महाराष्ट्र मंडल में युवा समिति ने हर आयु वर्ग के सभासदों के साथ मनाया युवा दिवस

रायपुर। स्वामी विवेकानंद का प्रेरक जीवन हमें बताता है कि मनुष्य का जीवन लंबा नहीं, गहरा होना चाहिए। महज 39 साल के जीवन में विवेकानंद ने देश के लिए, समाज के लिए, हिंदूत्व के लिए ऐसा काम किया कि उनकी 150वीं जयंती पर भी हम सभी उन्हें स्मरण करते हैं और राष्ट्रीय युवा दिवस मनाते हैं। महाराष्ट्र मंडल के अध्यक्ष अजय मधुकर काले ने सोमवार को आयोजित युवा दिवस कार्यक्रम में इस आशय के विचार व्यक्त किए। काले ने कहा कि विवेकानंद की तरह हमारा जीवन पहले देश के लिए, फिर समाज के लिए, परिवार के लिए और आखिर में अपने लिए होना चाहिए।
युवा समिति की प्रमुख डॉ. शुचिता देशमुख ने कहा कि विवेकानंद ने कम उम्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की। उनकी सकारात्मक विचारशैली और देश के लिए समर्पण के भाव ही उन्हें महान और प्रासंगिक बनाते हैं। युवा समिति के तन्मय बक्षी ने कहा कि राष्ट्रीय एकता और भारतीय अस्मिता के लिए विवेकानंद के कार्यों को आज भी याद किया जाता है। शिकागो में हुए धर्म संसद में उनका संबोधन 135 सालों के बाद भी हमें गौरवान्वित करता है और प्रेरित भी। 21 साल के युवा नरेंद्र यानी स्वामी विवेकानंद का आत्मविश्वास वहां की संसद ने देखा और उनके हिंदी में दिए गए संबोधन के पहले शब्द भाइयों और बहनों… से ही समूचा कार्यक्रम स्थल तालियों से गूंज उठा था। बचपन से ही उनका आत्मचिंतन विलक्षण था।
महाराष्ट्र मंडल के छत्तीसगढ़ कार्यवाह सुबोध टोले ने विवेकानंद द्वारा जॉइन किए गए रायपुर के संगठन का उदाहरण देते हुए कहा कि विवेकानंद अनेक संस्थाओं ने जुड़े थे। यही वजह है कि उस कालखंड में उनकी लोगों से कनेक्विटी बड़े गजब की थी। आज हमारे पास संचार के अनेक माध्यम है, फिर भी हमारी कनेक्टिविटी अपेक्षानुसार नहीं है। 39 साल की आयु में विवेकानंद ने जो जीवन व्यतीत किया है, वो हमें प्रेरित करता है कि देश के लिए, समाज के लिए और मानवता के लिए काम करने की सही आयु युवावस्था ही होती है इसलिए हमारा पहला कर्तव्य है कि हम अपने संगठन- संस्था से अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ें और सोशल मिडिया में लगाई जा रही उनकी ऊर्जा को सार्थक दिशा दें। टोले ने आग्रह किया कि हम सभी तीन-तीन युवाओं को महाराष्ट्र मंडल से जोड़ें और उन्हें सक्रिय भी रखें। इससे हमारे समाज की सोच और गतिशीलता एकदम अलग स्तर की होगी।







