धान खरीदी से किसान को मिला भरोसा, दयाराम गोंड की मेहनत को मिला समय पर सम्मान

रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा लागू की गई पारदर्शी एवं पूर्णत: डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में किसानों के लिए एक नई और भरोसेमंद व्यवस्था स्थापित की है। यह प्रणाली केवल धान विक्रय तक सीमित नहीं रही, बल्कि किसानों के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, सम्मान और आत्मविश्वास का मजबूत आधार बनकर उभरी है।
पारदर्शी और डिजिटल धान खरीदी व्यवस्था किसानों के जीवन में भरोसे का नया अध्याय लिख रहे हैं। डिजिटल और पारदर्शी धान खरीदी व्यवस्था न केवल किसानों के समय और मेहनत की रक्षा कर रही हैए बल्कि उनके जीवन में स्थिरता, आत्मविश्वास और समृद्धि के नए अवसर भी खोल रही है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम कौड़ीमार निवासी कृषक दयाराम गोंड इसकी एक सशक्त मिसाल हैं। कृषक दयाराम गोंड ने कौड़ीमार उपार्जन केंद्र में पूरी तरह तकनीक आधारित प्रक्रिया के माध्यम से 42 क्विंटल धान का सफल विक्रय किया। डिजिटल तौल कांटे से सटीक वजन, ऑनलाइन प्रविष्टि और पारदर्शी भुगतान प्रणाली के चलते उन्हें बिना किसी असमंजस के अपनी उपज का मूल्य समय पर प्राप्त हुआ। उपार्जन केंद्र पर किसानों की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया, जहां बैठने की समुचित व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, छायादार स्थान और व्यवस्थित कतार प्रणाली से किसानों को सम्मानजनक वातावरण मिला।
दयाराम गोंड ने बताया कि पूर्व वर्षों में धान विक्रय के दौरान लंबा इंतजार, जानकारी का अभाव और भुगतान में देरी जैसी समस्याओं के कारण किसानों को परेशान होना पड़ता था, किंतु इस वर्ष डिजिटल और अनुशासित व्यवस्था ने इन सभी कठिनाईयों को समाप्त कर दिया है। समयबद्ध भुगतान से अब किसान मानसिक रूप से निश्चिंत हैं और अपनी मेहनत का पूरा लाभ पा रहे हैं।
समय पर भुगतान मिलने से दयाराम गोंड अब आगामी फसल की तैयारी बेहतर ढंग से कर पा रहे हैं। कृषि निवेश, बच्चों की शिक्षा और पारिवारिक जरूरतों की योजना वे आत्मविश्वास के साथ बना रहे हैं। उनके अनुसार यह व्यवस्था किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सार्थक पहल है, जिसने खेती को फिर से सम्मान और स्थायित्व प्रदान किया है।







