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09-11-2019
प्रधानमंत्री ने किया अयोध्या फैसले का स्वागत, कहा - ये भारतभक्ति का समय है
02:52pm

नई दिल्ली। अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली प्रतिक्रिया सामने आयी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि फैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि न्याय के मंदिर ने दशकों पुराने मामले का सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान कर दिया। बता दें कि फैसला आने से पहले भी प्रधानमंत्री ने फैसले को लेकर शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने कहा, ''देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या पर अपना फैसला सुना दिया है। इस फैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारतभक्ति की भावना को सशक्त करने का है। देशवासियों से मेरी अपील है कि शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखें।'' प्रधानमंत्री ने लिखा, ''सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कई वजहों से महत्वपूर्ण है यह बताता है कि किसी विवाद को सुलझाने में कानूनी प्रक्रिया का पालन कितना अहम है। हर पक्ष को अपनी-अपनी दलील रखने के लिए पर्याप्त समय और अवसर दिया गया। न्याय के मंदिर ने दशकों पुराने मामले का सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान कर दिया।'' प्रधानमंत्री ने आगे लिखा, ''यह फैसला न्यायिक प्रक्रियाओं में जन सामान्य के विश्वास को और मजबूत करेगा, हमारे देश की हजारों साल पुरानी भाईचारे की भावना के अनुरूप हम 130 करोड़ भारतीयों को शांति और संयम का परिचय देना है। भारत के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की अंतर्निहित भावना का परिचय देना है।''

बीजेपी अध्यक्ष क्या बोले?

केंद्रीय गृहमंत्री और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर सर्वसम्मति से आये सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का मैं स्वागत करता हूं। उन्होंने ट्वीट किया, ''मैं सभी समुदायों और धर्म के लोगों से अपील करता हूं कि हम इस निर्णय को सहजता से स्वीकारते हुए शांति और सौहार्द से परिपूर्ण ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के अपने संकल्प के प्रति कटिबद्ध रहें।'' उन्होंने आगे लिखा, ''दशकों से चले आ रहे श्री राम जन्मभूमि के इस कानूनी विवाद को आज इस निर्णय से अंतिम रूप मिला है। मैं भारत की न्याय प्रणाली व सभी न्यायमूर्तियों का अभिनन्दन करता हूं।'' उन्होंने कहा, ''श्री राम जन्मभूमि कानूनी विवाद के लिए प्रयासरत; सभी संस्थाएं, पूरे देश का संत समाज और अनगिनत अज्ञात लोगों जिन्होंने इतने वर्षों तक इसके प्रयास किया मैं उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूं।''

अमित शाह ने फैसले को मील का पत्थर बताया

उन्होंने लिखा, ''मुझे पूर्ण विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय अपने आप में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह निर्णय भारत की एकता, अखंडता और महान संस्कृति को और बल प्रदान करेगा.''

क्या है आयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन रामलला की है। कोर्ट ने इस मामले में निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि तीन पक्ष में जमीन बांटने का हाई कोर्ट फैसला तार्किक नहीं था। कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ की वैकल्पिक जमीन दी जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी वैकल्पिक ज़मीन देना ज़रूरी है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार तीन महीने में ट्रस्ट बना कर फैसला करे। ट्रस्ट के मैनेजमेंट के नियम बनाए, मन्दिर निर्माण के नियम बनाए। विवादित जमीन के अंदर और बाहर का हिस्सा ट्रस्ट को दिया जाए।'' कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ की वैकल्पिक ज़मीन मिले। या तो केंद्र 1993 में अधिगृहित जमीन से दे या राज्य सरकार अयोध्या में ही कहीं दे। अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाने वाली पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस धनंजय वाई चन्द्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट में 16 अक्टूबर 2019 को अयोध्या मामले पर सुनवाई पूरी हुई थी. 6 अगस्त से लगातार 40 दिनों तक इसपर सुनवाई हुई थी।

