डेढ़ दशक तक नक्सली हिंसा से बंद पड़े आयुष्मान आरोग्य मंदिर पोटाली के विकास की कहानी

दंतेवाड़ा। जिले के धुर नक्सल प्रभवित इलाका कुआंकोड़ा विकासखंड के अंतर्गत संचालित पोटाली का आयुष्मान आरोग्य मंदिर डेढ़ दशक तक नक्सली हिंसा और असुरक्षा के कारण बंद पड़ा उप-स्वास्थ्य केंद्र स्थानीय लोगों के लिए एक अधूरा सपना था। आयुष्मान आरोग्य मंदिर जिला मुख्यालय से करीब 70 किमी की दूरी पर स्थित है।अब जब बस्तर के 95 प्रतिशत हिस्से से नक्सलवाद के खात्में के बाद पोटाली का आयुष्मान आरोग्य मंदिर काे संचालित किया गया। यहां वर्तमान में चार कर्मचारी पदस्थ हैं, जिनमें एक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी, दो महिला ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक और एक पुरुष ग्रामीण स्वास्थ्य संयोजक शामिल हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिर पोटाली काे 9 जनवरी 2026 को एनक्यूएएस प्रमाण पत्र मिला है। साधारण दवा के लिए कई किलोमीटर पैदल चलकर जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा जाना मजबूरी थी, जो अब समाप्त हो चुकी है। यह नक्सली हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में विकास की जीत की कहानी है।
उल्लेखनिय है कि एसएचसी पोटाली के भवन का निर्माण कार्य वर्ष 2004 में शुरू हुआ था, नक्सलियों के विरोध और भय के चलते भवन का निर्माण पूरा नहीं हो पाया। ग्रामीणों के अनुरोध पर वर्ष 2022 में भवन निर्माण का कार्य दोबारा शुरू हुआ । 26 अप्रैल 2023 को अरनपुर क्षेत्र के पास हुई नक्सली वारदात के बाद निर्माण कार्य फिर ठप हो गया । इस घटना में वाहन चालक सहित 10 डीआरजी जवान बलिदान हुए थे । ग्रामीणों से संवाद और जिला प्रशासन के आश्वासन के बाद नवंबर 2023 में कार्य फिर से शुरू हुआ । निर्माण कार्य में सक्रिय तत्कालीन जनपद सदस्य की नक्सलियों ने 26 अप्रैल 2024 को हत्या कर दी, जिससे यह परियोजना एक बार फिर ठप हो गई । जिसके बाद अब बदली हुई परिस्थिति में आयुष्मान आरोग्य मंदिर काे अप्रेल 2025 से शुरू कर दिया गया है। र्वतमान में आयुष्मान आरोग्य मंदिर पोटाली में 12 प्रकार की स्वास्थ्य सेवाएं दी जा रही हैं। इनमें प्रमुख रूप से मातृत्व स्वास्थ्य सेवाएं, शिशु स्वास्थ्य, परिवार नियोजन, किशोर स्वास्थ्य, गैर संचारी रोगों की जांच व इलाज, संचारी रोगों की रोकथाम, मानसिक और आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का कहना है कि पोटाली की सफलता राज्य सरकार की स्पष्ट सोच और सुशासन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन में विकास की धारा वहां तक पहुंचेगी, जहां अब तक केवल उपेक्षा पहुंची थी। पोटाली ने बता दिया है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो सबसे कठिन रास्ते भी मंज़िल तक पहुंचते हैं।







