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12-01-2020
208 विश्वविद्यालयों के कुलपति चिंता जाहिर कर रहे है लेफ्ट की हिंसक छात्र राजनीति पर, कुछ तो बात होगी
रा
10:16pm

रायपुर। देश के जाने-माने 208 विश्वविद्यालयों के कुलपतियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर हिंसक छात्र राजनीति पर चिंता जाहिर की है। उन्होंने लेफ्ट की राजनीति में हिंसा घोलने पर चिंता जाहिर की है। और उनका चिंता जाहिर करना कहीं से गैर वाजिब नहीं लगता। जिस तरह से जेएनयू राजनीति का अखाड़ा हो गया है उससे वहां की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है। लेफ्ट और राइट इन दो पाटों के बीच में पीसकर पढ़ने लिखने वाले बच्चे बुरी तरह परेशान हो रहे हैं। फिर जेएनयू के अध्ययन का राजनीतिक संक्रमण धीरे धीरे और विश्वविद्यालयों तक फैल रहा है। यही 208 विश्वविद्यालय के कुलपति यों की चिंता का प्रमुख कारण हो सकता है। छात्र राजनीति छात्र हितों की रक्षा और छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं के लिए संघर्ष तक सीमित रहने की वजह राजनीतिक पार्टियों के हथियारों की तरह इस्तेमाल हो रही है। जो देश के जाने-माने शिक्षाविदों के लिए चिंता का कारण है। जेएनयू की हिंसा उन सैकड़ों बच्चों के पालकों के लिए भी चिंता का कारण बनी हुई है,जो अपने बच्चे को उच्च शिक्षा के लिए वहां भेज रहे हैं। जेएनयू देश के जाने-माने विश्वविद्यालयों में से एक होने के बावजूद अब वह शिक्षा के लिए कम राजनीतिक दंगलों के लिए ज्यादा पहचाना जा रहा है। फिर जेएनयू में देश विरोधी नारेबाजी भी कहीं न कहीं चिंता का विषय बनी हुई है। संभवत 208 विश्वविद्यालय के कुलपतियों की चिंता के पीछे भी यही सब कारण हैं,जो उन्होंने प्रधानमंत्री को खत लिखकर जाहिर किए हैं।

11-01-2020
जेएनयू में हुए विवाद के विरोध में एनएसयूआई ने चलाया सिग्नेचर कैंपेन
05:06pm

रायगढ़। डिग्री कॉलेज में एनएसयूआई रायगढ़ द्वारा एक सिग्नेचर कैंपेन अभियान चलाया गया। जेएनयू में हुए विवाद के विरोध में यह सिग्नेचर कैंपेन चलाया गया। पूरे देश में जेएनयू में हुई घटना के खिलाफ हर छात्र संगठन अपने अपने तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहा है। इसी कड़ी में आज रायगढ़ एनएसयूआई ने भी डिग्री कॉलेज में छात्रों के द्वारा एक सिग्नेचर कैंपेन चलाया गया। यह सिग्नेचर कैंपियन आरएसएस, बीजेपी और एबीवीपी के खिलाफ चलाया गया एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने बताया कि केंद्र सरकार अपनी बातों को मनवाने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। इसका जीता जागता उदाहरण जेएनयू में देखने को मिला।

जहां कॉलेज कैंपस में घुसकर पुलिस एवं अन्य अपराधिक तत्वों ने छात्रों के साथ मारपीट की यह घटना काफी निंदनीय है हम इसका विरोध करते हैं और इस विरोध प्रदर्शन में पुरे कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने भी एनएसयूआई का समर्थन किया। छात्र-छात्राओं का भी कहना था कि छात्रों पर बर्बरता और अत्याचार निंदनीय है। इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और अगर सरकार अब भी नहीं जागी तो आगे छात्र सड़क पर उतर कर उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे। आज के एनएसयूआई के कार्यक्रम को एनएसयूआई के प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश पांडे और जिला अध्यक्ष आरिफ हुसैन के नेतृत्व में किया गया आज के सिग्नेचर कैंपियन में एनएसयूआई के दर्जनों कार्यकर्ताओं के साथ ही साथ कॉलेज के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने भी हस्ताक्षर कर अपना विरोध प्रदर्शन किया।

