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09-12-2019
अयोध्या मामला : सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनौती देगी हिंदू महासभा

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के 5 एकड़ जमीं देने का फैसला सुनाया था। इस फैसले ने नाखुश हिंदू महासभा सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने की तैयारी कर रही है। हिंदू महासभा के वकील विष्णु जैन ने कहा, ‘हम अयोध्या में बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में अयोध्या में कहीं भी मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ जमीन देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को चुनौती देंगे। हम रिव्यु पिटीशन दाखिल करेंगे।

 

03-12-2019
अयोध्या मामलाः जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने वकील राजीव धवन को से केस हटाया

नई दिल्ली। अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद में मुस्लिम पक्ष की ओर से पेश होने वाले वरिष्ठ वकील राजीव धवन को जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने इस मामले से हटा दिया है। जमीयत द्वारा दाखिल की गई पुनर्विचार याचिका में राजीव धवन को वकील नहीं बनाया गया है। राजीव धवन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर इस बारे में बताया है। उन्होंने ने फेसबुक पोस्ट पर लिखा कि मुझे ये बताया गया कि मुझे केस से हटा दिया गया है, क्योंकि मेरी तबीयत ठीक नहीं है। ये बिल्कुल बकवास बात है। जमीयत को ये हक है कि वो मुझे केस से हटा सकते हैं लेकिन जो वजह दी गई है वह गलत है। उन्होंने कहा कि अब वे इस मामले में शामिल नहीं होंगे। इस बाबत राजीव धवन ने एजाज मकबूल को एक चिट्ठी भी लिखी है। इस मामले पर वकील एजाज मकबूल ने कहा कि मुद्दा यह है कि मेरे क्लाइंट यानी की जमीयत सोमवार को रिव्यू पिटिशन दाखिल करना चाहते थे। यह काम राजीव धवन को करना था। वह उपलब्ध नहीं थे इसलिए मैं पिटिशन में उनका नाम नहीं दे पाया। यह कोई बड़ी बात नहीं है। बता दें कि सोमवार को अयोध्या रामजन्मभूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट में पहली पुनर्विचार याचिका दाखिल की गई। पक्षकार एम.सिद्दीकी ने 217 पन्नों की पुनर्विचार याचिका दाखिल की। एम. सिद्दीकी की तरफ से मांग की गई कि संविधान पीठ के आदेश पर रोक लगाई जाए, जिसमें कोर्ट ने विवादित जमीन को राम मंदिर के पक्ष दिया था।

 

02-12-2019
अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से संतुष्ट नहीं, पुनर्विचार याचिका दायर

नई दिल्ली। जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने अयोध्या केस में सुनाए गए फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल की है। यह याचिका मौलाना सैयद अशद रशीदी की ओर से दायर की गई है, जो अयोध्या मामले में मुस्लिम पक्ष के 10 याचिकाकतार्ओं में से एक हैं। यह पुनर्विचार याचिका इस विवाद में मूल वादकारियों में शामिल एम. सिद्दीक के कानूनी वारिस मौलाना सैयद अशद रशीदी ने दायर की है। इसमें कहा गया है कि फैसला त्रुटिपूर्ण है और इस पर संविधान के अनुच्छेद 137 के तहत पुनर्विचार की जरूरत है। पुनर्विचार याचिका में कहा गया है कि शीर्ष अदालत ने पक्षकारों को राहत के मामले में संतुलन बनाने का प्रयास किया है, हिंदू पक्षकारों की अवैधताओं को माफ किया गया है और मुस्लिम पक्षकारों को वैकल्पिक रूप में पांच एकड़ भूमि का आबंटन किया गया है जिसका अनुरोध किसी भी मुस्लिम पक्षकार ने नहीं किया था।

वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम आज सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पुनर्विचार याचिका दायर नहीं कर रहे हैं। हमने समीक्षा याचिका तैयार की है और हम इसे 9 दिसंबर से पहले किसी भी दिन दायर कर सकते हैं। केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने अयोध्या मामले को लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले में पुनर्विचार याचिका की बात करने वाले लोग बिखराव और टकराव का माहौल पैदा करने की कोशिश में हैं लेकिन समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अयोध्या का मुद्दा अब खत्म हो गया है और इसे अब उलझाने की कोशिश नहीं होनी चाहिए क्योंकि देश की शीर्ष अदालत ने सर्वसम्मति के फैसले में इस मामले को हल कर दिया है।

10-11-2019
महंत नरेंद्र गिरी ने ओवैसी के बयान पर किया पलटवार, कहा - भारत छोड़कर चले जाना चाहिए पकिस्तान

