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14-04-2020
करोना का संक्रमण जिले में कम है पर सतर्कता बरतना जरूरी : अरुण वोरा
10:56am

दुर्ग। प्रदेश में कोरोना संक्रमण के अपेक्षाकृत कम मामले होने के बावजूद सतर्कता बरतना जरूरी है। दुर्ग जिले में सिर्फ एक कोरोना पॉजिटिव मरीज मिला है जो स्वस्थ हो चुका है। इसके बावजूद किसी भी तरह की लापरवाही या सुविधाओं में चूक नहीं होना चाहिए। उक्त बाते दुर्ग विधायक अरुण वोरा ने जिला अस्पताल दुर्ग की व्यवस्था देखने के दौरान कही। उन्होंने डॉक्टरों के लिए पीपीई किट्स, मास्क व मरीजों के लिए आइसोलेशन बेड, वेन्टीलेटर्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने का सुझाव देते हुए कहा है कि अंतरराज्यीय सीमाएं खुलने से स्थिति नियंत्रण से बाहर होने का खतरा है। जिलों में आर्थिक गतिविधियां चलाना भी जरूरी है। इसके लिए पर्याप्त सावधानी से कुछ कार्य शुरू कराए जा सकते हैं। संक्रमण का खतरा रहने तक पूरी सावधानी व सतर्कता बरतते हुए ऐसा किया जा सकता है। वोरा ने कहा कि जिला अस्पताल दुर्ग में रैपिड कोरोना टेस्ट किट के साथ ही वेंटिलेटर, आइसोलेशन वार्ड में ज्यादा बेड उपलब्ध होना चाहिए। कोरोना संदिग्धों के लिए अलग व सामान्य मरीजों के लिए अलग से ओपीडी का संचालन करना बेहद जरूरी है। हर सरकारी कार्यालय में दिन में दो बार सेनेटाइजर स्प्रे की व्यवस्था होना चाहिए ताकि आने-जाने वालों की संख्या सीमित रखकर सोशल व फिजिकल डिस्टेंसिंग का विशेष ध्यान रखा जा सके। वोरा ने कहा कि स्कूल-कॉलेज सबसे बाद में खोलना चाहिए। इस दौरान स्कूल प्रबंधन छात्रों से फीस ना लें। डॉक्टरों के लिए पीपीई किट्स व इंफ़्रा रेड थर्मामीटर की व्यवस्था सुनिश्चित होना चाहिए। पेयजल आपूर्ति के लिए अति आवश्यक अमृत मिशन के कार्यों को शुरू करने की अनुमति देना जरूरी है। इसके अलावा आवश्यक वस्तुओं, राशन व किराना दुकानों, फल-सब्जी, दवाई दुकानों में भीड़ कम रखने 3 बजे की समय सीमा को धीरे-धीरे बढ़ाया जाना चाहिए। सब्जी मंडी एक से अधिक जगह पर लगाने की व्यवस्था करने और दिहाड़ी मजदूरों, गरीब जरूरतमंदों को राशन उपलब्ध कराने नोडल एजेंसी बना कर राशि जारी करना चाहिए ताकि कोई भी भूखा ना रहे।

26-03-2020
लॉक डाउन उल्लंघन पर पुलिस सख्त, बेवजह घूमने वालों पर बरसाए डंडे
12:40pm

रायपुर/बिलासपुर। कोरोना के संक्रमण से बचाव के लिए लॉक डाउन का महत्व ज्यादातर लोगों को समझ नहीं आ रहा है। लॉक डाउन के बावजूद आदेशों का उल्लंघन करने वालों पर पुलिस की सख्ती देखी जा रही है। ऐसा ही नजारा बिलासपुर के तखतपुर में देखने को मिला। सड़क पर बेवजह घूमने वालों पर एसडीओपी रश्मित कौर चावला ने डंडे भी बरसाए। एसडीओपी की सख्ती के बाद इलाके में लोगों का बाहर निकलना कम हुआ है। वहीं एक मोटरसाइकिल सवार को संदेह के आधार पर जब रोका गया तो उसकी जेब से शराब की बोतल निकली। आरोपी युवक को आबकारी एक्ट के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। एसडीओपी रश्मित कौर चावला का कहना है कि लोगों को लॉक डाउन का महत्व समझना होगा। शासन ने आदेश जनता की सुरक्षा और सेहत को ध्यान में रखकर ही दिया है।

