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थ्री डी संयंत्र में विस्फोट से 3 मजदूरों की मौत

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रायपुर। औद्योगिक क्षेत्र में स्थित संयंत्रों में सुरक्षा मानक में खामियों का चुकारा मजदूरों को अपनी जान गंवाकर करना पड़ रहा है। संयंत्र प्रबंधन इस पर केवल लीपापोती करते आ रहें हैं। ऐसा ही एक हादसा मंगलवार की देर शाम को हुआ जहां विस्फोट के बाद तीन मजदूरों की मौत हो गई तथा अनेक मजदूर के मलबे में दबे होने की आशंका बनी हुई है। हालांकि अधिकारिक तौर पर मृत व घायलों के संख्या की पुष्टी नहीं हुई है। हादसे के बाद पुलिस, एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया।
औद्योगिक क्षेत्र उरला स्थित थ्रीडी फैक्ट्री में मंगलवार की देर शाम बड़ा हादसा हो गया। फैक्ट्री में एक जोरदार धमाका हुआ कितने लोगों की मृत्यु एवं कितने घायल हुए हैं, इसकी अधिकृत जानकारी नहीं मिली। जिस समय यह हादसा उस समय फैक्ट्री में काम चल रहा था, जहां कई मजदूर काम कर रहे थे। इसी दौरान अचानक यहां ब्लास्ट हो गया। धमाका इतना तेज था कि उसकी आवाज लगभग दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। दो मजदूरों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई और तीसरे ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। ब्लास्ट इतना शक्तिशाली था कि मृतक के शरीर अंग छिन्न-भिन्न हो इधर-उधर बिखरे पड़े थे। वहां का मंजर काफी खौफनाक था और हालात बयां कर रहे थे कि ब्लास्ट कितना शक्तिशाली रहा होगा।मृतकों में दो मध्यप्रदेश, एक जांजगीर-चांपा का निवासी है। हादसे में मारे गये एक मजदूर का कटा पैर विस्फोट स्थल से कुछ दूर तक आक्सीजन सिलेंडर के पास मिला।मृतकों की पहचान लाल सिंह एवं कमल सिंह निवासी डिंडौरी मध्यप्रदेश तथा अरुण पांडे निवासी जांजगीर चांपा के रूप में हुई है।
घटनास्थल पर रेस्क्यू अभियान जारी है। आशंका जताई जा रही है कि मलबे के नीचे कुछ और मजदूर दबे हो सकते हैं। हालांकि इसे लेकर फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि आखिर हादसे के समय कुल कितने मजदूर वहां काम कर रहे थे। मौके पर एसडीआरएफ, फायर ब्रिगेड टीम के अलावा पुलिस के अधिकारी भी पुलिस कर्मियों के साथ देर रात तक घटना स्थल पर डटे रहे। मलबा को हटाने के लिए जेसीबी का भी इस्तेमाल किया गया।
बताया जा रहा है कि जिस समय यह हादसा हुआ, वहीं पास ही औद्योगिक ऑक्सीजन सिलेंडर भी बड़ी तादात में रखे हुए थे। इनमें कई सिलेंडर भरे हुए थे। ब्लास्ट के दौरान अगर इन सिलेंडरों में विस्फोट होता, तो हादसा इससे भी ज्यादा भयंकर हो सकता था. क्योंकि इस हादसे में फैक्ट्री में मौजूद और भी कई मजदूर चपेट में आ सकते थे। विस्फोट से मजदूर का कटा पैर भी इन सिलेंडरों के पास ही पड़ा पड़ा मिला।

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