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में असदुद्दीन ओवैसी की ओर से आए बयान को लेकर संत समाज में उबाल बना हुआ है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरी ने उनपर कटाक्ष करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला न मानना राष्ट्रद्रोह है। उन्होंने कहा है कि ओवैसी भारत और हिंदुओं के खिलाफ जहर उगलते रहते हैं। अगर ओवैसी को भारत में अच्छा नहीं लगता है तो उन्हें भारत छोड़कर पाकिस्तान चले जाना चाहिए।

महंत नरेंद्र गिरी ने चेतावनी देते हुए कहा है कि ओवैसी हमेशा से हिंदुओं और साधु संतों का अपमान करते आए हैं। ओवैसी अगर इस तरह की भाषा का दोबारा इस्तेमाल करेंगे तो साधु संत समाज और अखाड़ा परिषद इसे बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अगर ओवैसी को भारत में रहना है तो भारत के संविधान और न्यायपालिका के आदेश का पालन और सम्मान करना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि भारत में रहकर अगर भारत के खिलाफ ओवैसी बयानबाजी करेंगे तो संत समाज उन्हें इसका मुंहतोड़ जवाब देगा। उन्होंने कहा कि देश में सभी धर्मों के लोग रहते हैं। ऐसे में अगर मंदिर निर्माण को जबरदस्ती करते और इसमें भेदभाव होता तो सामाजिक समरसता नहीं रहती और सांप्रदायिक सौहार्द भी बिगड़ता। विश्व हिंदू परिषद, आरएसएस और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद सभी राम मंदिर का निर्माण चाहते थे। यहां तक कि कुछ मुस्लिम पक्ष के लोग भी इस पक्ष में थे। तो फिर ओवैसी ऐसे बयानबाजी क्यों कर रहे हैं। 

09-11-2019
प्रधानमंत्री ने किया अयोध्या फैसले का स्वागत, कहा - ये भारतभक्ति का समय है

नई दिल्ली। अयोध्या भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहली प्रतिक्रिया सामने आयी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि फैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि न्याय के मंदिर ने दशकों पुराने मामले का सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान कर दिया। बता दें कि फैसला आने से पहले भी प्रधानमंत्री ने फैसले को लेकर शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की थी। प्रधानमंत्री ने कहा, ''देश के सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या पर अपना फैसला सुना दिया है। इस फैसले को किसी की हार या जीत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रामभक्ति हो या रहीमभक्ति, ये समय हम सभी के लिए भारतभक्ति की भावना को सशक्त करने का है। देशवासियों से मेरी अपील है कि शांति, सद्भाव और एकता बनाए रखें।'' प्रधानमंत्री ने लिखा, ''सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला कई वजहों से महत्वपूर्ण है यह बताता है कि किसी विवाद को सुलझाने में कानूनी प्रक्रिया का पालन कितना अहम है। हर पक्ष को अपनी-अपनी दलील रखने के लिए पर्याप्त समय और अवसर दिया गया। न्याय के मंदिर ने दशकों पुराने मामले का सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान कर दिया।'' प्रधानमंत्री ने आगे लिखा, ''यह फैसला न्यायिक प्रक्रियाओं में जन सामान्य के विश्वास को और मजबूत करेगा, हमारे देश की हजारों साल पुरानी भाईचारे की भावना के अनुरूप हम 130 करोड़ भारतीयों को शांति और संयम का परिचय देना है। भारत के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की अंतर्निहित भावना का परिचय देना है।''

बीजेपी अध्यक्ष क्या बोले?

केंद्रीय गृहमंत्री और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि पर सर्वसम्मति से आये सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का मैं स्वागत करता हूं। उन्होंने ट्वीट किया, ''मैं सभी समुदायों और धर्म के लोगों से अपील करता हूं कि हम इस निर्णय को सहजता से स्वीकारते हुए शांति और सौहार्द से परिपूर्ण ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के अपने संकल्प के प्रति कटिबद्ध रहें।'' उन्होंने आगे लिखा, ''दशकों से चले आ रहे श्री राम जन्मभूमि के इस कानूनी विवाद को आज इस निर्णय से अंतिम रूप मिला है। मैं भारत की न्याय प्रणाली व सभी न्यायमूर्तियों का अभिनन्दन करता हूं।'' उन्होंने कहा, ''श्री राम जन्मभूमि कानूनी विवाद के लिए प्रयासरत; सभी संस्थाएं, पूरे देश का संत समाज और अनगिनत अज्ञात लोगों जिन्होंने इतने वर्षों तक इसके प्रयास किया मैं उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करता हूं।''

अमित शाह ने फैसले को मील का पत्थर बताया

उन्होंने लिखा, ''मुझे पूर्ण विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिया गया यह ऐतिहासिक निर्णय अपने आप में एक मील का पत्थर साबित होगा। यह निर्णय भारत की एकता, अखंडता और महान संस्कृति को और बल प्रदान करेगा.''