09-11-2019
पुनर्विचार याचिका पर मुस्लिम बोर्ड की बैंठक के बाद करेंगे फैसला : जफरयाब जिलानी
12:15pm

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। मुस्लिम पक्ष की ओर से पीसी करते हुए जिलानी ने कहा कि फैसले के बाद शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखें। यह किसी की जीत या हार नहीं है। हम आगे की कार्रवाई पर फैसला लेंगे। हालांकि फैसला हमारी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। उन्होंने आगे कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कार्यकारी बोर्ड की बैठक के बाद फैसला लिया जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए या नहीं। हालांकि अभी के आधार पर मुझे लगता है कि पुनर्विचार याचिका दाखिल की जानी चाहिए।

 

09-11-2019
Big Breaking : अयोध्या में राम मंदिर बनने का रास्ता साफ़, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
11:52am

 

नई दिल्ली/रायपुर। देश के सबसे लंबे चले मुकदमे यानी अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन रामलला की है। कोर्ट ने इस मामले में निर्मोही अखाड़े और शिया वक्फ बोर्ड का दावा खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ की वैकल्पिक जमीन दी जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी वैकल्पिक ज़मीन देना ज़रूरी है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार तीन महीने में ट्रस्ट बना कर फैसला करे। ट्रस्ट के मैनेजमेंट के नियम बनाए, मन्दिर निर्माण के नियम बनाए। विवादित जमीन के अंदर और बाहर का हिस्सा ट्रस्ट को दिया जाए।' कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ की वैकल्पिक ज़मीन मिले या तो केंद्र 1993 में अधिगृहित जमीन से दे या राज्य सरकार अयोध्या में ही कहीं दे।

कोर्ट रूम में क्या हुआ?

कोर्ट की कार्यवाही शुरू होते ही सबसे पहले केस नंबर 1501, शिया बनाम सुन्नी वक्फ बोर्ड कैस में एक मत से फैसला आया। इस मामले में शिया वक्फ बोर्ड का दावा खारिज कर दिया गया। कोर्ट ने 1946 का फैसला बरकरार रखा। इसके बाद के नंबर 1502 अयोध्या मामले में एक मत से फैसला आया। सबसे पहले चीफ जस्टिस ने फैसला पढ़ना शुरू किया। सीजेआई ने फैसला पढ़ते हुए कहा, ''कोर्ट को देखना है कि एक व्यक्ति की आस्था दूसरे का अधिकार न छीने। मस्ज़िद 1528 की बनी बताई जाती है लेकिन कब बनी इससे फर्क नहीं पड़ता। 22-23 दिसंबर को मूर्ति रखी गयी, जगह नजूल की ज़मीन है. लेकिन राज्य सरकार हाई कोर्ट में कह चुकी है कि वह ज़मीन पर दावा नहीं करना चाहती।''

कोर्ट ने कहा, ''कोर्ट हदीस की व्याख्या नहीं कर सकता। नमाज पढ़ने की जगह को मस्ज़िद मानने के हक को हम मना नहीं कर सकते। 1991 का प्लेसेस ऑफ वरशिप एक्ट धर्मस्थानों को बचाने की बात कहता है। यह एक्ट भारत की धर्मनिरपेक्षता की मिसाल है।'' सीजेआई ने कहा, ''सूट न. 1(विशारद) ने अपने साथ दूसरे हिंदुओं के भी हक़ का हवाला दिया। सूट 3 (निर्मोही) सेवा का हक मांग रहा है, कब्ज़ा नहीं।''

सीजेआई ने फैसले में बड़ी बात कहते हुए कहा, ''निर्मोही का दावा 6 साल की समय सीमा के बाद दाखिल हुआ। इसलिए खारिज है। '' सीजेआई ने कहा, ''सूट 5 (रामलला) हक के अंदर माना जाएगा।'' कोर्ट ने कहा, ''निर्मोही अपना दावा साबित नहीं कर पाया है। निर्मोही सेवादार नहीं है। रामलला न्याय से सम्बंधित व्यक्ति हैं, राम जन्मस्थान को यह दर्जा नहीं दे सकते।''

