महिलाओं पर अत्याचार, अंधविश्वास के खिलाफ सख्त कार्रवाई

डायन (टोनही) के अंधविश्वास के कारण हमारे देश में कई महिलाएँ गंभीर प्रताड़ना और सामाजिक बहिष्कार का शिकार हो रही हैं। गांवों में इन महिलाओं पर जादू-टोना और विपत्तियां लाने का आरोप लगाकर उन्हें लांछित किया जाता है। ऐसे मामलों में महिलाएँ न केवल शारीरिक रूप से घायल होती हैं बल्कि मानसिक और सामाजिक रूप से भी जीवनभर पीड़ित रहती हैं। प्रभावशाली समूहों के दबाव के कारण घटनाओं की जानकारी बाहर नहीं पहुँच पाती और परिवार नारकीय जीवन जीता है। कई बार महिलाएँ इस अत्याचार से हताश होकर आत्महत्या तक कर लेती हैं। डायन (टोनही) के आरोप में जनप्रतिनिधि और सरकारी कर्मचारी भी हस्तक्षेप करने का साहस नहीं कर पाते, जिससे अंधविश्वास और कुरीतियों का शासन कायम रहता है। समाज सुधारक पिछले 30 वर्षों से व्याख्यान, गोष्ठियाँ और ग्रामीण दौरे कर इस अंधविश्वास को दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका उद्देश्य महिलाओं को बचाना, अंधविश्वास और सामाजिक कुरीतियों का निर्मूलन करना और समाज में जागरूकता फैलाना है। इस कार्य में सभी नागरिकों और स्वयंसेवकों के सहयोग की आवश्यकता है ताकि महिलाएँ सुरक्षित और सम्मानपूर्वक जीवन जी सकें।