 

09-01-2020
राष्ट्रपति भवन की ओर जा रहे जेएनयू छात्रों को पुलिस ने रोका, लिया हिरासत में
08:15pm

नई दिल्ली। जेएनयू में नकाबपोश लोगों के हमले के खिलाफ गुरुवार को प्रदर्शन कर रहे छात्रों को राष्ट्रपति भवन की ओर मार्च करने का प्रयास करते समय पुलिस ने रोक दिया और बाद में हिरासत में ले लिया। पुलिस ने जनपथ पर यातायात रोकने का प्रयास करती भीड़ को काबू करने के लिए लाठीचार्ज भी किया। पुलिस ने लाउडस्पीकरों से भीड़ से शांति बरकरार रखने की भी अपील की। छात्रों के राष्ट्रपति भवन की ओर बढ़ने का प्रयास करने से पहले जेएनयू छात्र संघ और जेएनयू शिक्षक संघ ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधिकारियों से मुलाकात कर कुलपति एम.जगदीश कुमार को पद से हटाने की भी मांग की। मानव संसाधन विकास मंत्रालय के साथ बैठक के बाद जेनयू छात्रसंघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा कि जब तक कुलपति एम.जगदीश कुमार को नहीं हटाया जाता किसी भी तरह की बात नहीं होगी और अगर मंत्रालय बात करना है तो विश्वविद्यालय कैंपस में आये। बैठक के बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कहा कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलपति एम.जगदीश कुमार को हटाना समस्या का समाधान नहीं है। मानव संसाधन विकास (एचआरडी) सचिव अमित खरे ने कहा कि मंत्रालय के अधिकारी छात्रों के इस दावे पर शुक्रवार को कुमार से फिर बात करेंगे कि संशोधित शुल्क को लागू नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय के अधिकारी कुमार से मुलाकात के बाद जेएनयू छात्र संघ से भी बातचीत करेंगे। मंडी हाउस से निकाले गए छात्रों के मार्च में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता भी शामिल हुए। मार्च को शास्त्री भवन के पास रोक दिया गया। इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई। इस प्रदर्शन में सीपीएम नेता सीताराम येचुरी, प्रकाश करात, बृंदा करात, सीपीआई महासचिव डी. राजा, राजद नेता मनोज झा और लोकतांत्रिक जनता दल के प्रमुख शरद यादव भी शामिल हुए।

 

09-01-2020
कुछ तोड़ने में वक्त नहीं लगता, कुछ भी करने से पहले सोचें : जूही चावला
रा
03:43pm

मुंबई। बॉलीवुड अभिनेत्री जूही चावला ने जेएनयू में हिंसक प्रदर्शनों को लेकर टिप्पणी की है। उन्होंने हिंसक प्रदर्शनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि चीजों को तोड़ने में वक्त नहीं लगता है, लेकिन जोड़ने में समय लगता है। जूही चावला ने मुंबई में एक इवेंट में कहा, क्या हम रिऐक्ट करने की बजाय जवाब देना शुरू कर सकते हैं? क्या हम पहले यह समझ सकते हैं कि आखिर मसला क्या है, क्यों है और क्यों ऐसा किया गया। पहले समझिए और फिर बोलिए। किसी भी चीज को तोड़ने में कोई वक्त नहीं लगता, लेकिन जोड़ने में लगता है। इवेंट में जूही ने कहा,हम 125 करोड़ भारतीय हैं। हम सभी को साथ रखना एक बड़ी जिम्मेदारी है। मैं आप सभी को बताना चाहती हूं कि हम हर किसी से जवाब की उम्मीद नहीं कर सकते। हमें खुद के बारे में भी सोचने की जरूरत है कि आखिर हम क्या कर रहे हैं और क्या सोच रहे हैं।