इसके बाद कोर्ट ने कहा, '' खुदाई में मिले सबूतों की अनदेखी नहीं कर सकते। हाई कोर्ट के आदेश पर पूरी पारदर्शिता से हुआ। उसे खारिज करने की मांग गलत है। सुन्नी वक्फ बोर्ड ने बहस में अपने दावे को बदला। पहले कुछ कहा, बाद मे नीचे मिली रचना को ईदगाह कहा। साफ है कि बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बना था।''

कोर्ट ने कहा, ''नीचे विशाल रचना थी, वह रचना इस्लामिक नहीं थी। वहां मिली कलाकृतियां भी इस्लामिक नहीं थी। एएसआई ने वहां 12वी सदी में मंदिर होना बताया। विवादित ढांचे में पुरानी संरचना की चीज़ें इस्तेमाल हुईं। कसौटी का पत्थर, खंभा आदि देखा गया। एएसआई यह नहीं बता पाया कि मंदिर तोड़कर विवादित ढांचा बना था या नहीं। 12वी सदी से 16वी सदी पर वहां क्या हो रहा था। साबित नहीं।''

कोर्ट ने कहा, ''हिन्दू अयोध्या को राम भगवान का जन्मस्थान मानते हैं। मुख्य गुंबद को ही जन्म की सही जगह मानते हैं। अयोध्या में राम का जन्म होने के दावे का किसी ने विरोध नहीं किया. विवादित जगह पर हिन्दू पूजा करते रहे थे. गवाहों के क्रॉस एक्जामिनेशन से हिन्दू दावा झूठा साबित नहीं हुआ.''

कोर्ट ने कहा, ''रामलला ने ऐतिहासिक ग्रंथों, यात्रियों के विवरण, गजेटियर के आधार पर दलीलें रखीं. चबूतरा, भंडार, सीता रसोई से भी दावे की पुष्टि होती है। हिन्दू परिक्रमा भी किया करते थे. लेकिन टाइटल सिर्फ आस्था से साबित नहीं होता.''

कोर्ट ने फैसला पढ़ते हुए कहा, ''सुन्नी वक्फ बोर्ड ने जगह को मस्ज़िद घोषित करने की मांग की है. इस सूट को हम सीमा के अंदर मानते हैं. सिर्फ विवादित ढांचे के नीचे एक पुरानी रचना से हिंदू दावा माना नहीं जा सकता.'' कोर्ट ने कहा, ''मुसलमान दावा करते हैं कि मस्ज़िद बनने से 1949 तक लगातार नमाज पढ़ते थे। लेकिन 1856-57 तक ऐसा होने का कोई सबूत नहीं है.''

कोर्ट ने कहा, ''हिंदुओं के वहां पर अधिकार की ब्रिटिश सरकार ने मान्यता दी, 1877 में उनके लिए एक और रास्ता खोला गया। कोर्ट ने कहा कि अंदरूनी हिस्से में मुस्लिमों की नमाज बंद हो जाने का कोई सबूत नहीं मिला। अंग्रेज़ों ने दोनों हिस्से अलग रखने के लिए रेलिंग बनाई।''

कोर्ट ने कहा, ''1856 से पहले हिन्दू भी अंदरूनी हिस्से में पूजा करते थे, रोकने पर बाहर चबूतरे की पूजा करने लगे। फिर भी मुख्य गुंबद के नीचे गर्भगृह मानते थे, इसलिए रेलिंग के पास आकर पूजा करते थे।''

कोर्ट ने कहा, ''1934 के दंगों के बाद मुसलमानों का वहां कब्ज़ा नहीं रहा। वह जगह पर अपना अधिकार साबित नहीं कर पाए हैं। जबकि यात्रियों के वृतांत और पुरातात्विक सबूत हिंदुओं के हक में हैं।''