21-01-2020
इसका मतलब जेएनयू के सिर्फ 18% छात्र-छात्रों को परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं,सिर्फ इन्हें चाहिए आज़ादी
01:39pm

रायपुर। जेएनयू के वाइस चांसलर एम. जगदीश कुमार का बयान आया है कि 82% छात्रों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है। यानी सिर्फ 18% छात्र-छात्राएं ऐसे हैं जिन्होंने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया यानी उन्हें परीक्षा से कोई लेना-देना नहीं है मतलब परीक्षा से भी आजादी सिर्फ इसी 18% छात्र वर्ग को चाहिए। अगर 82% छात्र-छात्राएं रजिस्ट्रेशन करा रहे हैं तो इसका मतलब है कि उन्हें पढ़ाई से मतलब है, उन्हें करियर से मतलब है, उन्हें हड़ताल से कोई मतलब नहीं, उन्हें टुकड़े-टुकड़े गैंग से कोई मतलब नहीं, उन्हें आजादी से कोई मतलब नहीं, वे अपने सुनहरे सपने सच करना चाहते हैं। पढ़-लिख कर अपना, अपने परिवार का और विश्वविद्यालय का नाम रोशन करना चाहते हैं और इसलिए शायद उन्होंने आगे बढ़कर पंजीयन करा लिया। तमाम मारपीट, लड़ाई-झगड़े, पुलिस पहरा और आरोप-प्रत्यारोप के बीच अगर 82% छात्र आगे निकलकर विश्वविद्यालय के साथ रजिस्ट्रेशन करा कर खड़े हैं तो इसका मतलब गिनती के छात्र ही विश्वविद्यालय का नाम डुबोने पर तुले हुए हैं। आज फिर मारपीट हुई है मारपीट में फिर आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो चुके हैं फिर 82% छात्रों के रजिस्ट्रेशन की तुलना में सिर्फ 18% फसादी लोगों को इतना तवज्जो दिया जाना हैरानी नहीं एक सोची समझी साजिश ही लगती है।

12-01-2020
208 विश्वविद्यालयों के कुलपति चिंता जाहिर कर रहे है लेफ्ट की हिंसक छात्र राजनीति पर, कुछ तो बात होगी
रा
10:16pm

रायपुर। देश के जाने-माने 208 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हिंसक छात्र राजनीति पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने लेफ्ट की राजनीति में हिंसा घोलने पर चिंता जाहिर की है। और उनका चिंता जाहिर करना कहीं से गैर वाजिब नहीं लगता। जिस तरह से जेएनयू राजनीति का अखाड़ा हो गया है उससे वहां की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। लेफ्ट और राइट इन दो पाटों के बीच में पीसकर पढ़ने लिखने वाले बच्चे बुरी तरह परेशान हो रहे हैं। फिर जेएनयू के अध्ययन का राजनीतिक संक्रमण धीरे धीरे और विश्वविद्यालयों तक फैल रहा है। यही 208 विश्वविद्यालय के कुलपति यों की चिंता का प्रमुख कारण हो सकता है। छात्र राजनीति छात्र हितों की रक्षा और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं के लिए संघर्ष तक सीमित रहने की वजह राजनीतिक पार्टियों के हथियारों की तरह इस्तेमाल हो रही है। जो देश के जाने-माने शिक्षाविदों के लिए चिंता का कारण है। जेएनयू की हिंसा उन सैकड़ों बच्चों के पालकों के लिए भी चिंता का कारण बनी हुई है,जो अपने बच्चे को उच्च शिक्षा के लिए वहां भेज रहे हैं। जेएनयू देश के जाने-माने विश्वविद्यालयों में से एक होने के बावजूद अब वह शिक्षा के लिए कम राजनीतिक दंगलों के लिए ज्यादा पहचाना जा रहा है। फिर जेएनयू में देश विरोधी नारेबाजी भी कहीं न कहीं चिंता का विषय बनी हुई है। संभवत 208 विश्वविद्यालय के कुलपतियों की चिंता के पीछे भी यही सब कारण हैं,जो उन्होंने प्रधानमंत्री को खत लिखकर जाहिर किए हैं।