07-01-2020
दिल्ली की पुलिस तो फुटबॉल हो गई है, अगर यूनिवर्सिटी में नहीं घुसती तो क्यों नहीं घुसी और घुसी तो क्यों घुसी?
11:05pm

रायपुर। पूरे देश में अगर सब से कोई निरीह प्राणी है तो शायद वह दिल्ली पुलिस है। जो पाए उस पर आरोप मढ़ देता है। केजरीवाल उन्हें केंद्र का एजेंट कहते हैं। तो दिल्ली के छात्र उन्हें नाकारा निकम्मा बताने से पीछे नहीं हटते। हाल ही में दो किस्से हुए। एक जामिया विश्वविद्यालय का और दूसरा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का। दोनों ही मामलों में पुलिस की भूमिका आरोपों में है। जेएनयू में जब छात्रों के दो गुट आपस में भिड़े और जमकर मारपीट हुई तो पुलिस कैंपस के अंदर दाखिल नहीं हुई। और इस बात पर पुलिस पर जमकर आरोप लगे कि पुलिस तमाशा ही बनकर खड़ी रही। उसने एक पक्ष को सपोर्ट किया। और उसने गुंडागर्दी रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। इससे ठीक पहले जामिया विश्वविद्यालय में जब विश्वविद्यालय में पुलिस घुस गई थी। और हॉस्टल में घुसकर उसमें उपद्रवियों पर लाठीचार्ज किया था। तब भी उसकी भूमिका पर सवाल उठे थे। तब छात्रसंघो ने और नरेंद्र मोदी सरकार विरोधी लोगों ने पुलिस पर जमकर आरोप लगाए। और कहा कि पुलिस विश्वविद्यालय के अंदर कैसे घुसी? क्यों घुसी? किस अधिकार से घुसी? और जब जेएनयू में छात्र गुट मारपीट पर भिड़े तो पुलिस में विश्वविद्यालय परिसर में जाना जायज नहीं समझा। और वह कैंपस के बाहर खड़ी रही। तब भी उन्हीं लोगों ने फिर सवाल खड़े किए कि पुलिस कैंपस के बाहर क्यों खड़ी रही? कैंपस के अंदर क्यों नहीं घुसी? उसने मारपीट कर रहे लोगों पर नियंत्रण क्यों नहीं पाया? यानी पुलिस अगर कैंपस में घुसे तो क्यों घुसी? और अगर ना घुसे तो क्यों ना घुसी? पुलिस की ऐसी दुर्दशा ऐसी बदहाली ऐसी व्यवस्था किसी और प्रदेश में या किसी और देश में शायद ही देखने को मिले। हम अपनी ही पुलिस पर सवाल खड़ा कर रहे हैं। जिसके दम पर हम रात को चैन से शहरों में सोते हैं। 

 

07-01-2020
क्या पब्लिसिटी/मार्केटिंग राजनीति से ज्यादा महत्वपूर्ण है? क्या फ़िल्म की कमाई देश के नुकसान से ज्यादा सुकुन देगी?
रा
10:49pm