कोर्ट ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि 6 दिसंबर 1992 को स्टेटस को का ऑर्डर होने के बावजूद ढांचा गिराया गया। लेकिन सुन्नी बोर्ड एडवर्स पोसेसन की दलील साबित करने में नाकाम रहा है। लेकिन 16 दिसंबर 1949 तक नमाज हुई। कोर्ट ने कहा कि सूट 4 और 5 में हमें सन्तुलन बनाना होगा, हाई कोर्ट ने 3 हिस्से किये, यह तार्किक नहीं था।

कोर्ट ने कहा, ''हर मजहब के लोगों को एक जैसा सम्मान संविधान में दिया गया है। बाहर हिंदुओं की पूजा सदियों तक चलती रही। मुसलमान अंदर के हिस्से में 1856 से पहले का कब्जा साबित नहीं कर पाए।''

09-11-2019
Big Breaking : सुप्रीम कोर्ट ने रामजन्मभूमि न्यास को सौंपी विवादित जमीन
12:20pm

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे फैसले के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन रामजन्मभूमि न्यास को सौंप दी है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश देते हुए कहा कि सरकार को 3 महीनों के अंदर मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट बनाना है।  

09-11-2019
कलेक्टर और एसएसपी ने जनता से की शांति बनाए रखने की अपील
11:24am

रायपुर। कलेक्टर डॉ. एस भारतीदासन और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आरिफ़ एच शेख ने शनिवार को पुलिस कंट्रोल रूम में शान्ति समिति की बैठक लेकर सभी से रायपुर जिले के परंपरागत प्रेम और सदभाव के वातावरण को बनाये रखने की अपील की। बैठक में कलेक्टर ने बताया कि अयोध्या पर आने वाले सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के मद्देनजर एहतियात के रूप में शनिवार से शराब की दुकानें बंद रहेंगी, स्कूल भी सेकंड हाफ से बंद रहेंगे, फटाखे चलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है और डी जे भी प्रतिबंधित रहेगा। कलेक्टर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया की अफवाहों से सतर्क रहें और उनके आगे ना बढ़ाये, 100 प्रतिशत विस्वसनीय होने पर ही उस पर विस्वास करें। उन्होंने कहा कि आई टी द्वारा सोशल मीडिया की लगातार निगरानी की जा रही है,  किसी भी प्रकार की गलत जानकारी या अफवाह फैलाये जाने पर उसके एडमिन पर कार्यवाही की जाएगी।

09-11-2019
Big Breaking : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मुस्लिम पक्ष को दी जाएगी दूसरी जमीन
03:16pm

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने फैसला सुनाते हुए मुस्लिम पक्ष को दूसरी जमीन देने का आदेश दिया। बता दें कि मुस्लिम पक्ष जमीन पर अपना अधिकार साबित नहीं कर सका। जजों ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मुस्लिम पक्ष को आयोध्या में ही जमीन दी जाए।

09-11-2019
Big Breaking : शिया वक्फ बोर्ड के बाद निर्मोही अखाड़े की याचिका खारिज
11:27am

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के जजों ने फैसला पढ़ना शुरू कर दिया है। अपने पहले फैसले में सुप्रीम कोर्ट के जजों ने निर्मोही अखाड़े की याचिका ख़ारिज कर दी है। यह फैसला सभी जजों की सर्वसम्मति के बाद लिया गया है।

09-11-2019
Big Breaking : सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की शिया वक्फ बोर्ड की याचिका
11:28am

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के जजों ने फैसला पढ़ना शुरू कर दिया है। अपने पहले फैसले में सुप्रीम कोर्ट के जजों ने शिया वक्फ बोर्ड की याचिका ख़ारिज कर दी है। यह फैसला सभी जजों की सर्वसम्मति के बाद लिया गया है।