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बस्तर गोंचा पर्व का नया रथ आकार लेने लगा, सभी तैयारी अंतिम चरण में 

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जगदलपुर। बस्तर गोंचा पर्व की शुरूआत 29 जून देवस्नान पूर्णिमा चंदन जात्रा पूजा विधान के साथ प्रारंभ हो चुका है, भगवान जगन्नाथ स्वामी का अनसर काल 14 जुलाई तक जारी रहेगा इस दौरान भगवान के दर्शन नही होगे, 15 जुलाई को भगवान श्रीजगन्नाथ, माता सुभद्रा व बलभद्र के दर्शन श्रीमंदिर के बाहर नेत्रोत्सव पूजा विधान के साथ श्रृद्धालू दर्शन कर सकेगे। श्रीगोंचा रथयात्रा पूजा विधान के लिए परंपरानुसार एक नए रथ का निर्माण का कार्य बस्तर के सिद्धहस्त कारीगरों के द्वारा 25 फीट ऊंची काष्ठ रथ आकार लेने लगा है, इसके साथ ही अन्य सभी तैयारी भी अंतिम चरण में है। नव निर्मित रथ में रथारूण होकर भगवान श्रीजगन्नाथ, माता सुभद्रा व बलभद्र स्वामी 16 जुलाई को श्रीगोंचा पूजा विधान के साथ ही जनकपुरी-गुडिचा मंदिर-सिरहासार भवन पंहुचेगे।
शताब्दियों से चली आ रही परम्परानुसार बस्तर गोंचा पर्व के नए रथ का निर्माण बेड़ाउमरगांव के सिद्धहस्त कारीगर हरदेव के नेतृत्व में 10 सदस्यों की टीम कर रही है। रथ निर्माण कर रहे कारीगर हरदेव के अनुसार समय पर रथ का निर्माण पूरा कर लिया जाएगा। हरदेव ने बताया कि बस्तर दशहरा के विशालकाय दुमंजिला रथ निर्माण एवं बस्तर गोंचा रथ का निर्माण भी उन्हीं के गांव के कारिगर करते हैं। यह भी ज्ञात हो कि रियासत कालीन बस्तर गोंचा पर्व अनवरत 619 वर्षों का एतिहासिक पहलू अपने में समेंटे हुए है। बस्तर गोंचा पर्व के अक्षुण परंपराओं का निर्वहन 360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के ब्राह्मणों द्वारा किया जाता है।
360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के पूर्व अध्यक्ष ईश्वर खंबारी ने बताया कि बस्तर गोंचा पर्व की तैयारी पूरे वर्ष जारी रहती है, भगवान जगन्नाथ के एक वर्ष के 12 माह में 13 पूजा विधान अनवरत चलते रहते हैं, जिसमें सबसे वृहद पूजा विधान बस्तर गोंचा पर्व में संपन्न किया जाता है। वर्तमान में 15 जुलाई को नेत्रोत्सव पूजा विधान एवं 16 जुलाई को श्रीगोंचा पूजा विधान की तैयारी जारी है। श्रीगोंचा पूजा विधान में नवनिर्मित गोंचा रथ सहित तीन रथों पर भगवान श्रीजगन्नाथ, माता सुभद्रा व बलभद्र स्वामी के 22 विग्रहों को रथारुढ़ कर श्रीगोंचा रथयात्रा पूजा विधान के साथ भगवान जगन्नाथ स्वामी जनकपुरी-गुडिचा मंदिर-सिरहासार भवन पंहुचेगे जहां 09 दिनों तक श्रृद्धालू भगवान के पुण्य दर्शन लाभ प्राप्त करेंगे। इस दौरान परंपरानुसार विविध पूजा विधान व अनुष्ठान बस्तर गोंचा पर्व के कार्यक्रम के अनुसार संपन्न होगें।

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