रायपुर। बॉलीवुड की सुपरस्टार दीपिका पादुकोण का अचानक जेएनयू पहुंच जाना सुर्खियों में बना हुआ है। दीपिका पादुकोण 10 मिनट वहां रुकी मगर ना उन्होंने कुछ कहा और ना ही उस आंदोलन के बारे में अपनी राय जाहिर की। बस खामोश रही। अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और चली गई। कारण क्या था? यह वही जाने। लेकिन उनके वहां अचानक पहुंच जाने से बहुत से सवाल सामने आते हैं? क्या बॉलीवुड की मशहूर हस्तियों को इस तरह जाने अनजाने किसी आंदोलन को हवा देने के लिए पहुंच जाना? और बिना समर्थन दिए वहां से निकाल जाना जायज है? क्या अचानक किसी आंदोलन स्थल पर पहुंचना और उस आंदोलन के समर्थन पर कुछ न कहना? और वहां से निकालना? आपकी ईमानदारी पर सवाल नहीं खड़े करते? क्या शोमैनशिप के बिजनेस से जुड़े लोगों का इस तरह अचानक किसी भीड़ को अपने बिजनेस के लिए इस्तेमाल करना जायज है? क्या फिल्म स्टारों को इस तरह राजनीति का अपने फिल्म के प्रमोशन के लिए इस्तेमाल करना जायज है? क्या आप किसी विचारधारा के समर्थक हैं? क्या आपने कभी इससे पहले इस विषय पर बात की है? या फिर आप राजनीतिक विचारधारा से जुड़ी हुई है? अगर आपके जवाब हां है तो आपको स्पष्ट करना पड़ेगा कि आप किस और खड़े हैं? आपको तय करना पड़ेगा कि आप किस और खड़े है? अगर आप यह नहीं तय कर पाते तो आपको अपनी फिल्म की पब्लिसिटी के लिए अपनी फिल्म की कमाई के लिए अपने फिल्म को हिट करने के लिए इस तरह एक बड़े महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दे को इस्तेमाल करना कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता। शर्मनाक ही कहा जा सकता है इस तरह एक फिल्म को पॉपुलर बनाने के लिए एक फिल्म को हिट बनाने के लिए एक फिल्म से जमकर कमाई करने के लिए किसी ज्वलनशील मुद्दे में अपनी उपस्थिति से घी डालना। 

 

07-01-2020
जेएनयू कैंपस पहुंचीं दीपिका पादुकोण, विवि में हुई हिंसा के विरोध प्रदर्शन में हुईं शामिल
08:46pm

नई दिल्ली। बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण मंगलवार शाम को जेएनयू कैंपस पहुंचीं। दीपिका शाम 7.45 बजे जेएनयू कैंपस पहुंचीं। यहां पर दीपिका हिंसा के विरोध में हुए प्रदर्शन में शामिल हुईं। यहां वो करीब 10 मिनट तक रूकी। इससे पहले दीपिका पादुकोण ने विरोध प्रदर्शन को लेकर एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि "यह देखकर मुझे गर्व होता है कि हम अपनी बात कहने से डरे नहीं हैं। चाहे हमारी सोच कुछ भी हो, लेकिन मेरे ख्याल से हम देश और इसके भविष्य के बारे में सोच रहे हैं, ये अच्छी बात है।"

07-01-2020
जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज, विवि प्रशासन की शिकायत पर मामला बना
10:33am

रायपुर। जेएनयू में छात्रों के दो गुटों के बीच हुई मारपीट के मामले में जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष के खिलाफ जुर्म दर्ज हुआ है। उनके साथ 19 और लोगों के खिलाफ एफआईआर हुई है। आईशी घोष के खिलाफ जेएनयू प्रशासन ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। आईशी घोष के खिलाफ सर्वर रूम में भी तोड़फोड़ करने का आरोप है। आईशी घोष कल तक एबीवीपी  पर तमाम आरोप लगा रही थी लेकिन आज मामला उलटता दिख रहा है। वैसे भी पुलिस ने प्रारंभिक जांच में पाया कि मारपीट में एबीवीपी के अलावा लेफ्ट के छात्र भी शामिल थे। यानी कुल मिलाकर यह छात्रों के बीच का मामला था जिसको लेकर सारे देश की राजनीति गर्म हो गई है। बताया जाता है कि मामले की शुरुआत एबीवीपी के छात्रों द्वारा पंजीयन कराने से शुरू हुई। वामपंथी छात्रों का कहना था कि जब आंदोलन चल रहा है तो यह पंजीयन नहीं होना चाहिए। और इसी बात को लेकर वहां मारपीट हुई थी और मामला बिगड़ता चला गया। बाद में जमकर मारपीट हुई और उसके बाद राजनीतिक दल भी उसमें वोट पड़े।

06-01-2020
जेएनयू हिंसा: मुंबई के कार्टर रोड में जमा हुई फिल्मी हस्तियां,किया विरोध, कही यह बात...
रा
11:00pm

