बस्तर संभाग के 41 गांवों में पहली बार लहराएगा तिरंगा

जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के 41 ऐसे गांव, जहां अब तक राष्ट्रीय पर्व नही मनाया गया, वहां इस 26 जनवरी को पहली बार तिरंगा फहराया जाएगा। बीते एक साल में नक्सलियों के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में सुरक्षाबलों ने 58 नए सुरक्षा और सुविधा कैंप स्थापित किए हैं। इनमें से 53 कैंप ऐसे हैं, जहां पहले एक बार गणतंत्र दिवस मनाया जा चुका है जबकि 41 कैंप यानी गांव ऐसे हैं, जहां पहली बार कोई राष्ट्रीय पर्व मनाया जाएगा। (एक कैंप यानी एक गांव में स्थापित है) इन्हीं सुरक्षा और सुविधा कैंपों की मजबूत मौजूदगी से जिन गांवों में कभी 26 जनवरी को घरों के दरवाजे बंद रहते थे, वहां अब खुलकर गणतंत्र दिवस की तैयारी हो रही है।
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि बस्तर का लगभग 95 प्रतिशत इलाका अब नक्सल हिंसा से मुक्त हो गया है। इस गणतंत्र दिवस में बस्तर के नक्सल प्रभावित 41 गांवों में लहराता तिरंगा यह साफ संदेश देगा कि बंदूक की सत्ता क्षणिक होती है, लेकिन संविधान की सत्ता ही स्थायी होती है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार इन 41 गांवों में पहली बार ध्वजारोहण कर गणतंत्र दिवस मनाया जाएगा – जिसमें 1. उल्लूर, 2. चिलमसका, 3.पेद्दाकोमरा, 4. कोप्पागुड़ा (पीडिय़ा), 5. बेलनार, 6. ताड़पाल, 7. कंडालापर्ती, 8. पिल्लूर, 9. डोडीसुमार, 10. कमालूर, 11. डोडीमरका, 12. पल्लेवाया, 13. सागमेटा, 14. एडजुम, 15. इदवाया, 16. आदेर, 17. कुड़मेल, 18. कोंगे, 19. सितरम, 20. तोके, 21. पदमेटा, 22. लंका, 23. परियाादी, 24. काकुर, 25. बालेबेड़ा, 26. कोड़ेनार, 27. अंडेगपार, 28. मंदोड़ा, 29. जटवर, 30. वाड़ापेंदा, 31. कोडलियार, 32. तुमालभट्टी, 33. वीरागंगलेर, 34. मैता, 35. पालागुड़ा, 36.गुण्डराजगुड़ेम, 37. नागाराम, 38. वंजलवाही, 39. गोगुंड़ा, 40. पेद्दाबोड़केल 41. उरसांगल में पहली बार ध्वजारोहण होगा।
बस्तर संभााग में नक्सलवाद के विरुद्ध चार दशक से अधिक समय से चली आ रही लोकतांत्रिक लड़ाई में 2001 से 21 दिसंबर 2025 तक 3414 मुठभेड़ों में 1573 नक्सली मारे गए, 1318 जवानों ने बलिदान दिया और 1821 निर्दोष नागरिक हिंसा के शिकार बने। ताड़मेटला, बुर्कापाल और रानीबोदली से लेकर टेकुलगुड़ेम तक की नक्सली वारदातों ने बस्तर की स्मृति पर गहरे जख्म छोड़े हैं।इसके बाद बस्तर से नक्सलवाद के पतन का निर्णायक वर्ष 2025 में नक्सली संगठन के शीर्ष नेतृत्व महासचिव बसवा राजू, हिड़मा सहित 11 केंद्रीय समिति के सदस्य मारे गए। एक ही वर्ष 2025 में 256 नक्सली मारे गये, 884 गिरफ्तार और 1562 ने आत्मसमर्पण कर दिया। इसके साथ ही बस्तर का लगभग 95 प्रतिशत इलाका अब नक्सल हिंसा से मुक्त हो गया । इस गणतंत्र दिवस 2026 में बस्तर के नक्सल प्रभावित 41 गांवों में पहली बार तिरंगा फहराने की तैयारी चल रही है।
बस्तर आईजी सुंदरराज पी. ने बताया कि 2021 के टेकुलगुड़ेम हमले के बाद नक्सलवाद के समूल खात्मे का लक्ष्य तय हुआ। रणनीति बदली गई और सुरक्षाबल पहली बार नक्सलियों के कोर इलाकों में स्थायी रूप से उतरे। बीते चार वर्षों में बस्तर संभाग में लगभग 135 नए सुरक्षा एवं सुविधा कैंप स्थापित किए गए। जिससे नक्सलियों के कॉरिडोर ध्वस्त हुए, नक्सली संगठन के शीर्ष नेतृत्व या तो मारे गए या मुख्यधारा में लौट आए। उन्होने कहा कि यह सिर्फ सुरक्षाबलों की सफलता नहीं है, यह स्थानीय ग्रामीणों के भरोसे की जीत है। जिन इलाकों में कभी राष्ट्रीय पर्व मनाना असंभव था, वहां आज लोग स्वयं आगे बढ़कर तिरंगा फहरा रहे हैं।







