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नक्सल गतिविधियों के विराम के बाद बीते चार महीने में 20 लाख से अधिक पर्यटक बस्तर पहुंचे

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जगदलपुर। छत्तीसगढ़ का बस्तर जिला कभी नक्सल हिंसा के कारण जाना जाता था, लेकिन अब बदली हुई परिस्थिती में बस्तर में नक्सल गतिविधियों में आई भारी गिरावट के बाद हालात इतने बदले है, कि पर्यटक अब बीजापुर और दंतेवाड़ा के सुदूर अंचलों तक बेखौफ पहुंच रहे है। वर्ष 2025-26 में बस्तर संभाग के सातों जिलों में पर्यटकों की संख्या ने सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए है। पर्यटन मंडल के स्थानीय कार्यालय की मानें तो सितंबर 2025 से अब तक बीते चार महीने में 20 लाख से अधिक पर्यटक बस्तर पहुंच चुके हैं। इनमें देश के कई राज्यों के साथ-साथ विदेश से आए सैलानी भी शामिल हैं। बीते 5 वर्षों की तुलना करें तो इस साल 7 लाख से ज्यादा पर्यटक अतिरिक्त पहुंचे हैं। साल के अंत में 20 दिसंबर से 5 जनवरी तक ही 5 लाख से ज्यादा पर्यटक बस्तर के अलग-अलग पर्यटन केंद्रों में पहुंचे हैं। यह साफ संकेत है कि बस्तर को लेकर लोगों की सोच बदल रही है और भरोसा बढ़ रहा है।
एक समय था जब बस्तर का नाम आते ही नक्सल हिंसा की तस्वीर उभरती थी, लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। जंगल, जलप्रपात, आदिवासी संस्कृति और सुरक्षित माहौल, यही बस्तर की नई पहचान बन रही है। पर्यटन बढ़ा तो चुनौतियां भी बढ़ीं है, कई जगह रहने की व्यवस्था, सड़क, शौचालय, पार्किंग, गाइड और खान-पान जैसी बुनियादी सुविधाएं नाकाफी साबित हो रही हैं। स्थानीय लोग और व्यवसायी मानते हैं, कि अगर समय रहते सुविधाएं नहीं बढ़ाई गई, तो यह सुनहरा मौका हाथ से निकल सकता है। पर्यटन व्यवसाईयों का कहना है कि बस्तर में होम-स्टें, रिसॉर्ट, ईको टूरिज्म सेंटर, ट्राइबल हाट और एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ावा देकर हजारों युवाओं को रोजगार दिया जा सकता है। बस्तर की खूबसूरती, संस्कृति और शांति अब बस्तर स्वयं में ब्रांड बन रहा है, जरूरत सिर्फ इसे सही दिशा देने की है।
बस्तर में नक्सल हिंसा से मुक्ति एवं शांति बहाली के प्रयासों के बीच सबसे अहम बदलाव यह है, कि अब पर्यटक सिर्फ चित्रकोट, तीरथगढ़ और कांगेर घाटी तक सीमित नहीं रह गए हैं। इस सीजन में सैलानी बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर और सुकमा के अंदरूनी इलाकों तक पहुंचे। जहां कभी सुरक्षा कारणों से लोग जाने से कतराते थे, वहां अब कैमरे और बैग लिए पर्यटक दिखाई दे रहे हैं। यही बस्तर में स्थायी शांति की असली तस्वीर है। बीजापुर के नंबी जैसे दूरस्थ जल प्रपात के साथ ही दंतेवाड़ा के हांदावाड़ा तक पर्यटकों की पहुंच बढ़ी है। बस्तर संभाग के बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर, कांकेर, बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे सभी जिलों के पर्यटन केंद्रों में जबरदस्त भीड़ इस बार देखी जा रही है। चित्रकोट जलप्रपात, तीरथगढ़, कांगेर घाटी, बारसूर, दंतेश्वरी मंदिर, रामाराम जैसे स्थलों पर इस सीजन में हर वीकेंड हजारों सैलानी पहुंच रहे हैं।
बस्तर के पर्यटन क्षेत्रों के जानकार जियोलाजिस्ट किशोर पानीग्राही ने बताया कि पूरा बस्तर संभाग अपनी नैसर्गिक वन-खनिज संपदा एवं प्रकृतिक सुंदरता, यहां मौजूद झरने, जलप्रपात, पहाड़ी के साथ ही स्वच्छ ताजी हवा तथा जैव-विविधता जंगलों में मौजूद वन्य प्राणी से भरपूर बस्तर की अनूठी जीवंत परंपराएं संपूर्ण पर्यटक स्थल के रूप में अपने को स्थापित करता है । यही कारण है कि पर्यटक बरबस ही बस्तर की ओर खींचे चले आते हैं। बस्तर से नक्सलवाद के अंत के साथ यहां शांति के बाद अगर पर्यटकों की वर्तमान रफ्तार बनी रही और सुविधाएं समय पर बढ़ीं, तो आने वाले वर्षों में बस्तर छत्तीसगढ़ का ही नहीं, देश का बड़ा टूरिस्ट हब बन सकता है।

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