मुंबई। जेएनयू हमले के विरोध फिल्म निर्देशक अनुराग कश्यप और अनुभव सिन्हा सहित कई फिल्म स्टार मुंबई के कार्टर रोड पर जमा हुए। इस दौरान अनुभव सिन्हा हाथ में तिरंगा लिए नजर आए। वहीं अनुराग कश्यप हाथों में प्लेकार्ड लेकर जेएनयू हमले का विरोध किया। इनके अलावा विरोध में फिल्म अभिनेत्री ऋचा चड्ढा, निर्देशक विशाल भारद्वाज और अभिनेता सुशांत सिंह, कुनाल कामरा,तापसी पन्नू, ज़ोया अख्तर, दिया मिर्ज़ा, राहुल बोस समेत कई फ़िल्मी सितारे शामिल हुए।
विशाल भारद्वाज ने इस दौरान एक कविता पढ़ी, रात में सूरज लाने का वादा करके, दिन में रात उगा कर दिखला दी तुमने। पानी-पानी कह कर बरसाया तेजाब और एक आग लगाकर दिखला दी तुमने। हम मायूस नहीं हैं, हम हैरान नहीं हैं। सच भी इतना झूठा लगने लगता है। झूठ भी इतनी सच्चाई से बोलते हो। फर्क कहां करते हो तुम बाशिंदों में, बस मजहब के कांटे पर ही तौलते हो। है दस्तूर की सुबह होने से पहले, रातों का गहरा हो जाना लाजिम है। जुल्म बढ़ाओ अभी तुम्हारे जुल्मों का हद से बाहर हो जाना भी लाजिम है। जैसा सोचा था तु्म वैसे ही निकले,वैसे ही निकले। बांद्रा पर भी लोग हमले के विरोध में जुटे। फिल्मकार हंसल मेहता ने प्रोटेस्ट की तस्वीर ट्वीट करते हुए लिखा- और यह बांद्रा है। यहां शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट जारी है और यह रुकेगा नहीं। 

06-01-2020
जेएनयू मामला: पुलिस को मिले अहम सुराग, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हो रही जांच
रा
10:24pm

नई दिल्‍ली। जेएनयू परिसर में छात्रों और शिक्षकों पर हुए हमले के बाद हंगामा और देश में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं। इधर दिल्‍ली पुलिस ने जेएनयू मामले में सोमवार को प्रेस कॉन्‍फ्रेंस की और बताया कि हिंसा मामले की जांच जारी है। इस मामले में बड़ा सुराग दिल्‍ली पुलिस के अपराध शाखा को मिले हैं और हम उन पर काम कर रहे हैं। दिल्‍ली पुलिस के पीआरओ एमएस रंधावा ने बताया, रजिस्ट्रेशन के मामले को लेकर 2 गुटों में विवाद हुआ था। इस मामले को लेकर अब तक 4 एफआईआर कराई गई हैं। सूत्रों के अनुसार जेएनयू व्यवस्थापक की शिकायत पर 4 जनवरी को एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। हाथापाई और पंजीकरण प्रक्रिया में बाधा पहुंचाने को लेकर 2 और 3 एफआईआर दर्ज की गई थी। जेएनयू में रविवार की घटना को लेकर आज चौथी एफआईआर दर्ज की गई। रंधावा ने बताया फिलहाल क्राइम ब्रांच इस मामले की जांच कर रही है। जेएनयू में देर से पहुंचने के आरोपों पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि उन्होंने पुलिस नियंत्रण कक्ष को किए गए टेलीफोन पर और कानून व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिये पेशेवराना अंदाज में काम किया।

परिसर में छात्रों पर नकाबपोश लोगों द्वारा किये गए हमले को लेकर शुरू की गई जांच के बारे में उन्होंने कहा कि अपराध शाखा को कुछ अहम सुराग मिले हैं और उन पर काम किया जा रहा है। विश्वविद्यालय के द्वार के बाहर करीब 700 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिये पुलिस का भारी बंदोबस्त किया गया है। बता दें कि जेएनयू में रविवार रात डंडों और रॉड से लैस नकाबपोश लोगों ने छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया और परिसर में संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। इसके बाद प्रशासन ने पुलिस को बुलाया और फ्लैग मार्च भी किया था।