11-01-2020
जेएनयू में हुए विवाद के विरोध में एनएसयूआई ने चलाया सिग्नेचर कैंपेन
05:06pm

रायगढ़। डिग्री कॉलेज में एनएसयूआई रायगढ़ द्वारा एक सिग्नेचर कैंपेन अभियान चलाया गया। जेएनयू में हुए विवाद के विरोध में यह सिग्नेचर कैंपेन चलाया गया। पूरे देश में जेएनयू में हुई घटना के खिलाफ हर छात्र संगठन अपने अपने तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहा है। इसी कड़ी में आज रायगढ़ एनएसयूआई ने भी डिग्री कॉलेज में छात्रों के द्वारा एक सिग्नेचर कैंपेन चलाया गया। यह सिग्नेचर कैंपियन आरएसएस, बीजेपी और एबीवीपी के खिलाफ चलाया गया एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने बताया कि केंद्र सरकार अपनी बातों को मनवाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। इसका जीता जागता उदाहरण जेएनयू में देखने को मिला।

जहां कॉलेज कैंपस में घुसकर पुलिस एवं अन्य अपराधिक तत्वों ने छात्रों के साथ मारपीट की यह घटना काफी निंदनीय है हम इसका विरोध करते हैं और इस विरोध प्रदर्शन में पुरे कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने भी एनएसयूआई का समर्थन किया। छात्र-छात्राओं का भी कहना था कि छात्रों पर बर्बरता और अत्याचार निंदनीय है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अगर सरकार अब भी नहीं जागी तो आगे छात्र सड़क पर उतर कर उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। आज के एनएसयूआई के कार्यक्रम को एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश पांडे और जिला अध्यक्ष आरिफ हुसैन के नेतृत्व में किया गया आज के सिग्नेचर कैंपियन में एनएसयूआई के दर्जनों कार्यकर्ताओं के साथ ही साथ कॉलेज के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने भी हस्ताक्षर कर अपना विरोध प्रदर्शन किया।

 

09-01-2020
राष्ट्रपति भवन की ओर जा रहे जेएनयू छात्रों को पुलिस ने रोका, लिया हिरासत में
08:15pm

नई दिल्ली। जेएनयू में नकाबपोश लोगों के हमले के खिलाफ गुरुवार को प्रदर्शन कर रहे छात्रों को राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च करने का प्रयास करते समय पुलिस ने रोक दिया और बाद में हिरासत में ले लिया। पुलिस ने जनपथ पर यातायात रोकने का प्रयास करती भीड़ को काबू करने के लिए लाठीचार्ज भी किया। पुलिस ने लाउडस्पीकरों से भीड़ से शांति बरकरार रखने की भी अपील की। छात्रों के राष्ट्रपति भवन की ओर बढ़ने का प्रयास करने से पहले जेएनयू छात्र संघ और जेएनयू शिक्षक संघ ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कर कुलपति एम.जगदीश कुमार को पद से हटाने की भी मांग की। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ बैठक के बाद जेनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा कि जब तक कुलपति एम.जगदीश कुमार को नहीं हटाया जाता किसी भी तरह की बात नहीं होगी और अगर मंत्रालय बात करना है तो विश्वविद्यालय कैंपस में आये। बैठक के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलपति एम.जगदीश कुमार को हटाना समस्या का समाधान नहीं है। मानव संसाधन विकास (एचआरडी) सचिव अमित खरे ने कहा कि मंत्रालय के अधिकारी छात्रों के इस दावे पर शुक्रवार को कुमार से फिर बात करेंगे कि संशोधित शुल्क को लागू नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय के अधिकारी कुमार से मुलाकात के बाद जेएनयू छात्र संघ से भी बातचीत करेंगे। मंडी हाउस से निकाले गए छात्रों के मार्च में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल हुए। मार्च को शास्त्री भवन के पास रोक दिया गया। इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई। इस प्रदर्शन में सीपीएम नेता सीताराम येचुरी, प्रकाश करात, बृंदा करात, सीपीआई महासचिव डी. राजा, राजद नेता मनोज झा और लोकतांत्रिक जनता दल के प्रमुख शरद यादव भी शामिल हुए।

