगेड ने दो घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया।
संबलपुर कृषि विज्ञान केंद्र के कीट वैज्ञानिक डॉ. शक्ति वर्मा ने बताया कि पराली जलाने से मिट्टी में मौजूद 16 प्रकार के पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं। इसके अलावा मिट्टी के सूक्ष्मजीव, केंचुए और अन्य जीव भी मर जाते हैं, जिससे मिट्टी और पर्यावरण दोनों पर स्थायी असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि यदि किसान पराली को जलाने की बजाए खेत की जुताई कर मिट्टी में मिला देें तो यह कंपोस्ट हो जाता है। इससे मिट्टी की उर्वरा क्षमता बढ़ती है। फसल में बीमारी भी कम लगने का चांस रहता है।







