ChhattisgarhRegion

अखिल भारतीय हल्बा–हल्बी आदिवासी समाज ने UGC विनियम 2026 का किया समर्थन

Share

बालोद। अखिल भारतीय हल्बा–हल्बी आदिवासी समाज के केन्द्रीय अध्यक्ष डॉ. देवेन्द्र माहला ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 13 जनवरी 2026 को अधि´सूचित “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता संवर्धन विनियम, 2026” का पूर्ण समर्थन करते हुए इसे ऐतिहासिक और दूरगामी कदम बताया है।
डॉ. माहला ने कहा कि इन विनियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव को समाप्त करना और सभी छात्रों को समान, सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि ये नियम विशेष रूप से अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और महिला छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को रोकने के लिए बनाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि रोहित वेमुला (2016) और पायल तडवी (2019) जैसे मामलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति-आधारित भेदभाव एक गंभीर समस्या है। इन घटनाओं के बाद पीड़ित परिवारों द्वारा सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसके आधार पर न्यायालय ने UGC को 2012 के पुराने नियमों को सख्त करने के निर्देश दिए थे।
डॉ. माहला ने नए विनियमों की प्रमुख विशेषताओं की जानकारी देते हुए बताया कि प्रत्येक संस्थान में Equal Opportunity Centre, आरक्षित वर्ग के प्रतिनिधित्व वाली Equity Committee, 24×7 Equity Helpline, Equity Squads और Equity Ambassadors जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं, जिससे भेदभाव की घटनाओं पर समय रहते रोक लग सके।
उन्होंने शिक्षा मंत्रालय के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2016-17 में जाति-आधारित भेदभाव की 173 शिकायतें दर्ज हुई थीं, जो 2023-24 में बढ़कर 350 से अधिक हो गईं। यह 118 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है, जो इन कड़े नियमों की आवश्यकता को सिद्ध करती है।
कुछ स्थानों पर हो रहे विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. माहला ने कहा कि इन विनियमों का विरोध करना सामाजिक न्याय और संवैधानिक समानता का विरोध है। उन्होंने केंद्र सरकार और UGC से अपील की कि इन नियमों को किसी भी दबाव में वापस न लिया जाए और इनका सख्ती से क्रियान्वयन किया जाए।

GLIBS WhatsApp Group
Show More
Back to top button