 

09-01-2020
कुछ तोड़ने में वक्त नहीं लगता, कुछ भी करने से पहले सोचें : जूही चावला
रा
03:43pm

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री जूही चावला ने जेएनयू में हिंसक प्रदर्शनों को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने हिंसक प्रदर्शनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चीजों को तोड़ने में वक्त नहीं लगता है, लेकिन जोड़ने में समय लगता है। जूही चावला ने मुंबई में एक इवेंट में कहा, क्या हम रिऐक्ट करने की बजाय जवाब देना शुरू कर सकते हैं? क्या हम पहले यह समझ सकते हैं कि आखिर मसला क्या है, क्यों है और क्यों ऐसा किया गया। पहले समझिए और फिर बोलिए। किसी भी चीज को तोड़ने में कोई वक्त नहीं लगता, लेकिन जोड़ने में लगता है। इवेंट में जूही ने कहा,हम 125 करोड़ भारतीय हैं। हम सभी को साथ रखना एक बड़ी जिम्मेदारी है। मैं आप सभी को बताना चाहती हूं कि हम हर किसी से जवाब की उम्मीद नहीं कर सकते। हमें खुद के बारे में भी सोचने की जरूरत है कि आखिर हम क्या कर रहे हैं और क्या सोच रहे हैं।

07-01-2020
दिल्ली की पुलिस तो फुटबॉल हो गई है, अगर यूनिवर्सिटी में नहीं घुसती तो क्यों नहीं घुसी और घुसी तो क्यों घुसी?
11:05pm

रायपुर। पूरे देश में अगर सब से कोई निरीह प्राणी है तो शायद वह दिल्ली पुलिस है। जो पाए उस पर आरोप मढ़ देता है। केजरीवाल उन्हें केंद्र का एजेंट कहते हैं। तो दिल्ली के छात्र उन्हें नाकारा निकम्मा बताने से पीछे नहीं हटते। हाल ही में दो किस्से हुए। एक जामिया विश्वविद्यालय का और दूसरा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का। दोनों ही मामलों में पुलिस की भूमिका आरोपों में है। जेएनयू में जब छात्रों के दो गुट आपस में भिड़े और जमकर मारपीट हुई तो पुलिस कैंपस के अंदर दाखिल नहीं हुई। और इस बात पर पुलिस पर जमकर आरोप लगे कि पुलिस तमाशा ही बनकर खड़ी रही। उसने एक पक्ष को सपोर्ट किया। और उसने गुंडागर्दी रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। इससे ठीक पहले जामिया विश्वविद्यालय में जब विश्वविद्यालय में पुलिस घुस गई थी। और हॉस्टल में घुसकर उसमें उपद्रवियों पर लाठीचार्ज किया था। तब भी उसकी भूमिका पर सवाल उठे थे। तब छात्रसंघो ने और नरेंद्र मोदी सरकार विरोधी लोगों ने पुलिस पर जमकर आरोप लगाए। और कहा कि पुलिस विश्वविद्यालय के अंदर कैसे घुसी? क्यों घुसी? किस अधिकार से घुसी? और जब जेएनयू में छात्र गुट मारपीट पर भिड़े तो पुलिस में विश्वविद्यालय परिसर में जाना जायज नहीं समझा। और वह कैंपस के बाहर खड़ी रही। तब भी उन्हीं लोगों ने फिर सवाल खड़े किए कि पुलिस कैंपस के बाहर क्यों खड़ी रही? कैंपस के अंदर क्यों नहीं घुसी? उसने मारपीट कर रहे लोगों पर नियंत्रण क्यों नहीं पाया? यानी पुलिस अगर कैंपस में घुसे तो क्यों घुसी? और अगर ना घुसे तो क्यों ना घुसी? पुलिस की ऐसी दुर्दशा ऐसी बदहाली ऐसी व्यवस्था किसी और प्रदेश में या किसी और देश में शायद ही देखने को मिले। हम अपनी ही पुलिस पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। जिसके दम पर हम रात को चैन से शहरों में सोते हैं। 

