दिव्यांगजन सशक्तिकरण शिविर में 78 हितग्राहियों को मिला लाभ

जगदलपुर। जिला प्रशासन द्वारा दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और उन्हें शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं से सीधे जोडऩे के उद्देश्य से शनिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बस्तर में विकासखंड स्तरीय दिव्यांगजन शिविर का आयोजन किया गया। कलेक्टर आकाश छिकारा के दिशा-निर्देशन तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय बसाक और जिला कार्यक्रम प्रबंधक डॉ. रीना लक्ष्मी के कुशल मार्गदर्शन में संपन्न हुए इस शिविर में क्षेत्र के कुल 78 हितग्राही लाभान्वित हुए। इस विशेष आयोजन का मुख्य लक्ष्य दिव्यांगजनों को एक ही छत के नीचे विशेषज्ञ स्वास्थ्य परीक्षण, तत्काल उपचार और यूडीआईडी कार्ड जैसी महत्वपूर्ण शासकीय सुविधाएं उपलब्ध कराना था।
शिविर के दौरान महारानी अस्पताल जगदलपुर के वरिष्ठ और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने अपनी सेवाएं प्रदान कीं। इसमें मेडिसिन, शिशु रोग, नाक-कान-गला, अस्थि रोग और नेत्र रोग विशेषज्ञों द्वारा मरीजों का गहन शारीरिक परीक्षण किया गया। जांच के उपरांत न केवल दिव्यांगों को उचित चिकित्सकीय परामर्श दिया गया, बल्कि आवश्यकतानुसार मौके पर ही दवाइयां भी वितरित की गईं। इस दौरान मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित गंभीर मरीजों की पहचान कर उन्हें उच्च स्तरीय उपचार हेतु जिला अस्पताल रेफर किया गया । स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ यह शिविर प्रशासनिक सुगमता का भी केंद्र बना, जहां समाज कल्याण विभाग की टीम ने सक्रियता दिखाते हुए 38 हितग्राहियों का यूडीआईडी कार्ड हेतु मौके पर ही पंजीयन संपन्न किया, ताकि भविष्य में उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में कोई असुविधा न हो।
इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में खण्ड चिकित्सा अधिकारी डॉ. नारायण सिंह नाग के नेतृत्व में विकासखंड बस्तर के चिरायु चिकित्सा दल और पैरामेडिकल स्टाफ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। शिविर की गंभीरता को देखते हुए जिला चिकित्सालय से सिविल सर्जन डॉ. संजय प्रसाद, डॉ. सरिता थॉमस, डॉ. आरकेएस राज, डॉ. जी. सेतु और डॉ. नवनीत सिंह स्वयं उपस्थित रहे। वहीं स्थानीय स्तर पर सीएचसी बस्तर से बीपीएम श्री राजेन्द्र कुमार बघेल, श्रीमती जीली मंडावी, श्रीमती अनीता कश्यप और अन्य सहयोगी स्टाफ ने व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालित किया। जिला प्रशासन की इस संवेदनशील पहल से न केवल दिव्यांगजनों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्राप्त हुई हैं, बल्कि डिजिटल पहचान पत्र के माध्यम से उनके आत्मनिर्भर और सुगम जीवन की राह भी प्रशस्त हुई है।