06-01-2020
जेएनयू पर हमला भारत पर हमला है : कांग्रेस 
रा
09:10pm

रायपुर। जेएनयू की हिंसा खूनखराबे की कड़ी निंदा करते हुए प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि भाजपा अब विरोध के स्वरों को कुचलने के लिए गुंडों और पुलिस का एक साथ इस्तेमाल करा रही है। जेएनयू भारत का ही नहीं विश्व का जाना माना विश्वविद्यालय है। लड़कियों के छात्रावास तक में जिस तरह से नकाबपोश गुंडे घुसे, चिंहित करके छात्रसंघ अध्यक्ष और लड़कियों पर क्रूर बर्बरतापूर्ण हमला किया गया, कांग्रेस उसकी कड़ी निंदा करती है। जेएनयू की हिंसा में नकाबपोश असामाजिक तत्वों को जिस तरह से घुसने की छूट दी गई और खून खराब करने के बाद सुरक्षित निकलने दिया गया, उससे स्पष्ट है कि छात्र शक्ति को निशाना बनाने में भाजपा सरकार और भाजपा से जुड़े संगठन पूरी ताकत से लगे है। गिरफ्तारी तो दूर की बात है, केन्द्र की भाजपा सरकार के इशरों पर मौन खड़ी दिल्ली पुलिस ने हमलावरों को पहचानने या उनके नकाब हटवाने तक की कोई कोशिश भी नहीं की।

06-01-2020
जेएनयू विवाद पर सोनिया,उद्धव और ममता ने कसा तंज, कही यह बात...
रा
07:14pm

नई दिल्ली। दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में दो गुटों में हुई मारपीट ने राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी सरकार को घेरा और छात्रों की आवाज दबाने वाला करार दिया है। प.बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे फासिस्ट स्ट्रइाक और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने मुंबई हमला बताया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा, 'भारत के युवाओं और छात्रों की आवाज को रोजाना बंद कराया जा रहा है। सत्तारूढ़ मोदी सरकार के सक्रिय उकसावे के साथ गुंडों द्वारा भारत के युवाओं पर की गई हिंसा भयावह है। यह बहुत ही निराशाजनक और अस्वीकार्य है।

सोनिया ने सरकार पर हमला करते हुए कहा कि यह उदाहरण है कि सरकार हर आवाज को कुचल देगी। उन्होंने कहा, 'कल कड़ाके की ठंड में जिस तरह से जेएनयू के छात्रों और अध्यापकों पर हमला किया गया वह इस बात की चेतावनी है कि हर असंतोष की आवाज का गला घोंटने और कुचलने के लिए सरकार किस हद तक जा सकती है।' महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा, 'हमलावरों को नकाब पहनने की क्या जरुरत थी? वह कायर थे। मैं टीवी पर देख रहा था और इसने मुझे 26/11 मुंबई हमलों की याद दिला दी। यह पता लगाने की जरूरत है कि ये नकाबपोश हमलावर कौन थे। इस समय देश के छात्रों के बीच भय का माहौल है। हम सभी को एक साथ आने और उनमें आत्मविश्वास जगाने की जरूरत है। मैं महाराष्ट्र में इस तरह के हमलों को बर्दाश्त नहीं करूंगा।' पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने इस फासिस्ट सर्जिकल स्ट्राइक बताते हुए कहा, 'दिल्ली की पुलिस अरविंद केजरीवाल के नहीं बल्कि केंद्र सरकार के अधीन है। एक तरफ उन्होंने भाजपा के गुंडे भेजे और दूसरी तरफ पुलिस को निष्क्रिय कर दिया। यदि उन्हें उच्च प्राधिकारी निर्देश देते हैं तो इसमें पुलिस क्या कर सकती है। यह एक फासिस्ट सर्जिकल स्ट्राइक है।