एनआईटी में करेंसी फॉर मॉडर्न वर्कफोर्स विषय पर एसटीटीपी का शुभारंभ

रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर में खनन अभियांत्रिकी विभाग के द्वारा 19 से 23 जनवरी तक एक सप्ताह का सेल्फ फाइनेंस्ड शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग प्रोग्राम (एसटीटीपी) का शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम का विषय रिस्पॉन्सिबल एंड सस्टेनेबल माइनिंग : करेंसी फॉर मॉडर्न वर्कफोर्स है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य खनन क्षेत्र में हो रहे तेह्ल बदलावों और वैश्विक चुनौतियों के प्रति प्रतिभागियों को सक्षम बनाना है। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों द्वारा व्याख्यान, वास्तविक उदाहरणों पर आधारित चर्चाएँ, व्यावहारिक सत्र, पैनल चर्चा जैसी गतिविधियाँ आयोजित की जाएगी।
यह कार्यक्रम कोल इडिया लिमिटेड, साउथ ईस्टर्न कोल् $फील्ड्स लिमिटेड, वेस्टर्न कोल$फील्ड्स लिमिटेड, नॉर्थन कोल्$फील्ड्स लिमिटेड , भारत कोकिंग कोल लिमिटेड, महानदी कोल् $फील्ड्स लिमिटेड, सेंट्रल कोल्$फील्ड्स लिमिटेड, अडानी समूह , छतीसगढ़ स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी लिमिटेड के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कोल इंडिया लिमिटेड के तकनीकी निदेशक श्री अच्युत घटक व महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड के तकनीकी निदेशक संजय कुमार झा उपस्थित रहे । इस कार्यक्रम में संरक्षक के रूप में एनआईटी रायपुर के निदेशक डॉ. एन. वी. रमना राव उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता खनन इंजीनियरिंग विभाग के प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार देवांगन द्वारा की गई। कार्यक्रम के संयोजक प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस डॉ. प्रेम सागर मिश्रा तथा समन्वयक खनन अभियांत्रिकी विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विनीत बालाकृष्णन हैं ।
कार्यक्रम के औपचारिक शुभारंभ और अतिथियों के स्वागत के बाद डॉ पंकज देवांगन द्वारा स्वागत संबोधन प्रस्तुत करते हुए सभी अतिथियों, वक्ताओं, शिक्षकों एवं प्रतिभागियों का हार्दिक अभिनंदन किया गया तथा एसटीटीपी कार्यक्रम में सभी का सादर स्वागत किया गया। उन्होंने बताया कि एनआईटी रायपुर निरंतर शैक्षणिक उपलब्धियों का केंद्र बनकर उभरा है तथा संस्थान द्वारा विभिन्न शैक्षणिक एवं तकनीकी कार्यक्रमों का सफल संचालन किया जा रहा है।
कार्यक्रम के दौरान प्रो. प्रेम सागर मिश्रा ने अपने संबोधन में प्रेरणादायी विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि हमारी कार्यप्रणालियों में रिस्पॉन्सिबल एंड सस्टेनेबल माइनिंग को एक प्रकार की मूल्यवान पूंजी के रूप में परिवर्तित किया जा सकता है, जिसे एक बेहतर भविष्य के निर्माण हेतु शामिल किया जा सकता है। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस पाठ्यक्रम को साकार रूप देने के लिए अनेक कारक एवं विशेषज्ञ एक साथ कार्य कर रहे हैं, जो कि एक सराहनीय पहल है।
डॉ एन वी रमना राव ने पाठ्यक्रम की संकल्पना के लिए आयोजक समिति का आभार व्यक्त किया। उन्होंने खनन क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डाला गया, जिसमें मानवाधिकार निरीक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन, उच्च सीओटू उत्सर्जन, वनीकरण तथा सर्कुलर इकोनॉमी के माध्यम से जैव-विविधता संरक्षण जैसे विषय शामिल रहे।
श्री संजय कुमार झा ने खनन पाठ्यक्रम में छात्राओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना करते हुए इसे खनन क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन का संकेत बताया। उन्होंने एनआईटी रायपुर को देश के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्र बताते हुए कहा कि यह संस्थान राष्ट्र को बेहतर दिशा में आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने रिस्पॉन्सिबल एंड सस्टेनेबल माइनिंग पर विशेष बल देते हुए कहा कि हमें केवल उतना ही खनन करना चाहिए जितना वास्तव में आवश्यक हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रत्येक समस्या का समाधान खनन नहीं है, बल्कि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग अनिवार्य है।
श्री अच्युत घटक जो कि संस्थान के पूर्व छात्र रहे हैं ने संस्थान में अपनी उपस्थिति को होमकमिंग बताते हुए पुरानी स्मृतियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि भविष्य में ओपनकास्ट खनन धीरे-धीरे कम होगा और भूमिगत खनन का महत्व बढ़ेगा। उन्होंने महात्मा गांधी के कथन ‘पृथ्वी सभी की आवश्यकताओं को पूरा कर सकती है, परंतु लालच को नहींÓ का उल्लेख करते हुए उन्नत खनन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि कोयला निकट भविष्य में भी ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा, परंतु पुरानी प्रणालियों से नए ढांचे की ओर उन्नत करना एक चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। आधुनिकीकरण के संदर्भ में उन्होंने बताया कि आधुनिक खनन में मानव हस्तक्षेप कम होगा, परंतु इससे रोजगार से जुड़े प्रश्न भी उत्पन्न होंगे। उन्होंने विद्यार्थियों को सतत खनन के क्षेत्र में अवसर तलाशने के लिए प्रेरित किया ।