क्या है आयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला?

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि विवादित जमीन रामलला की है। कोर्ट ने इस मामले में निर्मोही अखाड़े का दावा खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि तीन पक्ष में जमीन बांटने का हाई कोर्ट फैसला तार्किक नहीं था। कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को पांच एकड़ की वैकल्पिक जमीन दी जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि सुन्नी वक्फ बोर्ड को भी वैकल्पिक ज़मीन देना ज़रूरी है। कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार तीन महीने में ट्रस्ट बना कर फैसला करे। ट्रस्ट के मैनेजमेंट के नियम बनाए, मन्दिर निर्माण के नियम बनाए। विवादित जमीन के अंदर और बाहर का हिस्सा ट्रस्ट को दिया जाए।'' कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ की वैकल्पिक ज़मीन मिले। या तो केंद्र 1993 में अधिगृहित जमीन से दे या राज्य सरकार अयोध्या में ही कहीं दे। अयोध्या विवाद पर फैसला सुनाने वाली पीठ में चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के अलावा जस्टिस एस ए बोबडे, जस्टिस धनंजय वाई चन्द्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट में 16 अक्टूबर 2019 को अयोध्या मामले पर सुनवाई पूरी हुई थी. 6 अगस्त से लगातार 40 दिनों तक इसपर सुनवाई हुई थी।

09-11-2019
पुनर्विचार याचिका पर मुस्लिम बोर्ड की बैंठक के बाद करेंगे फैसला : जफरयाब जिलानी

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुस्लिम पक्ष के वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं। मुस्लिम पक्ष की ओर से पीसी करते हुए जिलानी ने कहा कि फैसले के बाद शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखें। यह किसी की जीत या हार नहीं है। हम आगे की कार्रवाई पर फैसला लेंगे। हालांकि फैसला हमारी उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा। उन्होंने आगे कहा कि ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का कार्यकारी बोर्ड की बैठक के बाद फैसला लिया जाएगा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस पर पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाए या नहीं। हालांकि अभी के आधार पर मुझे लगता है कि पुनर्विचार याचिका दाखिल की जानी चाहिए।

 

09-11-2019
Big Breaking : सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, मुस्लिम पक्ष को दी जाएगी दूसरी जमीन

नई दिल्ली। अयोध्या मामले में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की पीठ ने फैसला सुनाते हुए मुस्लिम पक्ष को दूसरी जमीन देने का आदेश दिया। बता दें कि मुस्लिम पक्ष जमीन पर अपना अधिकार साबित नहीं कर सका। जजों ने फैसला सुनाते हुए कहा कि मुस्लिम पक्ष को आयोध्या में ही जमीन दी जाए।

07-10-2019
6 दिसंबर से शुरू हो जाएगा राम मंदिर का निर्माण : सांसद साक्षी महाराज

नई दिल्ली। राम मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के बीच उन्नाव सांसद साक्षी महाराज का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि अयोध्या मामले में अच्छी खबर मिलने वाली है। छह दिसंबर तक अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण प्रारंभ हो जाएगा। वह रविवार को उन्नाव नगर के शीतलगंज के आनंदेश्वरी देवी मंदिर में पूजा करने आए थे। सांसद ने मंदिर स्थित तालाब के सुंदरीकरण और लाइट लगवाने की घोषणा भी की। पूजा के बाद उन्होंने कहा कि सूबे के मुखिया ने कह दिया है कि अयोध्या मसले पर जल्द खुशखबरी आने वाली है। मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही। 18 अक्टूबर को मुस्लिम पक्ष को अपनी बात रखनी है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री सूबे को बेहतर प्रदेश बनाने में जुटे हैं। जब-जब उत्तर प्रदेश में भाजपा की सरकार आई है तब-तब कानून व्यवस्था ठीक रही है। चाहे वह कल्याण सिंह की सरकार हो या योगी की। इस मौके पर भाजपा नेता उत्तमचंद्र लोधी, भगौती रावत, रामचंद्र यादव, प्रमोद दीक्षित आदि मौजूद रहे।

 

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