 

07-01-2020
क्या पब्लिसिटी/मार्केटिंग राजनीति से ज्यादा महत्वपूर्ण है? क्या फ़िल्म की कमाई देश के नुकसान से ज्यादा सुकुन देगी?
रा
10:49pm

रायपुर। बॉलीवुड की सुपरस्टार दीपिका पादुकोण का अचानक जेएनयू पहुंच जाना सुर्खियों में बना हुआ है। दीपिका पादुकोण 10 मिनट वहां रुकी मगर ना उन्होंने कुछ कहा और ना ही उस आंदोलन के बारे में अपनी राय जाहिर की। बस खामोश रही। अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और चली गई। कारण क्या था? यह वही जाने। लेकिन उनके वहां अचानक पहुंच जाने से बहुत से सवाल सामने आते हैं? क्या बॉलीवुड की मशहूर हस्तियों को इस तरह जाने अनजाने किसी आंदोलन को हवा देने के लिए पहुंच जाना? और बिना समर्थन दिए वहां से निकाल जाना जायज है? क्या अचानक किसी आंदोलन स्थल पर पहुंचना और उस आंदोलन के समर्थन पर कुछ न कहना? और वहां से निकालना? आपकी ईमानदारी पर सवाल नहीं खड़े करते? क्या शोमैनशिप के बिजनेस से जुड़े लोगों का इस तरह अचानक किसी भीड़ को अपने बिजनेस के लिए इस्तेमाल करना जायज है? क्या फिल्म स्टारों को इस तरह राजनीति का अपने फिल्म के प्रमोशन के लिए इस्तेमाल करना जायज है? क्या आप किसी विचारधारा के समर्थक हैं? क्या आपने कभी इससे पहले इस विषय पर बात की है? या फिर आप राजनीतिक विचारधारा से जुड़ी हुई है? अगर आपके जवाब हां है तो आपको स्पष्ट करना पड़ेगा कि आप किस और खड़े हैं? आपको तय करना पड़ेगा कि आप किस और खड़े है? अगर आप यह नहीं तय कर पाते तो आपको अपनी फिल्म की पब्लिसिटी के लिए अपनी फिल्म की कमाई के लिए अपने फिल्म को हिट करने के लिए इस तरह एक बड़े महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे को इस्तेमाल करना कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता। शर्मनाक ही कहा जा सकता है इस तरह एक फिल्म को पॉपुलर बनाने के लिए एक फिल्म को हिट बनाने के लिए एक फिल्म से जमकर कमाई करने के लिए किसी ज्वलनशील मुद्दे में अपनी उपस्थिति से घी डालना। 

 

07-01-2020
जेएनयू कैंपस पहुंचीं दीपिका पादुकोण, विवि में हुई हिंसा के विरोध प्रदर्शन में हुईं शामिल
08:46pm

नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण मंगलवार शाम को जेएनयू कैंपस पहुंचीं। दीपिका शाम 7.45 बजे जेएनयू कैंपस पहुंचीं। यहां पर दीपिका हिंसा के विरोध में हुए प्रदर्शन में शामिल हुईं। यहां वो करीब 10 मिनट तक रूकी। इससे पहले दीपिका पादुकोण ने विरोध प्रदर्शन को लेकर एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि "यह देखकर मुझे गर्व होता है कि हम अपनी बात कहने से डरे नहीं हैं। चाहे हमारी सोच कुछ भी हो, लेकिन मेरे ख्याल से हम देश और इसके भविष्य के बारे में सोच रहे हैं, ये अच्छी बात है।"

07-01-2020
जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज, विवि प्रशासन की शिकायत पर मामला बना
10:33am

रायपुर। जेएनयू में छात्रों के दो गुटों के बीच हुई मारपीट के मामले में जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष के खिलाफ जुर्म दर्ज हुआ है। उनके साथ 19 और लोगों के खिलाफ एफआईआर हुई है। आईशी घोष के खिलाफ जेएनयू प्रशासन ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। आईशी घोष के खिलाफ सर्वर रूम में भी तोड़फोड़ करने का आरोप है। आईशी घोष कल तक एबीवीपी  पर तमाम आरोप लगा रही थी लेकिन आज मामला उलटता दिख रहा है। वैसे भी पुलिस ने प्रारंभिक जांच में पाया कि मारपीट में एबीवीपी के अलावा लेफ्ट के छात्र भी शामिल थे। यानी कुल मिलाकर यह छात्रों के बीच का मामला था जिसको लेकर सारे देश की राजनीति गर्म हो गई है। बताया जाता है कि मामले की शुरुआत एबीवीपी के छात्रों द्वारा पंजीयन कराने से शुरू हुई। वामपंथी छात्रों का कहना था कि जब आंदोलन चल रहा है तो यह पंजीयन नहीं होना चाहिए। और इसी बात को लेकर वहां मारपीट हुई थी और मामला बिगड़ता चला गया। बाद में जमकर मारपीट हुई और उसके बाद राजनीतिक दल भी उसमें वोट पड़े।

06-01-2020
जेएनयू हिंसा: मुंबई के कार्टर रोड में जमा हुई फिल्मी हस्तियां,किया विरोध, कही यह बात...
रा
11:00pm

मुंबई। जेएनयू हमले के विरोध फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप और अनुभव सिन्हा सहित कई फिल्म स्टार मुंबई के कार्टर रोड पर जमा हुए। इस दौरान अनुभव सिन्हा हाथ में तिरंगा लिए नजर आए। वहीं अनुराग कश्यप हाथों में प्लेकार्ड लेकर जेएनयू हमले का विरोध किया। इनके अलावा विरोध में फिल्म अभिनेत्री ऋचा चड्ढा, निर्देशक विशाल भारद्वाज और अभिनेता सुशांत सिंह, कुनाल कामरा,तापसी पन्नू, ज़ोया अख्तर, दिया मिर्ज़ा, राहुल बोस समेत कई फ़िल्मी सितारे शामिल हुए।
विशाल भारद्वाज ने इस दौरान एक कविता पढ़ी, रात में सूरज लाने का वादा करके, दिन में रात उगा कर दिखला दी तुमने। पानी-पानी कह कर बरसाया तेजाब और एक आग लगाकर दिखला दी तुमने। हम मायूस नहीं हैं, हम हैरान नहीं हैं। सच भी इतना झूठा लगने लगता है। झूठ भी इतनी सच्चाई से बोलते हो। फर्क कहां करते हो तुम बाशिंदों में, बस मजहब के कांटे पर ही तौलते हो। है दस्तूर की सुबह होने से पहले, रातों का गहरा हो जाना लाजिम है। जुल्म बढ़ाओ अभी तुम्हारे जुल्मों का हद से बाहर हो जाना भी लाजिम है। जैसा सोचा था तु्म वैसे ही निकले,वैसे ही निकले। बांद्रा पर भी लोग हमले के विरोध में जुटे। फिल्मकार हंसल मेहता ने प्रोटेस्ट की तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा- और यह बांद्रा है। यहां शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट जारी है और यह रुकेगा नहीं। 

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