पिछले साल का धान अभी तक संग्रहण केन्द्रो में पड़ा है – कांग्रेस

रायपुर। प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता सुरेन्द्र वर्मा ने कहा कि सरकार की लापरवाही के कारण लगभग 20 लाख मीट्रिक टन धान संग्रहण केन्द्रों में खुले में पड़ा है। धान भीषण गर्मी में सुख रहा है, बे-मौसम बारिश से भीग रहा है। 3100 रु. प्रति क्विंटल में खरीदे गए धान का सरकार निराकरण नहीं कर पाई है। भाजपा दावा करती है डबल इंजिन की सरकार का तो केंद्र से बोल कर पूरे खरीदे गए धान से बने चावल को सेन्ट्रल पुल में दे दे, इससे राज्य को करोड़ों का नुकसान भी नहीं होगा, धान का निराकरण का समाधान भी हो जायेगा। धान खुले में पड़ा सुख रहा है, सड़ रहा है, बाद में इसी के आधार पर पूरा धान खराब हो गया बता कर भ्रष्टाचार करेंगे। चूहों पर तोहमत लगाएंगे।
वर्मा ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने प्रदेश की विष्णुदेव सरकार के द्वारा छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान से बना पूरा चावल नहीं खरीदा, जिसके चलते राज्य सरकार को किसानों से खरीदे गए धान के निस्तारण की समस्या उत्पन्न हो गई है। दलीय चाटुकारिता और मोदी-शाह के अधिनायक वाद के चलते राज्य की सरकार केंद्र पर भी दबाव नहीं बन पा रही है। प्रदेश सरकार ने किसानों से खरीदे अतिरिक्त धान को खुले बाजार में बेचने का प्रयास भी किया। 3100 रू. प्रति क्विंटल की दर से खरीदा गया धान परिवहन और हैंडलिंग मिलाकर 3822 लागत मूल्य है जिसे शायद सरकार ने नीलामी का बेस रेट 1900 प्रति क्विंटल तय करके बेचने का प्रयास किया, उसके बावजूद अब तक पूरा धान नीलाम नहीं हो पाया है, और लाखों टन धान सोसाइटियों में खराब हो रहे हैं।







