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केशोडार वन-धन विकास केंद्र से बदली जनजातीय महिलाओं की जिंदगी

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रायपुर। पीवीटीजी (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह) की महिलाएं स्व-सहायता समूहों (एसएचजी), सरकारी योजनाओं और स्थानीय संसाधनों के दम पर आत्मनिर्भरता की अनूठी मिसाल कायम कर रही हैं। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (पीवीटीजी) की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत संचालित केशोडार वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) के माध्यम से इन महिलाओं को आजीविका के स्थायी साधन उपलब्ध हो रहे हैं।
केशोडार वन-धन विकास केंद्र की स्थापना सहकारी समिति मर्यादित, गरियाबंद द्वारा की गई है। वर्तमान में इस केंद्र से 8 स्वयं सहायता समूहों की कुल 87 पीवीटीजी महिलाएं जुड़ी हुई हैं। महिलाएं अपने पारंपरिक औषधीय ज्ञान के साथ आधुनिक तकनीक का उपयोग कर आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण कर रही हैं। केंद्र में निर्मित उत्पादों को आयुष निदेशालय से औषधि निर्माण का लाइसेंस प्राप्त है, जिससे इन उत्पादों को वैधानिक पहचान मिली है। यहां 13 से अधिक आयुर्वेदिक उत्पादों का निर्माण किया जा रहा है, जिनमें महाविषगर्भ तेल, भृंगराज तेल, तुलसी पाउडर, अश्वगंधा, शतावरी, आंवलक्यादि चूर्ण, पुनर्नवा पाउडर, कृमिघ्न, प्रदरांतक एवं वैश्वानर पाउडर प्रमुख हैं। साथ ही कई क्लासिकल आयुर्वेदिक औषधियों के निर्माण की अनुमति भी केंद्र को प्राप्त है।

पीवीटीजी महिलाएं बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल

केशोडार वन धन विकास केंद्र की विशेष पहचान पारंपरिक ‘तेल पाक पद्धति’ है, जिसमें औषधीय जड़ी-बूटियों को सात दिनों तक धीमी आंच पर पकाया जाता है। इस पद्धति से औषधीय गुण सुरक्षित रहते हैं और उत्पादों की गुणवत्ता सुनिश्चित होती है। पीएम जनमन योजना एवं छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के सहयोग से केंद्र को आधुनिक मशीनें, प्रशिक्षण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग एवं विपणन सुविधा उपलब्ध कराई गई है। उत्पादों का विपणन ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के अंतर्गत संजीवनी स्टोर्स के माध्यम से किया जा रहा है। जनवरी 2024 से मार्च 2025 के बीच केंद्र द्वारा लगभग 159.59 लाख रूपए का विक्रय किया गया, जिससे करीब 10 लाख रूपए का शुद्ध लाभ अर्जित हुआ है। इससे महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे आर्थिक रूप से सशक्त बनी हैं।
इस उपलब्धि पर वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि गरियाबंद की पीवीटीजी महिलाओं द्वारा संचालित केशोडार वन धन विकास केंद्र आत्मनिर्भर भारत की सोच को साकार कर रहा है। पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक बाजार से जोड़कर जनजातीय महिलाओं को सशक्त बनाना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। यह केंद्र अन्य जनजातीय क्षेत्रों के लिए प्रेरणास्रोत है।
उल्लेखनीय है कि राज्योत्सव 2025 के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई सराहना से महिलाओं को प्रात्साहन मिला और उनका उत्साह बढ़ा है। आज केशोडार वन- धन विकास केंद्र न केवल गरियाबंद बल्कि पूरे प्रदेश के लिए जनजातीय सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता का सफल मॉडल बन चुका है।

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