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हाईकोर्ट का अहम फैसला: डीआईजी जेल पदोन्नति रद्द, नई डीपीसी से मेरिट पर होगा पुनर्मूल्यांकन

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बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जेल विभाग में डीआईजी (डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल) पद पर की गई पदोन्नति को अवैध ठहराते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि मेरिट-कम-सीनियरिटी के सिद्धांत के तहत पदोन्नति करते समय विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) द्वारा तुलनात्मक मेरिट का आकलन करना अनिवार्य था, जिसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
जेल अधीक्षक अमित शांडिल्य द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने 9 मार्च 2023 को एस.एस. तिग्गा के पक्ष में जारी डीआईजी जेल पदोन्नति आदेश, 26 अप्रैल 2023 को याचिकाकर्ता की अभ्यावेदन अस्वीकृति तथा 8 फरवरी 2023 की डीपीसी की सिफारिशों को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि चूंकि संबंधित पद पर पदोन्नति मेरिट-कम-सीनियरिटी के आधार पर होनी थी, इसलिए डीपीसी पर यह वैधानिक दायित्व था कि वह पात्र अधिकारियों के सेवा अभिलेख, वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट, समग्र प्रदर्शन और अन्य प्रासंगिक पहलुओं के आधार पर तुलनात्मक मूल्यांकन करे। केवल इस आधार पर कि सभी उम्मीदवारों को बहुत अच्छा ग्रेड मिला है, मेरिट आकलन से बचा नहीं जा सकता।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जब नियमों में मेरिट को प्रधानता दी गई हो, तब वरिष्ठता केवल तभी निर्णायक हो सकती है जब सभी उम्मीदवार तुलनात्मक रूप से समान मेरिट के पाए जाएं। इस मामले में डीपीसी द्वारा सीधे वरिष्ठता लागू करना नियमों और स्थापित सेवा न्यायशास्त्र के विपरीत है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह चार माह के भीतर नई डीपीसी का गठन कर पात्र अधिकारियों का पुन:, निष्पक्ष और तुलनात्मक मेरिट-आधारित मूल्यांकन करे। यदि इस प्रक्रिया में अमित शांडिल्य को अधिक मेधावी पाया जाता है, तो उन्हें नियमानुसार सभी परिणामी लाभ प्रदान किए जाएं।
यह फैसला न केवल जेल विभाग बल्कि राज्य की सेवा पदोन्नति प्रक्रियाओं के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि पदोन्नति में यांत्रिक वरिष्ठता नहीं बल्कि विधिसम्मत मेरिट मूल्यांकन ही निर्णायक होगा।

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