हाई कोर्ट की टिप्पणी ने भूपेश सरकार के कालिख से सने राजनीतिक चरित्र की बानगी पेश की : ठोकने

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता नलिनीश ठोकने ने कहा है कि छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (सीजीपीएससी) घोटाले के आरोपितों की जमानत याचिका को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने जो कड़ी टिप्पणी की है, उससे कांग्रेस की पिछली भूपेश सरकार के कालिख से सने राजनीतिक चरित्र की बानगी पेश हुई है। श्री ठोकने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को अब तो शर्म महसूस करनी चाहिए कि यह घोटाला उनकी सरकार की संरक्षण में हुआ और प्रदेश की युवा पीढ़ी के भविष्य से खिलवाड़ करके तत्कालीन भूपेश सरकार ने एक पूरी पीढ़ी को कमजोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।
भाजपा प्रदेश प्रवक्ता ने कहा कि हाई कोर्ट ने इस घोटाले के आरोपितों तत्कालीन चेयरमेन टामन सोनवानी, परीक्षा नियंत्रक आरती वासनिक उपपरीक्षा नियंत्रक ललित गनवीर और अन्य आरोपितों की जमानत याचिका को इस टिप्पणी के साथ खारिज किया है कि घोटालेबाजों ने ऐसा कार्य किया है, जो हत्या से भी अधिक जघन्य अपराध है। यह मामला बाड़ ही खेत को खा रही है का स्पष्ट उदाहरण है। परीक्षा प्रक्रिया में जिम्मेदार व्यक्तियों ने गोपनीयता और पवित्रता बनाए रखने में गंभीर लापरवाही बरती है। ठोकने कहा कि सीजीपीएससी ने 2020-2022 के बीच परीक्षा आयोजित की थी, जिसमें आरोपितों पर पेपर लीक कर अपने रिश्तेदारों और परिचितों का चयन कराने का गंभीर आरोप लगा था। भाजपा शुरू से इस घोटाले को लेकर संवेदनशील रही और युवाओं को न्याय दिलाने का संकल्प लिया। भाजपा ने 2023 के विधानसभा चुनाव के अपने संकल्प पत्र में इस घोटाले की सीबीआई जाँच कराने का वादा किया और इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच गई। जनता की अदालत में भूपेश सरकार को करारी शिकस्त मिली और अब उच्च न्यायालय ने इसे हत्या से भी जघन्य अपराध बताया है।
ठोकने ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की भाजपा सरकार ने सत्ता सम्हालते ही इस मामले को सीबीआई को सौंपा, जिसकी जाँच प्रक्रिया के दौरान आरोपितों की गिरफ्तारी हुई। घोटाले के सामने आने के बाद से लेकर इसकी जाँच व आरोपितों की गिरफ्तारी तक पूर्व मुख्यमंत्री बघेल सर्वाधिक विचलित नजर आए और उन्होंने आरोपितों के वकील की तरह जाँच प्रक्रिया पर सवाल उठाए। श्री ठोकने ने कहा कि भाजपा की प्रदेश सरकार जिस सख्ती के साथ भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है, उससे बघेल को कम-से-कम इतना तो भरोसा हो ही जाना चाहिए कि बकरे की अम्मा अब ज्यादा दिनों तक खैर नहीं मना पाएगी और खुद बघेल को भी एक-न-एक दिन इस घोटाले की जाँच के दायरे आना पड़ेगा और तब अन्याय से पीडि़त प्रदेश की युवा प्रतिभाओं को न्याय मिल पाएगा।







